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यूपीआई एमडीआर टैक्स नहीं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार की ज़रूरत: टीवी मोहनदास पई

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यूपीआई एमडीआर टैक्स नहीं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार की ज़रूरत: टीवी मोहनदास पई

सारांश

इन्फोसिस के पूर्व CFO टीवी मोहनदास पई ने साफ किया — UPI पर MDR टैक्स नहीं है। 96% लेनदेन इससे अप्रभावित रहेंगे। लेकिन असली सवाल यह है कि जब UPI 24 अरब से 50 अरब लेनदेन तक पहुँचे, तो इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड का खर्च कौन उठाएगा?

मुख्य बातें

टीवी मोहनदास पई ने 16 सितंबर 2026 को बेंगलुरु में स्पष्ट किया कि UPI MDR एक 'टैक्स' नहीं, बल्कि बैंकों को दिया जाने वाला सेवा शुल्क है।
कुल UPI लेनदेन में से 96 प्रतिशत MDR के दायरे से बाहर रहेंगे; 70 प्रतिशत P2P भुगतान पूरी तरह निःशुल्क।
₹2,000 तक के सभी व्यापारी भुगतान शुल्क-मुक्त; केवल ₹2,000 से अधिक के P2M लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू।
UPI लेनदेन अगले दो वर्षों में 24 अरब से बढ़कर 50 अरब तक पहुँचने का अनुमान; इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड अनिवार्य।
राजस्थान वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने भी फैसले का समर्थन करते हुए भारत को डिजिटल भुगतान में वैश्विक अग्रणी बताया।

आरिन कैपिटल के चेयरमैन और इन्फोसिस के पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी टीवी मोहनदास पई ने 16 सितंबर 2026 को बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट किया कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) पर लागू किए जा रहे मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को 'टैक्स' कहना भ्रामक है, क्योंकि 96 प्रतिशत UPI लेनदेन इस शुल्क के दायरे से पूरी तरह बाहर रहेंगे। उनके अनुसार यह निर्णय देश के तेज़ी से बढ़ते डिजिटल भुगतान ढाँचे को मज़बूत करने की दिशा में एक अनिवार्य कदम है।

कौन से लेनदेन शुल्क-मुक्त रहेंगे

पई ने बताया कि UPI पर होने वाले कुल लेनदेन में से लगभग 70 प्रतिशत व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) श्रेणी के हैं और उन पर किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लगेगा। इसके अतिरिक्त, ₹2,000 तक के सभी व्यापारी भुगतान भी पूरी तरह निःशुल्क रहेंगे। केवल ₹2,000 से अधिक के व्यापारी (P2M) लेनदेन पर नाममात्र का 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा।

पई ने एक व्यावहारिक पहलू की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि यदि किसी उपभोक्ता को ₹2,500 का भुगतान करना हो, तो वह इसे ₹1,500 और ₹1,000 के दो हिस्सों में बाँटकर शुल्क से बच सकता है।

MDR टैक्स नहीं, सेवा शुल्क है

पई ने ज़ोर देकर कहा कि MDR को टैक्स की संज्ञा देना गलत है। यह बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को दिया जाने वाला प्रोसेसिंग शुल्क है, ठीक वैसे ही जैसे क्रेडिट कार्ड से भुगतान पर व्यापारियों को कार्ड कंपनी और बैंक को शुल्क देना पड़ता है। उन्होंने कहा, 'जब कोई ग्राहक क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करता है, तो व्यापारी को कार्ड कंपनी और बैंक को शुल्क अदा करना होता है — यह उसी का UPI संस्करण है।'

इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड क्यों ज़रूरी है

पई ने बताया कि UPI प्रणाली को चालू रखने और निरंतर बेहतर बनाने में भारी पूँजी निवेश और परिचालन खर्च आता है। उन्होंने उल्लेख किया कि अतीत में अचानक लेनदेन की संख्या बढ़ने पर UPI में 15 से 30 प्रतिशत तक ट्रांजैक्शन विफल होने की समस्या देखी गई है।

उनके अनुसार अगले दो वर्षों में UPI लेनदेन की संख्या 24 अरब से बढ़कर 50 अरब तक पहुँच सकती है। ऐसे में सूचना प्रौद्योगिकी ढाँचे को उन्नत करना अपरिहार्य है ताकि रियल-टाइम लेनदेन बिना किसी रुकावट के संभाले जा सकें।

पई ने सवाल उठाया कि इस अपग्रेड का खर्च कौन वहन करेगा। यदि यह पूरी तरह बैंकों पर छोड़ा गया, तो इसका बोझ अंततः जमाकर्ताओं पर पड़ेगा। इसलिए इस लागत का एक हिस्सा उन व्यापारियों को भी उठाना उचित है, जिन्हें डिजिटल भुगतान स्वीकार करने से प्रत्यक्ष व्यावसायिक लाभ होता है।

विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

राजस्थान वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि आज विश्व भर में भारत की डिजिटल भुगतान क्रांति की सराहना हो रही है। उन्होंने कहा कि UPI के ज़रिये सर्वाधिक ऑनलाइन लेनदेन करने वाले देशों में भारत अग्रणी स्थान पर है और UPI को देश की सबसे बड़ी तकनीकी उपलब्धियों में गिना जाता है।

यह बहस ऐसे समय में उठी है जब भारत डिजिटल भुगतान के वैश्विक नेतृत्वकर्ता के रूप में उभर रहा है और UPI को अन्य देशों में भी विस्तारित करने की कोशिशें जारी हैं। UPI इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च की जवाबदेही को लेकर यह बहस आने वाले महीनों में और तीखी हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो लागत को उपभोक्ता-अनुकूल तरीके से साझा करना ज़रूरी है। ₹2,000 की सीमा और स्प्लिट पेमेंट का विकल्प MDR को व्यावहारिक रूप से नगण्य बनाता है — पर छोटे व्यापारियों पर असली असर तब पता चलेगा जब लागत का हिसाब-किताब सामने आएगा। 50 अरब लेनदेन के लक्ष्य तक पहुँचने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग का पारदर्शी मॉडल ज़रूरी है, वरना फेल ट्रांजैक्शन की पुरानी समस्या फिर लौटेगी।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपीआई पर MDR क्या है और यह टैक्स से कैसे अलग है?
MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) वह शुल्क है जो व्यापारी बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को डिजिटल लेनदेन प्रोसेस करने के बदले देते हैं — ठीक वैसे जैसे क्रेडिट कार्ड पर प्रोसेसिंग शुल्क लगता है। यह सरकारी राजस्व के रूप में नहीं जाता, इसलिए इसे टैक्स नहीं कहा जा सकता।
कौन से UPI लेनदेन पर MDR नहीं लगेगा?
₹2,000 तक के सभी व्यापारी भुगतान और सभी P2P (व्यक्ति से व्यक्ति) लेनदेन पूरी तरह MDR-मुक्त रहेंगे। कुल मिलाकर 96 प्रतिशत UPI लेनदेन इस शुल्क के दायरे से बाहर हैं।
₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर MDR कितना लगेगा?
₹2,000 से अधिक के व्यापारी UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू किया गया है। टीवी मोहनदास पई ने बताया कि उपभोक्ता चाहें तो भुगतान को दो हिस्सों में बाँटकर इस शुल्क से बच सकते हैं।
UPI इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड की ज़रूरत क्यों पड़ रही है?
UPI लेनदेन की संख्या अगले दो वर्षों में 24 अरब से बढ़कर 50 अरब तक पहुँच सकती है। अतीत में लेनदेन का बोझ अचानक बढ़ने पर 15 से 30 प्रतिशत तक ट्रांजैक्शन विफल हुए हैं, इसलिए सिस्टम को उन्नत करना ज़रूरी है।
इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड का खर्च कौन उठाएगा?
पई के अनुसार यदि पूरा खर्च बैंकों पर डाला जाए तो इसका असर जमाकर्ताओं पर पड़ेगा। MDR के ज़रिये उन व्यापारियों से एक हिस्सा लेना उचित है जिन्हें डिजिटल भुगतान स्वीकार करने से सीधा व्यावसायिक लाभ होता है।
राष्ट्र प्रेस
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