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यूपीआई चार्ज विवाद: भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी बोले — आम ग्राहक पर कोई बोझ नहीं

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यूपीआई चार्ज विवाद: भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी बोले — आम ग्राहक पर कोई बोझ नहीं

सारांश

यूपीआई चार्ज पर छिड़ी सियासी जंग में BJP के प्रदीप भंडारी ने राहुल गांधी के एक्स पोस्ट को गलत बताया और दावा किया कि 90% से अधिक लेनदेन ₹2,000 से कम के हैं — आम ग्राहक पर कोई बोझ नहीं पड़ेगा।

मुख्य बातें

BJP प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने 15 सितंबर 2026 को यूपीआई चार्ज पर कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया।
भंडारी के अनुसार 90% से अधिक यूपीआई लेनदेन ₹2,000 से कम के होते हैं और इन पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा।
राहुल गांधी ने एक्स (X) पर पोस्ट कर यूपीआई पर नया कर लगाने का आरोप लगाया था।
भाजपा ने कांग्रेस पर यूपीआई की सफलता को लेकर जानबूझकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया।
यूपीआई शुल्क पर सरकार की आधिकारिक अधिसूचना अभी जारी नहीं हुई है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने 15 सितंबर 2026 को यूपीआई शुल्क को लेकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और राहुल गांधी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी आम ग्राहक को अतिरिक्त चार्ज नहीं देना होगा। उन्होंने कहा कि यूपीआई (UPI) के जरिए होने वाले 90 प्रतिशत से अधिक लेनदेन ₹2,000 से कम के हैं और प्रस्तावित व्यवस्था इन पर लागू नहीं होती। भंडारी के अनुसार, कांग्रेस जनता के बीच भ्रम फैलाने के उद्देश्य से गलत सूचनाएं प्रचारित कर रही है।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह बयानबाजी उस समय सामने आई जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक्स (X) पर एक पोस्ट के जरिए यूपीआई लेनदेन पर नए शुल्क लगाए जाने का आरोप लगाया। उनकी इस पोस्ट के बाद डिजिटल भुगतान उपयोगकर्ताओं में असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई। गौरतलब है कि यूपीआई आज भारत में करोड़ों नागरिकों के रोज़मर्रा के लेनदेन का प्रमुख माध्यम बन चुका है।

भंडारी ने राहुल गांधी की उस पोस्ट का सीधा जवाब देते हुए कांग्रेस पर 'जानबूझकर गलत तस्वीर पेश करने' का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल ऐतिहासिक रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू की गई डिजिटल वित्तीय पहलों का विरोध करता रहा है।

ग्राहकों पर असर — क्या है वास्तविक स्थिति

भंडारी ने दोहराया कि प्रस्तावित व्यवस्था में ₹2,000 से कम के यूपीआई लेनदेन पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा। उनके अनुसार कुल यूपीआई लेनदेन में से 90 प्रतिशत से अधिक इसी श्रेणी में आते हैं, इसलिए व्यावहारिक रूप से आम उपभोक्ता पर कोई वित्तीय भार नहीं पड़ेगा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ₹2,000 से अधिक के लेनदेन में भी ग्राहक से कोई अतिरिक्त राशि नहीं ली जाएगी। भाजपा प्रवक्ता के अनुसार, कांग्रेस जो तस्वीर पेश कर रही है वह वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाती।

डिजिटल इंडिया और यूपीआई की उपलब्धियाँ

भंडारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में देश की डिजिटल भुगतान व्यवस्था में आए बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की यूपीआई प्रणाली को वैश्विक स्तर पर पहचान और प्रशंसा मिली है। उनके अनुसार, यूपीआई की यह सफलता 'डिजिटल इंडिया' मिशन की ठोस उपलब्धि है।

यह ऐसे समय में आया है जब कई देश भारत की यूपीआई व्यवस्था को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं और वैश्विक मंचों पर इसे डिजिटल भुगतान का अनुकरणीय मॉडल बताया जा रहा है।

राजनीतिक हमला और चुनावी संदर्भ

भंडारी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है और राहुल गांधी की राजनीति प्रतिदिन नए आरोप गढ़ने और उन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से फैलाने तक सीमित रह गई है। उन्होंने राजस्थान के हालिया चुनावी परिणामों का हवाला देते हुए कहा कि जनता ने 'झूठ की गूंज' के बजाय 'सच की हुंकार' को समर्थन दिया।

उनका दावा था कि यूपीआई के मुद्दे पर भी कांग्रेस के आरोपों को जनता स्वीकार नहीं करेगी। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की राजनीतिक बहस डिजिटल भुगतान से जुड़े नीतिगत सवालों को अनावश्यक रूप से दलगत रंग दे देती है।

आगे की स्थिति

यूपीआई शुल्क को लेकर नीतिगत स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है और सरकार की ओर से आधिकारिक अधिसूचना का इंतज़ार है। डिजिटल भुगतान उद्योग और उपभोक्ता संगठन इस मामले में सरकार से पारदर्शी स्पष्टीकरण की माँग कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इस विवाद के संसद तक पहुँचने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 से अधिक के लेनदेन पर व्यापारियों पर लागत का बोझ पड़ेगा या नहीं, और वह अंततः उपभोक्ता तक पहुँचेगा या नहीं। भंडारी का 'ग्राहक पर असर नहीं' वाला बयान तकनीकी रूप से सही हो सकता है, लेकिन यह व्यापारी-स्तर की लागत के सवाल को टाल देता है। जब तक सरकार एक स्पष्ट और आधिकारिक अधिसूचना नहीं जारी करती, भाजपा और कांग्रेस दोनों के दावे अधूरे हैं — और इस अनिश्चितता का फायदा राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप उठा रहे हैं।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपीआई चार्ज विवाद क्या है?
यूपीआई चार्ज विवाद तब शुरू हुआ जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि सरकार यूपीआई लेनदेन पर नया शुल्क लगाने जा रही है। इसके जवाब में BJP प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि आम ग्राहक पर कोई अतिरिक्त भार नहीं पड़ेगा।
क्या यूपीआई इस्तेमाल करने पर ग्राहकों को अतिरिक्त चार्ज देना होगा?
BJP प्रवक्ता प्रदीप भंडारी के अनुसार, किसी भी ग्राहक को यूपीआई पर अतिरिक्त चार्ज नहीं देना होगा। उन्होंने कहा कि 90% से अधिक यूपीआई लेनदेन ₹2,000 से कम के हैं और बाकी लेनदेन में भी ग्राहक से कोई राशि नहीं ली जाएगी। हालाँकि सरकार की आधिकारिक अधिसूचना अभी जारी नहीं हुई है।
राहुल गांधी ने यूपीआई को लेकर क्या आरोप लगाए?
राहुल गांधी ने एक्स (X) पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि मोदी सरकार यूपीआई लेनदेन पर शुल्क या कर लगाने की तैयारी में है। उनके इस पोस्ट के बाद डिजिटल भुगतान उपयोगकर्ताओं में असमंजस की स्थिति उत्पन्न हुई और भाजपा ने इन आरोपों को गलत सूचना करार दिया।
यूपीआई की वर्तमान सफलता कितनी बड़ी है?
भाजपा प्रवक्ता के अनुसार यूपीआई आज भारत में आम नागरिक के रोज़मर्रा के भुगतान का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है और इसे वैश्विक स्तर पर डिजिटल भुगतान के अनुकरणीय मॉडल के रूप में पहचाना जाता है। कई देश भारत की यूपीआई व्यवस्था को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं।
यूपीआई शुल्क पर आगे क्या होगा?
यूपीआई शुल्क को लेकर सरकार की आधिकारिक अधिसूचना अभी जारी नहीं हुई है। उपभोक्ता संगठन और डिजिटल भुगतान उद्योग सरकार से पारदर्शी स्पष्टीकरण की माँग कर रहे हैं। यह विवाद संसद तक पहुँच सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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