राजस्थान विधानसभा के 75 वर्ष: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन बोले — लोकतंत्र की शक्ति बहस की गुणवत्ता में है
सारांश
मुख्य बातें
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने 15 जुलाई 2026 को जयपुर में राजस्थान विधानसभा के 75वें स्थापना वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित अमृत महोत्सव को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति संवैधानिक संस्थाओं की भव्यता में नहीं, बल्कि बहस की गुणवत्ता, आचरण की गरिमा और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता में निहित होती है। यह समारोह देश में अपनी तरह का पहला आयोजन माना जा रहा है, जिसमें वर्तमान और पूर्व विधायक, सांसद तथा संवैधानिक पदाधिकारी एक ही मंच पर उपस्थित रहे।
मुख्य घटनाक्रम
राजस्थान विधानसभा परिसर में आयोजित 'विधायी गौरव यात्रा: पूर्व और वर्तमान सदस्यों का सम्मेलन' के समापन सत्र में उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने भाग लिया। इस अवसर पर राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागड़े, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया, विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, संसदीय कार्य एवं विधि मंत्री जोगाराम पटेल तथा नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सहित वर्तमान और पूर्व विधायक उपस्थित रहे। उपराष्ट्रपति ने राजस्थान विधानसभा के पूर्व अध्यक्षों, पूर्व उपाध्यक्षों और वर्तमान एवं पूर्व विधायकों को सम्मानित भी किया।
उपराष्ट्रपति का संबोधन
राधाकृष्णन ने राजस्थान की वीरता, बलिदान और देशभक्ति की परंपरा को नमन करते हुए कहा कि राज्य की हर पीढ़ी ने देश के लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि 'लोकतंत्र तभी फलता-फूलता है जब संवाद गरिमा के साथ हो और राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखा जाए।'
उन्होंने जनप्रतिनिधियों को स्पष्ट संदेश दिया कि चुनाव वोटों से जीते जाते हैं, लेकिन जनता का स्थायी सम्मान और स्नेह केवल ईमानदार जनसेवा से अर्जित होता है। तमिल शास्त्रीय ग्रंथ तिरुक्कुरल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जो नेता जनता के लिए सहज उपलब्ध रहते हैं और विनम्र व्यवहार करते हैं, वे लोगों का स्थायी विश्वास जीतते हैं।
संसदीय अनुभव और नीतिगत संदेश
लोकसभा सदस्य के रूप में अपने अनुभव साझा करते हुए उपराष्ट्रपति ने बताया कि वस्त्र संबंधी संसदीय उपसमिति की सिफारिशों के आधार पर बाद में टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन फंड स्कीम लागू की गई थी। उन्होंने कहा कि समितियों और सदनों में दिए गए रचनात्मक सुझाव बड़े नीतिगत बदलावों का आधार बन सकते हैं। गौरतलब है कि उन्होंने राज्यसभा में दिए अपने संदेश को दोहराते हुए कहा कि बहस, चर्चा या कभी-कभी व्यवधान भी अंततः किसी निर्णय तक पहुंचना चाहिए।
उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी को पूर्व और वर्तमान विधायकों को एक मंच पर लाने की पहल के लिए बधाई दी, यह कहते हुए कि इससे संस्थागत अनुभव और ज्ञान नई पीढ़ी के जनप्रतिनिधियों तक पहुंचता है।
राजस्थान से जुड़ाव और विकसित भारत का आह्वान
राधाकृष्णन ने राजस्थान के साथ अपने लंबे राजनीतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत, वसुंधरा राजे और अशोक गहलोत के योगदान को याद किया। उन्होंने पूर्व सांसद राजेश पायलट के साथ अपने संबंधों का भी स्मरण किया।
उन्होंने जनप्रतिनिधियों से विधायी संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने और आने वाली पीढ़ियों के लिए मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाएं छोड़ने का आह्वान किया। उनका स्पष्ट मत था कि 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को हासिल करने के लिए ईमानदारी, विनम्रता और समर्पण आवश्यक हैं, और विकसित राजस्थान इस लक्ष्य का अभिन्न हिस्सा है।