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₹2,000 से अधिक UPI चार्ज पर NDA नेताओं का समर्थन, राहुल गांधी पर गुमराह करने का आरोप

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₹2,000 से अधिक UPI चार्ज पर NDA नेताओं का समर्थन, राहुल गांधी पर गुमराह करने का आरोप

सारांश

₹2,000 से अधिक के मर्चेंट यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 0.4% शुल्क के प्रस्ताव ने सियासी बहस छेड़ दी है। NDA नेताओं ने इसे छोटे कारोबारियों के लिए बेअसर और राजस्व के लिए ज़रूरी बताया, जबकि राहुल गांधी के अमेरिकी दबाव वाले आरोप को सिरे से नकार दिया।

मुख्य बातें

₹2,000 से अधिक के मर्चेंट यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 0.4% शुल्क लगाने का प्रस्ताव विचाराधीन है।
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले और BJP सांसद अनुराग ठाकुर समेत कई NDA नेताओं ने इस कदम का समर्थन किया।
देश के कुल यूपीआई ट्रांजैक्शन में से 96 फीसदी ₹2,000 से कम के हैं, जिन पर कोई शुल्क प्रस्तावित नहीं।
राहुल गांधी के अमेरिकी दबाव वाले आरोप को NDA नेताओं ने 'बेबुनियाद' और 'भ्रामक' करार दिया।
JDU प्रवक्ता राजीव रंजन ने स्पष्ट किया कि यह शुल्क उपभोक्ता नहीं, मर्चेंट वहन करेगा।
BJP सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि इस रिपोर्ट का और अधिक बारीकी से अध्ययन ज़रूरी है।

नई दिल्ली, 16 सितंबर: ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाने के प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ हो गई है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के कई वरिष्ठ नेताओं ने इस कदम का खुलकर समर्थन किया और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर अमेरिकी दबाव का बेबुनियाद आरोप लगाने का पलटवार किया। केंद्रीय मंत्री से लेकर राज्य स्तर के नेताओं तक, सत्तापक्ष ने एकसुर में कहा कि यह शुल्क आम उपभोक्ताओं पर नहीं, बल्कि बड़े व्यावसायिक लेनदेन पर लागू होगा।

मुख्य घटनाक्रम

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा, '₹2,000 तक के ट्रांजैक्शन पर सरकार का फैसला सही है। छोटे वेंडर और कारोबारियों को इससे कोई दिक्कत नहीं होगी। उदाहरण के लिए, ₹75,000 तक के ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगभग ₹300 के आसपास बनता है, जो कोई बड़ा बोझ नहीं है। विकास कार्यों के लिए सरकार को भी राजस्व की ज़रूरत होती है। राहुल गांधी का यह आरोप पूरी तरह बेबुनियाद है कि यह कदम अमेरिकी दबाव में उठाया गया।'

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद अनुराग ठाकुर ने भारत की डिजिटल भुगतान व्यवस्था की वैश्विक साख का हवाला देते हुए कहा, 'भारत के डिजिटल ट्रांजैक्शन की मिसाल अब पूरी दुनिया में दी जाती है। सड़क किनारे सामान बेचने वाले, चाय बेचने वाले, छोटे दुकानदार — सभी डिजिटल भुगतान कर रहे हैं। कांग्रेस का काम सिर्फ लोगों को गुमराह करना और आलोचना करना है।' उन्होंने यह भी कहा कि देश में कुल यूपीआई ट्रांजैक्शन में से 96 फीसदी ₹2,000 से कम के हैं, इसलिए अधिकांश लोगों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

NDA के अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया

BJP के पंजाब राज्य प्रभारी सतीश पूनिया ने टोल टैक्स से तुलना करते हुए कहा कि पहले लोग टोल का विरोध करते थे, लेकिन आज उसकी बदौलत बेहतर सड़कें उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा, 'विपक्ष को बस एक मुद्दा चाहिए, लेकिन हमें इसकी व्यावहारिकता और इससे मिलने वाली सुविधा पर ध्यान देना चाहिए।'

BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने कहा कि राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर 0.5 फीसदी चार्ज का उल्लेख किया, जिसका कोई आधार नहीं था। उन्होंने कहा, 'चर्चा करना एक बात है, लेकिन भ्रम फैलाना दूसरी बात।'

जनता दल (यूनाइटेड) — JDU के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि आम ग्राहकों को अधिक चिंता करने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि यह शुल्क मर्चेंट पर लागू होगा, न कि उपभोक्ता पर।

BJP सांसद गुलाम अली खटाना ने साइबर सुरक्षा के पहलू को उठाते हुए कहा कि बड़े पैमाने पर लेनदेन करने वाले लोगों को धोखाधड़ी और साइबर हैकर्स से सुरक्षा की ज़रूरत होती है और इस शुल्क से संस्थानों को उस दिशा में निवेश करने में मदद मिलेगी।

राज्य स्तर के नेताओं का पक्ष

कर्नाटक विधान परिषद में विपक्ष के नेता और BJP नेता चलावादी नारायणस्वामी ने कहा, '₹2,000 तक के ट्रांजैक्शन पर कोई कर नहीं लगता। उससे अधिक का लेनदेन व्यावसायिक मामला होता है और बिज़नेस हाउस को थोड़ा शुल्क देने में कोई बड़ी समस्या नहीं होनी चाहिए।'

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री नरेंद्र कश्यप ने कहा कि केंद्र सरकार का हर निर्णय राष्ट्र हित में होता है और राहुल गांधी को इसे सकारात्मक दृष्टि से स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने कहा, 'देश को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए ऐसे कदम उठाने पड़ेंगे।'

विपक्ष का आरोप और सरकार का पक्ष

गौरतलब है कि राहुल गांधी ने इस प्रस्तावित शुल्क को अमेरिकी दबाव का नतीजा बताया था। NDA नेताओं ने इस दावे को सिरे से खारिज किया। अठावले ने स्पष्ट कहा कि 'इस फैसले से अमेरिका का कोई लेना-देना नहीं है।' यह ऐसे समय में आया है जब भारत का यूपीआई इन्फ्रास्ट्रक्चर वैश्विक स्तर पर एक मॉडल के रूप में उभरा है और कई देश इसे अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं।

क्या होगा आगे

फिलहाल यह प्रस्ताव विचाराधीन बताया जा रहा है और इस पर अंतिम निर्णय सरकारी स्तर पर होना बाकी है। अनुराग ठाकुर ने स्वयं कहा कि इस रिपोर्ट का 'और अधिक बारीकी से अध्ययन और गंभीरता से परीक्षण' किए जाने की ज़रूरत है। यदि यह शुल्क लागू होता है, तो इसका असर मुख्यतः बड़े व्यावसायिक लेनदेन पर पड़ेगा, जबकि देश के 96 फीसदी यूपीआई ट्रांजैक्शन — जो ₹2,000 से कम के हैं — इससे अप्रभावित रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह कुछ असुविधाजनक सवालों को दरकिनार कर देता है। अनुराग ठाकुर का यह स्वीकारोक्ति कि रिपोर्ट का 'और बारीकी से अध्ययन' ज़रूरी है, खुद बताती है कि नीति अभी पूरी तरह पक्की नहीं है — फिर भी बचाव पूरी ताकत से हो रहा है। असली सवाल यह नहीं कि शुल्क सही है या गलत, बल्कि यह है कि क्या इसे लागू करने से पहले छोटे व्यापारियों और उपभोक्ताओं से पर्याप्त परामर्श हुआ। यूपीआई की सफलता का एक बड़ा कारण उसकी शून्य-लागत संरचना रही है; कोई भी बदलाव — चाहे कितना भी मामूली हो — उस विश्वास की परीक्षा लेगा जो करोड़ों उपयोगकर्ताओं ने इस प्रणाली में बनाया है।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

₹2,000 से अधिक के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर कितना चार्ज लगेगा?
प्रस्ताव के अनुसार ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाने की बात है। यह शुल्क उपभोक्ता पर नहीं, बल्कि मर्चेंट पर लागू होगा। उदाहरण के लिए, ₹75,000 के लेनदेन पर यह शुल्क लगभग ₹300 बनता है।
क्या यह चार्ज आम यूपीआई उपयोगकर्ताओं पर भी लागू होगा?
NDA नेताओं के अनुसार देश के कुल यूपीआई ट्रांजैक्शन में से 96 फीसदी ₹2,000 से कम के हैं, इसलिए अधिकांश आम उपयोगकर्ता इससे अप्रभावित रहेंगे। यह शुल्क मुख्यतः बड़े व्यावसायिक लेनदेन पर लागू होगा।
राहुल गांधी ने इस यूपीआई चार्ज पर क्या आरोप लगाया?
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि यह कदम अमेरिकी दबाव में उठाया गया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर 0.5 फीसदी चार्ज का उल्लेख भी किया। NDA नेताओं ने इन दोनों दावों को 'बेबुनियाद' और 'भ्रामक' करार दिया है।
NDA के किन-किन नेताओं ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया?
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले, BJP सांसद अनुराग ठाकुर, BJP के पंजाब प्रभारी सतीश पूनिया, BJP राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश, JDU प्रवक्ता राजीव रंजन, BJP सांसद गुलाम अली खटाना, कर्नाटक विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलावादी नारायणस्वामी और उत्तर प्रदेश के मंत्री नरेंद्र कश्यप ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया।
क्या यह यूपीआई चार्ज अभी लागू हो गया है?
फिलहाल यह प्रस्ताव विचाराधीन है और अंतिम निर्णय सरकारी स्तर पर होना बाकी है। BJP सांसद अनुराग ठाकुर ने स्वयं कहा कि इस रिपोर्ट का 'और अधिक बारीकी से अध्ययन और गंभीरता से परीक्षण' ज़रूरी है।
राष्ट्र प्रेस
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