16 सितंबर 2026
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₹2,000 से अधिक UPI चार्ज पर NDA नेताओं का समर्थन, अनुराग ठाकुर बोले — राहुल गांधी कर रहे भ्रम की राजनीति

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₹2,000 से अधिक UPI चार्ज पर NDA नेताओं का समर्थन, अनुराग ठाकुर बोले — राहुल गांधी कर रहे भ्रम की राजनीति

सारांश

₹2,000 से अधिक के यूपीआई मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% शुल्क प्रस्ताव पर NDA एकजुट हुई — रामदास अठावले से लेकर अनुराग ठाकुर तक ने इसे राजस्व और साइबर सुरक्षा के लिए जरूरी बताया। राहुल गांधी के 'अमेरिकी दबाव' वाले आरोप को सत्ता पक्ष ने सिरे से खारिज कर दिया।

मुख्य बातें

₹2,000 से अधिक के मर्चेंट यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 0.4% शुल्क लगाने का प्रस्ताव विवाद के केंद्र में है।
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने इसे उचित बताया — ₹75,000 के ट्रांजैक्शन पर केवल ₹300 का बोझ।
भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि देश के कुल यूपीआई ट्रांजैक्शन का 96% हिस्सा ₹2,000 से कम का है, अतः आम उपभोक्ता प्रभावित नहीं होगा।
राहुल गांधी के 'अमेरिकी दबाव' और 0.5% चार्ज वाले दावे को NDA नेताओं ने भ्रामक और निराधार बताया।
जदयू के राजीव रंजन के अनुसार, यह शुल्क मर्चेंट वहन करेगा, सामान्य ग्राहक नहीं।
नीतिगत अंतिम फैसला अभी लंबित; अनुराग ठाकुर ने रिपोर्ट की गहन समीक्षा की बात कही।

नई दिल्ली, 16 सितंबर 2026: ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाने के प्रस्ताव पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेताओं ने सरकार के पक्ष में खुलकर बयान दिए हैं। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले, भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर और कई अन्य नेताओं ने इस कदम को उचित ठहराते हुए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया।

सरकार का रुख और तर्क

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा, '₹2,000 तक के ट्रांजैक्शन पर सरकार का फैसला सही है। छोटे विक्रेताओं और कारोबारियों को इससे कोई परेशानी नहीं होगी। यदि कोई ₹2,000 से अधिक का व्यापारिक लेन-देन करता है, तो 0.4 फीसदी की मामूली फीस कोई बड़ा बोझ नहीं है — उदाहरण के लिए, ₹75,000 के ट्रांजैक्शन पर करीब ₹300 ही देने होंगे।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि विकास कार्यों के लिए सरकार को राजस्व की आवश्यकता होती है।

अठावले ने राहुल गांधी के इस आरोप को 'पूरी तरह बेबुनियाद' करार दिया कि यह निर्णय अमेरिकी दबाव में लिया गया है।

अनुराग ठाकुर की प्रतिक्रिया

भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने भारत की यूपीआई प्रणाली को वैश्विक मिसाल बताते हुए कहा कि आज दुनिया के बड़े देशों के नेता भारत में सड़क किनारे के दुकानदारों तक डिजिटल भुगतान देखकर चकित हैं। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस का काम सिर्फ लोगों को गुमराह करना और आलोचना करना है।' साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस रिपोर्ट का और अधिक बारीकी से अध्ययन जरूरी है और उल्लेखनीय बात यह है कि देश के कुल यूपीआई ट्रांजैक्शन में 96 प्रतिशत ट्रांजैक्शन ₹2,000 से कम के हैं, जिन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।

अन्य NDA नेताओं के बयान

भाजपा के पंजाब राज्य प्रभारी सतीश पूनिया ने यूपीआई को पिछले 10-12 वर्षों के सबसे बड़े बदलावों में से एक बताया और फ्रांस के राष्ट्रपति सहित अफ्रीकी नेताओं के हवाले से इसकी वैश्विक स्वीकार्यता की बात की। उन्होंने टोल शुल्क का उदाहरण देते हुए कहा कि शुरुआती विरोध के बाद बेहतर सड़कें मिलीं, वैसे ही यूपीआई से मिलने वाली सुविधाओं पर ध्यान देना चाहिए।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने सोशल मीडिया पर 0.5 फीसदी चार्ज का उल्लेख किया, जबकि वास्तविक प्रस्तावित दर 0.4 फीसदी है। गुरु प्रकाश ने इसे 'भ्रम फैलाने' की कोशिश बताया।

जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि आम ग्राहकों को चिंता करने की जरूरत नहीं, क्योंकि यह शुल्क मर्चेंट पर लागू होगा, न कि सामान्य उपभोक्ता पर। भाजपा सांसद गुलाम अली खटाना ने साइबर सुरक्षा का हवाला देते हुए कहा कि बड़े ट्रांजैक्शन पर शुल्क से धोखाधड़ी के विरुद्ध सुरक्षा ढाँचा मजबूत होगा।

कर्नाटक विधान परिषद में विपक्ष के नेता और भाजपा नेता चलावादी नारायणस्वामी ने इसे व्यावसायिक लेन-देन का मामला बताते हुए कहा कि कारोबारी घरानों द्वारा उपयोग किए जाने पर थोड़ा शुल्क स्वाभाविक है। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री नरेंद्र कश्यप ने कहा कि केंद्र सरकार हर निर्णय राष्ट्रहित में लेती है और राहुल गांधी को इसे सकारात्मक दृष्टि से देखना चाहिए।

राहुल गांधी का आरोप और विपक्ष की स्थिति

गौरतलब है कि राहुल गांधी ने इस शुल्क प्रस्ताव को अमेरिकी दबाव से जोड़ा था और इसे आम जनता के हितों के खिलाफ बताया था। सत्ता पक्ष के नेताओं ने इन दावों को सिरे से खारिज किया और उन्हें 'भ्रामक' करार दिया। यह ऐसे समय में आया है जब यूपीआई ट्रांजैक्शन की मात्रा और मूल्य दोनों ने ऐतिहासिक ऊँचाई छुई है।

आगे क्या होगा

यूपीआई चार्ज पर अंतिम नीतिगत फैसला अभी लंबित है और इस पर व्यापक परामर्श प्रक्रिया जारी बताई जा रही है। अनुराग ठाकुर ने स्वयं कहा कि रिपोर्ट का 'और ज़्यादा बारीकी से अध्ययन और परीक्षण' होना चाहिए, जो यह संकेत देता है कि सरकार के भीतर भी इस पर समीक्षा जारी है। डिजिटल भुगतान उद्योग और छोटे व्यापारी वर्ग की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में इस बहस को और आकार देगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन खुद अनुराग ठाकुर का यह कहना कि रिपोर्ट की 'और बारीकी से समीक्षा जरूरी है' — यह संकेत देता है कि सरकार के भीतर भी यह फैसला पूरी तरह पक्का नहीं है। 96% ट्रांजैक्शन पर कोई असर न होने का तर्क सुनने में तार्किक लगता है, मगर असली सवाल यह है कि शेष 4% मर्चेंट — जिनमें मध्यम वर्ग के दुकानदार, रेस्तरां और छोटे ई-कॉमर्स विक्रेता भी शामिल हैं — पर यह अतिरिक्त लागत कैसे पड़ेगी और वे इसे उपभोक्ताओं तक पहुँचाएँगे या नहीं। विपक्ष के आरोपों में तथ्यात्मक गड़बड़ी (0.5% बनाम 0.4%) ने बहस को भटका दिया है, जबकि असली विमर्श यूपीआई के दीर्घकालिक वित्तीय ढाँचे और बैंकों-फिनटेक कंपनियों को होने वाले लाभ पर होना चाहिए था।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

₹2,000 से अधिक के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर कितना चार्ज लगेगा?
प्रस्ताव के अनुसार, ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 0.4% शुल्क लागू होगा। ₹2,000 तक के ट्रांजैक्शन पूरी तरह निःशुल्क रहेंगे। यह शुल्क मर्चेंट (विक्रेता) पर लागू होगा, न कि सामान्य उपभोक्ता पर।
क्या आम ग्राहकों पर यूपीआई चार्ज का असर पड़ेगा?
जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन के अनुसार, यह शुल्क मर्चेंट को वहन करना होगा, आम ग्राहक को नहीं। इसके अलावा, देश के कुल यूपीआई ट्रांजैक्शन का 96% हिस्सा ₹2,000 से कम का है, जिस पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।
राहुल गांधी ने यूपीआई चार्ज पर क्या आरोप लगाए?
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि यह निर्णय अमेरिकी दबाव में लिया गया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इसे 0.5% चार्ज के रूप में भी पेश किया, जबकि प्रस्तावित दर 0.4% है। NDA नेताओं ने इन दोनों दावों को निराधार और भ्रामक बताया।
NDA नेताओं ने यूपीआई चार्ज का समर्थन क्यों किया?
NDA नेताओं ने कहा कि यह शुल्क सरकार के राजस्व, डिजिटल अवसंरचना और साइबर सुरक्षा के लिए जरूरी है। उनका तर्क है कि ₹2,000 से अधिक के ट्रांजैक्शन मुख्यतः व्यापारिक प्रकृति के होते हैं और 0.4% शुल्क कोई बड़ा वित्तीय बोझ नहीं है।
यूपीआई चार्ज पर अंतिम फैसला कब तक आएगा?
अभी तक कोई अंतिम नीतिगत घोषणा नहीं हुई है। भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने स्वयं कहा कि इस रिपोर्ट का और गहन अध्ययन व परीक्षण होना चाहिए, जो यह दर्शाता है कि सरकार अभी समीक्षा प्रक्रिया में है।
राष्ट्र प्रेस
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