क्या भारत की शक्ति 'राष्ट्रीय एकता' और समाज की सामूहिक सेवा में निहित है: उपराष्ट्रपति?

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क्या भारत की शक्ति 'राष्ट्रीय एकता' और समाज की सामूहिक सेवा में निहित है: उपराष्ट्रपति?

सारांश

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने एनएसएस स्वयंसेवकों के साथ बातचीत में राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सेवा की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने युवाओं से समाज की सेवा करने का आग्रह किया और 2047 तक भारत के विकसित होने के लक्ष्य के लिए जिम्मेदार नागरिकों की आवश्यकता पर चर्चा की।

मुख्य बातें

राष्ट्रीय एकता की आवश्यकता समाज सेवा का महत्व युवाओं की जिम्मेदारी सामाजिक सद्भाव के लिए प्रयास 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य

नई दिल्ली, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने मंंगलवार को नई दिल्ली में उपराष्ट्रपति एन्क्लेव में आयोजित एक मुलाकात में माय भारत-नेशनल सर्विस स्कीम (एनएसएस) गणतंत्र दिवस परेड शिविर-2026 के दल के साथ चर्चा की।

छात्रों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने युवा स्वयंसेवकों के साथ मिलकर आनंद प्रकट किया और कहा कि एनएसएस के प्रतिभागियों का उत्साह और अनुशासन भारत के युवाओं की शक्ति को प्रदर्शित करता है। उन्होंने अपने छात्र जीवन में एनएसएस से जुड़े अनुभवों को याद किया और युवा नागरिकों में चरित्र, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी के निर्माण में एनएसएस की भूमिका पर प्रकाश डाला।

गणतंत्र दिवस परेड का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने माय भारत-एनएसएस दल को कर्तव्य पथ पर गर्व से मार्च करते हुए देखा और युवा मामले तथा खेल मंत्रालय की सराहना की।

एकता के महत्व पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत की शक्ति राष्ट्रीय एकता और समाज की सामूहिक सेवा में निहित है। उन्होंने बताया कि सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे नेताओं द्वारा प्रतिपादित एकता और सेवा के मूल्य देश की प्रगति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने युवाओं से निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा करने और राष्ट्रीय हित के प्रति प्रतिबद्ध रहने का आग्रह किया।

प्रधानमंत्री द्वारा परिकल्पित 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह लक्ष्य एक सामूहिक यात्रा है, जिसके लिए अनुशासित, देशभक्त और जिम्मेदार नागरिकों की आवश्यकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आज के युवाओं की प्रतिभा, आकांक्षा और वैश्विक अनुभव के बल पर भारत 2047 तक एक अग्रणी राष्ट्र के रूप में उभरेगा।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि एक विकसित भारत के लिए न केवल आर्थिक प्रगति बल्कि सामाजिक सद्भाव, नैतिक शक्ति और मजबूत मूल्यों की भी आवश्यकता है, जिन्हें माय भारत-एनएसएस गतिविधियों के माध्यम से पोषित किया जाता है। उन्होंने जनसाक्षरता, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता, सामुदायिक विकास और आपदा राहत एवं पुनर्वास प्रयासों जैसे क्षेत्रों में एनएसएस स्वयंसेवकों के योगदान की सराहना की।

उन्होंने युवाओं को शॉर्टकट से बचने, सेवा में धैर्य बनाए रखने और आत्म-अनुशासन, दृढ़ता और कर्तव्यनिष्ठा पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी, और उन्हें आश्वासन दिया कि सच्चे प्रयास अंततः सफलता की ओर ले जाएंगे।

केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया भी वरिष्ठ अधिकारियों, प्रशिक्षकों, शिक्षकों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ इस अवसर पर उपस्थित थे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि समाज के उत्थान में भी भागीदारी करें। यह विचारशीलता हमारे देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उपराष्ट्रपति ने एनएसएस के बारे में क्या कहा?
उपराष्ट्रपति ने एनएसएस के प्रतिभागियों के उत्साह और अनुशासन की सराहना की और समाज की सेवा के महत्व पर जोर दिया।
भारत के विकास के लिए युवाओं को क्या करना चाहिए?
युवाओं को समाज की सेवा में निस्वार्थ भाव से जुटना चाहिए और राष्ट्रीय हित के प्रति प्रतिबद्ध रहना चाहिए।
2047 तक भारत के लक्ष्य के लिए क्या आवश्यक है?
इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अनुशासित, देशभक्त और जिम्मेदार नागरिकों की आवश्यकता है।
राष्ट्र प्रेस
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