उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 'वीआईपी कल्चर इन इंडिया' पुस्तक का विमोचन किया, लोकतंत्र में सेवा-भाव पर दिया ज़ोर
सारांश
मुख्य बातें
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 24 जून 2026 को नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन में 'वीआईपी कल्चर इन इंडिया: पावर, प्रिविलेज एंड द डिस्टेंस फ्रॉम डेमोक्रेसी' पुस्तक का औपचारिक विमोचन किया। यह पुस्तक अरुणाचल प्रदेश के पूर्व राज्यसभा सांसद नबाम रेबिया और सह-लेखक संदीप कुमार ने लिखी है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि इस पुस्तक में उठाया गया विषय भारत में लोकतांत्रिक शासन और सार्वजनिक जीवन की आत्मा को सीधे स्पर्श करता है।
पुस्तक का केंद्रीय विषय
राधाकृष्णन ने विमोचन समारोह में कहा कि भारत का संविधान न्याय, समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व पर आधारित समाज की परिकल्पना करता है। उन्होंने रेखांकित किया कि लोकतंत्र का वास्तविक सार नागरिकों और सत्ता के प्रतिनिधियों के बीच के संबंध में निहित है। उनके अनुसार, 'लोकतंत्र तभी फलता-फूलता है जब सार्वजनिक पद को विशेषाधिकार के बजाय उत्तरदायित्व के रूप में देखा जाए।'
पुस्तक में उपनिषदों, रामचरितमानस, भगवान बुद्ध की शिक्षाओं और पंचतंत्र जैसी भारत की सभ्यतागत परंपराओं के संदर्भों के माध्यम से वीआईपी संस्कृति की आलोचनात्मक पड़ताल की गई है। उपराष्ट्रपति ने इस बहु-आयामी दृष्टिकोण की सराहना की।
तिरुवल्लुवर और सच्चे नेतृत्व का संदर्भ
राधाकृष्णन ने महान तमिल संत-कवि तिरुवल्लुवर को उद्धृत करते हुए कहा कि सच्चा नेतृत्व सुलभता, करुणा और जवाबदेही से पहचाना जाता है। उन्होंने कहा कि जो नेता जनता के प्रति सम्मानजनक और सुलभ बने रहते हैं, वे स्थायी विश्वास अर्जित करते हैं — यह विचार इस पुस्तक की केंद्रीय थीसिस को भी रेखांकित करता है।
पुस्तक में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री सहित अन्य विशिष्ट व्यक्तित्वों की सादगी और जनसेवा की भावना का उल्लेख है, जिसकी उपराष्ट्रपति ने विशेष प्रशंसा की।
प्रधानमंत्री मोदी के कदमों का उल्लेख
उपराष्ट्रपति ने कहा कि पुस्तक में चर्चित विषय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विज़न के अनुरूप हैं जिसमें सार्वजनिक पद को सेवा का माध्यम माना जाता है, विशेषाधिकार का नहीं। उन्होंने दो विशेष उदाहरण दिए — विशिष्ट व्यक्तियों के लिए लाल बत्ती समाप्त करने का निर्णय, और हाल ही में नीट परीक्षार्थियों को यातायात असुविधा से बचाने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा अपने प्रस्थान में विलंब करने का कदम।
राधाकृष्णन ने प्रधानमंत्री के शब्दों को स्मरण करते हुए कहा — 'प्रत्येक भारतीय विशेष है, प्रत्येक भारतीय एक वीआईपी है' — और इसे नागरिक-केंद्रित शासन का आदर्श उदाहरण बताया।
समारोह में उपस्थित गणमान्य व्यक्ति
इस अवसर पर अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नबाम तुकी, मेघालय से राज्यसभा के पूर्व सांसद डब्ल्यूआर खारलुखी, लेखक नबाम रेबिया और सह-लेखक संदीप कुमार उपस्थित रहे।
आगे क्या
यह पुस्तक ऐसे समय में सामने आई है जब भारत में वीआईपी संस्कृति और सार्वजनिक जीवन में विशेषाधिकार को लेकर बहस तेज़ हो रही है। उपराष्ट्रपति ने गणतंत्र के मूल्यों — विधि के समक्ष समानता, प्रत्येक नागरिक की गरिमा और विनम्रता से प्रेरित सार्वजनिक सेवा — के प्रति नवीकृत प्रतिबद्धता का आह्वान करते हुए समारोह का समापन किया।