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उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन का बड़ा बयान: लेखापरीक्षा से मज़बूत होता है राज्य-नागरिक विश्वास, सशक्त बनता लोकतंत्र

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उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन का बड़ा बयान: लेखापरीक्षा से मज़बूत होता है राज्य-नागरिक विश्वास, सशक्त बनता लोकतंत्र

सारांश

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने उपराष्ट्रपति भवन में पूर्व CAG विनोद राय की पुस्तक ‘व्हेन ऑडिट मैटर्स’ का विमोचन करते हुए लेखापरीक्षा को लोकतंत्र की रीढ़ बताया। उन्होंने कहा कि ऑडिट और नैतिक शासन का संयोजन सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता और जनविश्वास बढ़ाता है — कौटिल्य के अर्थशास्त्र से लेकर आधुनिक संसदीय जवाबदेही चक्र तक की परंपरा का स्पष्ट संदर्भ।

मुख्य बातें

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 3 जून को उपराष्ट्रपति भवन में पुस्तक ‘व्हेन ऑडिट मैटर्स’ का विमोचन किया।
पुस्तक के संपादक पूर्व CAG विनोद राय हैं; यह सिंगापुर राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के दक्षिण एशियाई अध्ययन संस्थान की परियोजना का हिस्सा है।
राधाकृष्णन ने लेखापरीक्षा को ‘लोकतंत्र को मज़बूत करने का महत्वपूर्ण साधन’ बताया।
उन्होंने कौटिल्य के अर्थशास्त्र का हवाला देते हुए वित्तीय जवाबदेही की भारतीय परंपरा रेखांकित की।
आधुनिक ऑडिट के लिए प्रशिक्षण , प्रौद्योगिकी उन्नयन , डेटा विश्लेषण और क्षेत्रीय विशेषज्ञता अनिवार्य बताई।
इकबाल सिंह सेविया और रूपा पब्लिकेशंस के कपिश मेहरा भी उपस्थित रहे।

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 3 जून को उपराष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में लेखापरीक्षा को 'लोकतंत्र को मज़बूत करने का एक महत्वपूर्ण साधन' बताते हुए कहा कि यह राज्य और नागरिकों के बीच विश्वास को सुदृढ़ करती है। यह बयान उन्होंने भारत के पूर्व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) विनोद राय द्वारा संपादित पुस्तक ‘व्हेन ऑडिट मैटर्स: सीएजी इंटरवेंशन्स दैट मेड ए डिफरेंस’ के विमोचन समारोह में दिया।

मुख्य संदेश: सार्वजनिक धन और जवाबदेही

राधाकृष्णन ने कहा कि लेखापरीक्षा नागरिकों को आश्वस्त करती है कि सार्वजनिक धन का उपयोग ‘कानून, दक्षता और निष्पक्षता’ के अनुरूप जनहित में हो रहा है। उन्होंने ज़ोर दिया कि ऑडिट केवल खामियाँ पकड़ने का साधन नहीं, बल्कि सरकारों को प्रणालियों में सुधार और कमियाँ दूर करने में मदद करता है।

नैतिकता और शासन का संयोजन

उपराष्ट्रपति ने कहा कि नैतिकता और लेखापरीक्षा का संयोजन ‘परिवर्तनकारी’ साबित हो सकता है — इससे सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर होगी, संसाधनों का कुशल उपयोग होगा और जनता का भरोसा बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि नैतिक शासन को लोक प्रशासन का नैतिक आधार बनना चाहिए।

परंपरा से संविधान तक: जवाबदेही की जड़ें

राधाकृष्णन ने जवाबदेही और नैतिक शासन की भारतीय परंपराओं को ‘धर्म, राजधर्म और जन कर्तव्य’ की अवधारणाओं में निहित बताया। उन्होंने कौटिल्य के अर्थशास्त्र में वर्णित वित्तीय निगरानी सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वतंत्रता के बाद संविधान ने इन आदर्शों को संस्थागत रूप दिया — विधि का शासन, वित्तीय जवाबदेही और संसदीय निगरानी के तहत एक स्वतंत्र CAG की स्थापना के रूप में।

संसदीय जवाबदेही चक्र

उपराष्ट्रपति ने संसदीय लोकतंत्र के ‘जवाबदेही चक्र’ की भी व्याख्या की — जो बजट की विधायी स्वीकृति से शुरू होकर लोक लेखा समितियों (PAC) की जाँच तक चलता है। उनके अनुसार यह प्रक्रिया राजकोषीय निगरानी का व्यापक ढाँचा खड़ा करती है और सार्वजनिक वित्त पर लोकतांत्रिक नियंत्रण को मज़बूत करती है।

आधुनिक ऑडिट के लिए सुधार ज़रूरी

राधाकृष्णन ने लेखापरीक्षा प्रणालियों में निरंतर सुधार पर बल देते हुए प्रशिक्षण, प्रौद्योगिकी उन्नयन, प्रदर्शन मूल्यांकन, डेटा विश्लेषण और क्षेत्रीय विशेषज्ञता को अनिवार्य बताया। उन्होंने यह भी कहा कि लेखापरीक्षकों को स्वयं भी सत्यनिष्ठा और नैतिक आचरण के उच्चतम मानकों का पालन करना चाहिए।

पुस्तक और परियोजना का संदर्भ

उपराष्ट्रपति ने विनोद राय और उनके सहयोगियों की पूर्व वरिष्ठ लेखापरीक्षा अधिकारियों के अनुभवों को सरल, रोचक शैली में प्रस्तुत करने के लिए सराहना की। यह प्रकाशन सिंगापुर राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के दक्षिण एशियाई अध्ययन संस्थान की एक परियोजना के अंतर्गत दक्षिण एशिया में शासन और जवाबदेही का विश्लेषण करता है।

समारोह में विनोद राय, दक्षिण एशियाई अध्ययन संस्थान के निदेशक डॉ. इकबाल सिंह सेविया, रूपा पब्लिकेशंस के प्रबंध निदेशक कपिश मेहरा, तथा भारतीय लेखापरीक्षा एवं लेखा सेवा के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। राधाकृष्णन ने भरोसा जताया कि पुस्तक व्यापक रूप से पढ़ी और चर्चित होगी, तथा एक जीवंत लोकतंत्र में संस्थागत जवाबदेही के स्थायी महत्व को सुदृढ़ करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा PAC रिपोर्टों पर कार्रवाई की समय-सीमा और CAG की संस्थागत स्वायत्तता में है, जिन पर पुस्तक भी सवाल उठाती है। ‘नैतिकता और लेखापरीक्षा का संयोजन’ तभी परिवर्तनकारी होगा जब निष्कर्ष टेबल पर रखे जाएँ, ठंडे बस्ते में नहीं। यह भाषण एक स्वस्थ संकेत है, पर शब्दों से आगे जाकर संस्थागत मज़बूती की ज़रूरत है।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने लेखापरीक्षा के बारे में क्या कहा?
उन्होंने 3 जून को उपराष्ट्रपति भवन में लेखापरीक्षा को ‘लोकतंत्र को मज़बूत करने का एक महत्वपूर्ण साधन’ बताया। उन्होंने कहा कि यह नागरिकों को भरोसा देती है कि सार्वजनिक धन कानून, दक्षता और निष्पक्षता के अनुरूप जनहित में खर्च हो रहा है, और राज्य-नागरिक विश्वास को सुदृढ़ करती है।
‘व्हेन ऑडिट मैटर्स: सीएजी इंटरवेंशन्स दैट मेड ए डिफरेंस’ पुस्तक किसने लिखी है?
पुस्तक का संपादन भारत के पूर्व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक विनोद राय ने किया है। इसमें पूर्व वरिष्ठ लेखापरीक्षा अधिकारियों के अनुभव और महत्वपूर्ण CAG हस्तक्षेपों की कहानियाँ संकलित हैं।
यह पुस्तक किस परियोजना के तहत प्रकाशित हुई है?
यह प्रकाशन सिंगापुर राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के दक्षिण एशियाई अध्ययन संस्थान द्वारा शुरू की गई एक परियोजना का हिस्सा है। परियोजना दक्षिण एशिया में शासन और जवाबदेही का विश्लेषण करती है।
उपराष्ट्रपति ने आधुनिक लेखापरीक्षा प्रणालियों में किन सुधारों पर ज़ोर दिया?
राधाकृष्णन ने प्रशिक्षण, प्रौद्योगिकी उन्नयन, प्रदर्शन मूल्यांकन, डेटा विश्लेषण और क्षेत्रीय विशेषज्ञता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि लेखापरीक्षकों को स्वयं भी सत्यनिष्ठा और नैतिक आचरण के उच्चतम मानकों का पालन करना चाहिए।
समारोह में और कौन-कौन उपस्थित था?
समारोह में पूर्व CAG विनोद राय के अलावा दक्षिण एशियाई अध्ययन संस्थान, सिंगापुर के निदेशक डॉ. इकबाल सिंह सेविया और रूपा पब्लिकेशंस के प्रबंध निदेशक कपिश मेहरा उपस्थित रहे। भारतीय लेखापरीक्षा और लेखा सेवा के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद थे।
राष्ट्र प्रेस
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