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उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने एमपी लीड फेलोशिप प्रतिभागियों से कहा: राष्ट्र सदैव क्षेत्र, भाषा और जाति से ऊपर

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उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने एमपी लीड फेलोशिप प्रतिभागियों से कहा: राष्ट्र सदैव क्षेत्र, भाषा और जाति से ऊपर

सारांश

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने नई दिल्ली में एमपी लीड फेलोशिप के 40 युवा प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की असली ताकत उसकी सभ्यतागत एकता में है — क्षेत्र, भाषा और जाति से ऊपर। 62% महिला प्रतिभागियों वाले इस कार्यक्रम को उन्होंने भावी राष्ट्र निर्माताओं की नर्सरी बताया।

मुख्य बातें

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने उपराष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में एमपी लीड फेलोशिप के प्रतिभागियों को संबोधित किया।
फेलोशिप राज्यसभा सांसद डॉ.
अजीत माधवराव गोपछड़े की पहल पर शुरू किया गया दो महीने का इंटर्नशिप कार्यक्रम है।
5,000 से अधिक आवेदकों में से चुने गए 40 फेलो कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं, जिनमें 62% महिलाएँ हैं।
राधाकृष्णन ने कहा कि नेतृत्व का मापदंड विनम्रता, सत्यनिष्ठा और करुणा है, अधिकार नहीं।
उन्होंने हिमालय से कन्याकुमारी तक की साझा सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति बताया।

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 3 जुलाई 2025 को उपराष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में एमपी लीड फेलोशिप के प्रतिभागियों से संवाद किया और उन्हें क्षेत्र, भाषा तथा जाति से ऊपर उठकर राष्ट्र को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया। यह दो महीने का इंटर्नशिप कार्यक्रम राज्यसभा सांसद डॉ. अजीत माधवराव गोपछड़े की पहल पर युवाओं को सार्वजनिक नीति, सुशासन और संसदीय प्रक्रियाओं का व्यावहारिक अनुभव देने के उद्देश्य से आरंभ किया गया है।

नेतृत्व और नैतिकता पर संदेश

राधाकृष्णन ने फेलोशिप प्रतिभागियों से कहा कि सच्चे नेतृत्व का मापदंड अधिकार या पद नहीं, बल्कि विनम्रता, सत्यनिष्ठा और करुणा के साथ समाज की सेवा करने की क्षमता है। उन्होंने युवाओं को नैतिकतापूर्ण आचरण अपनाते हुए राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पित नेता बनने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लोकतंत्र तभी फलता-फूलता है जब नागरिक केवल अपने अधिकारों की बात नहीं करते, बल्कि अपने कर्तव्यों का भी पूरी निष्ठा से पालन करते हैं।

भारत की सभ्यतागत एकता का उल्लेख

उपराष्ट्रपति ने भारत की सांस्कृतिक विरासत और एकता पर विशेष बल देते हुए कहा कि 'भारत एक था, एक है और सदा एक रहेगा।' उन्होंने कहा कि हिमालय से लेकर कन्याकुमारी तक फैली साझा सांस्कृतिक विरासत ही इस देश की सबसे बड़ी शक्ति है, जिसने सदियों से राष्ट्र को एकजुट रखा है।

गौरतलब है कि यह संदेश ऐसे समय में आया है जब क्षेत्रीय और भाषाई पहचान को लेकर देश में बहसें जारी हैं। उपराष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि विविधता भारत की ताकत है, विभाजन का कारण नहीं।

भारत की विकास यात्रा से प्रेरणा

राधाकृष्णन ने 1960 के दशक में खाद्यान्न संकट से जूझते भारत के आज विश्व के सबसे बड़े खाद्यान्न निर्यातकों में शुमार होने की परिवर्तनकारी यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं को पिछली पीढ़ियों की कठिनाइयों को समझना चाहिए और राष्ट्र की प्रगति से प्रेरणा लेनी चाहिए।

उन्होंने फेलोशिप प्रतिभागियों को बड़े स्वप्न देखने और यह विश्वास रखने को कहा कि उनमें से कुछ भविष्य में सार्वजनिक जीवन, प्रशासन और न्यायपालिका में महत्वपूर्ण पदों पर आसीन होंगे। उन्होंने यहाँ तक कहा कि उनमें से कोई एक दिन भारत के उपराष्ट्रपति का पद भी संभाल सकता है।

एमपी लीड फेलोशिप: कार्यक्रम की विशेषताएँ

5,000 से अधिक आवेदकों में से चयनित 40 फेलो इस कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं। उल्लेखनीय है कि इनमें 62 प्रतिशत महिलाएँ हैं, जो देश के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करती हैं। राधाकृष्णन ने इस फेलोशिप को युवाओं के लिए करियर का आदर्श प्रारंभिक मंच बताया, जो उन्हें कक्षाओं से परे वास्तविक दुनिया का अनुभव देता है और राष्ट्रीय नेताओं से संवाद के अवसर प्रदान करता है।

आगे की राह

उपराष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि एमपी लीड फेलोशिप भविष्य के राष्ट्र निर्माताओं को पोषित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने प्रतिभागियों से जिज्ञासा के साथ सीखने, निडरता से नवाचार अपनाने और व्यापक राष्ट्रीय हित के प्रति प्रतिबद्ध रहने का आग्रह किया, ताकि वे एक विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दे सकें।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि यह कार्यक्रम इन युवाओं को केवल प्रेरणा नहीं, बल्कि नीति-निर्माण में ठोस भागीदारी का मार्ग दे। संसदीय इंटर्नशिप जैसी पहलें तब अर्थपूर्ण बनती हैं जब उनका दायरा एक सांसद के कार्यालय से आगे बढ़कर व्यापक संस्थागत सुधार से जुड़े।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एमपी लीड फेलोशिप क्या है?
एमपी लीड फेलोशिप राज्यसभा सांसद डॉ. अजीत माधवराव गोपछड़े द्वारा शुरू किया गया दो महीने का इंटर्नशिप कार्यक्रम है, जो युवाओं को सार्वजनिक नीति, सुशासन और विधायी प्रक्रियाओं का प्रत्यक्ष अनुभव देता है। 5,000 से अधिक आवेदकों में से 40 फेलो चुने गए हैं।
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने फेलोशिप प्रतिभागियों को क्या संदेश दिया?
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने प्रतिभागियों से क्षेत्र, भाषा और जाति से ऊपर उठकर राष्ट्र को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सच्चा नेतृत्व विनम्रता, सत्यनिष्ठा और करुणा से परिभाषित होता है, न कि पद या अधिकार से।
एमपी लीड फेलोशिप में कितनी महिला प्रतिभागी हैं?
इस फेलोशिप के 40 चयनित प्रतिभागियों में 62 प्रतिशत महिलाएँ हैं, जो देश के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करती हैं। उपराष्ट्रपति ने इसे विशेष रूप से उल्लेखनीय बताया।
उपराष्ट्रपति ने भारत की एकता के संदर्भ में क्या कहा?
राधाकृष्णन ने कहा कि भारत एक था, एक है और सदा एक रहेगा। उन्होंने हिमालय से कन्याकुमारी तक फैली साझा सांस्कृतिक विरासत को देश की सबसे बड़ी शक्ति बताया और युवाओं से इसे संजोने का आग्रह किया।
इस फेलोशिप का युवाओं के करियर पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उपराष्ट्रपति ने इसे करियर आरंभ करने का आदर्श मंच बताया, जो युवाओं को राष्ट्रीय नेताओं से संवाद और शासन का व्यावहारिक अनुभव देता है। उन्होंने विश्वास जताया कि इनमें से कुछ भविष्य में प्रशासन, न्यायपालिका और सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाएँगे।
राष्ट्र प्रेस
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