उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने एमपी लीड फेलोशिप प्रतिभागियों से कहा: राष्ट्र सदैव क्षेत्र, भाषा और जाति से ऊपर
सारांश
मुख्य बातें
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 3 जुलाई 2025 को उपराष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में एमपी लीड फेलोशिप के प्रतिभागियों से संवाद किया और उन्हें क्षेत्र, भाषा तथा जाति से ऊपर उठकर राष्ट्र को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया। यह दो महीने का इंटर्नशिप कार्यक्रम राज्यसभा सांसद डॉ. अजीत माधवराव गोपछड़े की पहल पर युवाओं को सार्वजनिक नीति, सुशासन और संसदीय प्रक्रियाओं का व्यावहारिक अनुभव देने के उद्देश्य से आरंभ किया गया है।
नेतृत्व और नैतिकता पर संदेश
राधाकृष्णन ने फेलोशिप प्रतिभागियों से कहा कि सच्चे नेतृत्व का मापदंड अधिकार या पद नहीं, बल्कि विनम्रता, सत्यनिष्ठा और करुणा के साथ समाज की सेवा करने की क्षमता है। उन्होंने युवाओं को नैतिकतापूर्ण आचरण अपनाते हुए राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पित नेता बनने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लोकतंत्र तभी फलता-फूलता है जब नागरिक केवल अपने अधिकारों की बात नहीं करते, बल्कि अपने कर्तव्यों का भी पूरी निष्ठा से पालन करते हैं।
भारत की सभ्यतागत एकता का उल्लेख
उपराष्ट्रपति ने भारत की सांस्कृतिक विरासत और एकता पर विशेष बल देते हुए कहा कि 'भारत एक था, एक है और सदा एक रहेगा।' उन्होंने कहा कि हिमालय से लेकर कन्याकुमारी तक फैली साझा सांस्कृतिक विरासत ही इस देश की सबसे बड़ी शक्ति है, जिसने सदियों से राष्ट्र को एकजुट रखा है।
गौरतलब है कि यह संदेश ऐसे समय में आया है जब क्षेत्रीय और भाषाई पहचान को लेकर देश में बहसें जारी हैं। उपराष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि विविधता भारत की ताकत है, विभाजन का कारण नहीं।
भारत की विकास यात्रा से प्रेरणा
राधाकृष्णन ने 1960 के दशक में खाद्यान्न संकट से जूझते भारत के आज विश्व के सबसे बड़े खाद्यान्न निर्यातकों में शुमार होने की परिवर्तनकारी यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं को पिछली पीढ़ियों की कठिनाइयों को समझना चाहिए और राष्ट्र की प्रगति से प्रेरणा लेनी चाहिए।
उन्होंने फेलोशिप प्रतिभागियों को बड़े स्वप्न देखने और यह विश्वास रखने को कहा कि उनमें से कुछ भविष्य में सार्वजनिक जीवन, प्रशासन और न्यायपालिका में महत्वपूर्ण पदों पर आसीन होंगे। उन्होंने यहाँ तक कहा कि उनमें से कोई एक दिन भारत के उपराष्ट्रपति का पद भी संभाल सकता है।
एमपी लीड फेलोशिप: कार्यक्रम की विशेषताएँ
5,000 से अधिक आवेदकों में से चयनित 40 फेलो इस कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं। उल्लेखनीय है कि इनमें 62 प्रतिशत महिलाएँ हैं, जो देश के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करती हैं। राधाकृष्णन ने इस फेलोशिप को युवाओं के लिए करियर का आदर्श प्रारंभिक मंच बताया, जो उन्हें कक्षाओं से परे वास्तविक दुनिया का अनुभव देता है और राष्ट्रीय नेताओं से संवाद के अवसर प्रदान करता है।
आगे की राह
उपराष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि एमपी लीड फेलोशिप भविष्य के राष्ट्र निर्माताओं को पोषित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने प्रतिभागियों से जिज्ञासा के साथ सीखने, निडरता से नवाचार अपनाने और व्यापक राष्ट्रीय हित के प्रति प्रतिबद्ध रहने का आग्रह किया, ताकि वे एक विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दे सकें।