उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने आरएसएस की 'सेवा की सदी' पुस्तक का विमोचन किया, बोले — सेवा ही धर्म है
सारांश
मुख्य बातें
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने 15 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन में तेलंगाना की पूर्व राज्यपाल एवं पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल डॉ. तमिलिसाई सौंदर्यराजन द्वारा लिखित पुस्तक 'ए सेंचुरी ऑफ सर्विस — द आरएसएस इन 100 एक्ट्स ऑफ सेवा' का विमोचन किया। यह पुस्तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की सौ वर्षों की सामाजिक सेवा-यात्रा को 100 प्रसंगों के माध्यम से दर्ज करती है।
पुस्तक का महत्व और विषय-वस्तु
विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने कहा कि यह पुस्तक आरएसएस की सौ साल की सेवा, उसकी सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र-निर्माण में उसके योगदान का जीवंत दस्तावेज़ है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि 'आज की खबर कल का इतिहास बन जाती है,' इसलिए अच्छे कार्यों को लिखित रूप में सहेजना आवश्यक है, अन्यथा वे सामूहिक स्मृति से विस्मृत हो जाते हैं।
पुस्तक में 'चरित्र-निर्माण के ज़रिए राष्ट्र-निर्माण' को केंद्रीय विषय के रूप में रखा गया है। राधाकृष्णन ने कहा कि राष्ट्र की प्रगति के लिए देशभक्ति, अनुशासन, सामाजिक ज़िम्मेदारी और राष्ट्रीय एकता अपरिहार्य हैं।
आरएसएस की सेवा-पहल और सामाजिक पहुँच
'सेवा ही धर्म है, यह एक कर्तव्य है' को आरएसएस के बुनियादी आदर्श के रूप में रेखांकित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि संगठन की सेवा-पहल समाज के गरीब, हाशिए पर रहने वाले और विभिन्न वर्गों — मज़दूरों, महिलाओं और बच्चों — तक पहुँची है। उन्होंने विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के दौरान आरएसएस स्वयंसेवकों द्वारा भोजन, दवाइयाँ और आवश्यक सहायता पहुँचाने की भूमिका को याद किया।
गौरतलब है कि यह पुस्तक ऐसे समय में आई है जब आरएसएस अपनी स्थापना के शताब्दी वर्ष की ओर बढ़ रहा है और उसकी सामाजिक गतिविधियाँ — विशेष रूप से आपदा प्रबंधन और ग्राम-विकास के क्षेत्र में — व्यापक चर्चा का विषय बनी हैं।
आने वाली पीढ़ियों के लिए दस्तावेज़
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने कहा कि यह पुस्तक केवल आरएसएस के सौ वर्षों का लेखा-जोखा नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भारत की सेवा-परंपरा, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय मूल्यों का एक प्रामाणिक दस्तावेज़ भी है। उन्होंने डॉ. तमिलिसाई सौंदर्यराजन और प्रकाशन से जुड़े सभी लोगों को बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि इतिहास को दर्ज करने की ऐसी और भी कोशिशें भविष्य में होती रहेंगी।
समारोह में उपस्थित प्रमुख हस्तियाँ
इस अवसर पर सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय मामलों के केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन, पुडुचेरी के गृह मंत्री ए. नमासिवयम और पुस्तक की लेखिका डॉ. तमिलिसाई सौंदर्यराजन उपस्थित रहीं। यह आयोजन आरएसएस की सेवा-विरासत को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में लाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।