15 जुलाई 2026
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राजस्थान विधानसभा के 75 वर्ष: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन बोले — लोकतंत्र की शक्ति बहस की गुणवत्ता में है

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राजस्थान विधानसभा के 75 वर्ष: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन बोले — लोकतंत्र की शक्ति बहस की गुणवत्ता में है

सारांश

राजस्थान विधानसभा के 75 साल — यह सिर्फ एक जश्न नहीं, एक आत्मचिंतन था। उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने जनप्रतिनिधियों को याद दिलाया कि वोट से सत्ता मिलती है, जनसेवा से विश्वास। पूर्व और वर्तमान विधायकों को एक मंच पर लाने की यह पहल देश में अपनी तरह की पहली है।

मुख्य बातें

राधाकृष्णन ने 15 जुलाई 2026 को जयपुर में राजस्थान विधानसभा के 75वें स्थापना वर्ष के अमृत महोत्सव को संबोधित किया।
' विधायी गौरव यात्रा ' सम्मेलन को देश में अपनी तरह का पहला आयोजन बताया गया, जिसमें वर्तमान-पूर्व विधायक, सांसद और संवैधानिक पदाधिकारी एक मंच पर उपस्थित रहे।
राधाकृष्णन ने कहा — लोकतंत्र की शक्ति संवैधानिक संस्थाओं की भव्यता नहीं, बल्कि बहस की गुणवत्ता और आचरण की गरिमा में है।
उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी को पूर्व-वर्तमान विधायकों को एक मंच पर लाने की पहल के लिए बधाई दी।
पूर्व मुख्यमंत्रियों भैरों सिंह शेखावत, वसुंधरा राजे और अशोक गहलोत के योगदान को याद किया गया।
'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य में विकसित राजस्थान को अभिन्न हिस्सा बताया।

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने 15 जुलाई 2026 को जयपुर में राजस्थान विधानसभा के 75वें स्थापना वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित अमृत महोत्सव को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति संवैधानिक संस्थाओं की भव्यता में नहीं, बल्कि बहस की गुणवत्ता, आचरण की गरिमा और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता में निहित होती है। यह समारोह देश में अपनी तरह का पहला आयोजन माना जा रहा है, जिसमें वर्तमान और पूर्व विधायक, सांसद तथा संवैधानिक पदाधिकारी एक ही मंच पर उपस्थित रहे।

मुख्य घटनाक्रम

राजस्थान विधानसभा परिसर में आयोजित 'विधायी गौरव यात्रा: पूर्व और वर्तमान सदस्यों का सम्मेलन' के समापन सत्र में उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने भाग लिया। इस अवसर पर राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागड़े, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया, विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, संसदीय कार्य एवं विधि मंत्री जोगाराम पटेल तथा नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सहित वर्तमान और पूर्व विधायक उपस्थित रहे। उपराष्ट्रपति ने राजस्थान विधानसभा के पूर्व अध्यक्षों, पूर्व उपाध्यक्षों और वर्तमान एवं पूर्व विधायकों को सम्मानित भी किया।

उपराष्ट्रपति का संबोधन

राधाकृष्णन ने राजस्थान की वीरता, बलिदान और देशभक्ति की परंपरा को नमन करते हुए कहा कि राज्य की हर पीढ़ी ने देश के लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि 'लोकतंत्र तभी फलता-फूलता है जब संवाद गरिमा के साथ हो और राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखा जाए।'

उन्होंने जनप्रतिनिधियों को स्पष्ट संदेश दिया कि चुनाव वोटों से जीते जाते हैं, लेकिन जनता का स्थायी सम्मान और स्नेह केवल ईमानदार जनसेवा से अर्जित होता है। तमिल शास्त्रीय ग्रंथ तिरुक्कुरल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जो नेता जनता के लिए सहज उपलब्ध रहते हैं और विनम्र व्यवहार करते हैं, वे लोगों का स्थायी विश्वास जीतते हैं।

संसदीय अनुभव और नीतिगत संदेश

लोकसभा सदस्य के रूप में अपने अनुभव साझा करते हुए उपराष्ट्रपति ने बताया कि वस्त्र संबंधी संसदीय उपसमिति की सिफारिशों के आधार पर बाद में टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन फंड स्कीम लागू की गई थी। उन्होंने कहा कि समितियों और सदनों में दिए गए रचनात्मक सुझाव बड़े नीतिगत बदलावों का आधार बन सकते हैं। गौरतलब है कि उन्होंने राज्यसभा में दिए अपने संदेश को दोहराते हुए कहा कि बहस, चर्चा या कभी-कभी व्यवधान भी अंततः किसी निर्णय तक पहुंचना चाहिए।

उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी को पूर्व और वर्तमान विधायकों को एक मंच पर लाने की पहल के लिए बधाई दी, यह कहते हुए कि इससे संस्थागत अनुभव और ज्ञान नई पीढ़ी के जनप्रतिनिधियों तक पहुंचता है।

राजस्थान से जुड़ाव और विकसित भारत का आह्वान

राधाकृष्णन ने राजस्थान के साथ अपने लंबे राजनीतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत, वसुंधरा राजे और अशोक गहलोत के योगदान को याद किया। उन्होंने पूर्व सांसद राजेश पायलट के साथ अपने संबंधों का भी स्मरण किया।

उन्होंने जनप्रतिनिधियों से विधायी संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने और आने वाली पीढ़ियों के लिए मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाएं छोड़ने का आह्वान किया। उनका स्पष्ट मत था कि 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को हासिल करने के लिए ईमानदारी, विनम्रता और समर्पण आवश्यक हैं, और विकसित राजस्थान इस लक्ष्य का अभिन्न हिस्सा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उपराष्ट्रपति का संदेश महज़ औपचारिक नहीं था — यह उस बढ़ते संसदीय व्यवधान के संदर्भ में आया है जो राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर चिंता का विषय बना है। 'बहस अंततः निर्णय तक पहुंचनी चाहिए' — यह पंक्ति सुनने में सरल है, पर इसके निहितार्थ गहरे हैं। पूर्व और वर्तमान विधायकों को एक मंच पर लाने की पहल की सराहना होनी चाहिए, लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या यह संवाद विधायी आचरण में ठोस बदलाव लाता है या केवल एक यादगार समारोह बनकर रह जाता है।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान विधानसभा का 75वाँ स्थापना वर्ष समारोह क्या था?
यह 15 जुलाई 2026 को जयपुर में आयोजित अमृत महोत्सव था, जिसमें राजस्थान विधानसभा के 75 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया गया। इसे देश में अपनी तरह का पहला आयोजन बताया गया, जिसमें वर्तमान और पूर्व विधायक, सांसद तथा संवैधानिक पदाधिकारी एक ही मंच पर उपस्थित रहे।
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने समारोह में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति बहस की गुणवत्ता, आचरण की गरिमा और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता में है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव वोटों से जीते जाते हैं, लेकिन जनता का स्थायी विश्वास केवल ईमानदार जनसेवा से अर्जित होता है।
'विधायी गौरव यात्रा' सम्मेलन क्या है और इसे खास क्यों माना जा रहा है?
यह पूर्व और वर्तमान विधायकों का एक संयुक्त सम्मेलन था, जिसे विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की पहल पर आयोजित किया गया। इसे देश में अपनी तरह का पहला आयोजन इसलिए माना जा रहा है क्योंकि इसमें संस्थागत अनुभव को नई पीढ़ी के जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
समारोह में कौन-कौन से प्रमुख नेता उपस्थित थे?
समारोह में राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागड़े, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया, विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सहित वर्तमान और पूर्व विधायक मौजूद रहे।
उपराष्ट्रपति ने 'विकसित भारत 2047' से राजस्थान को कैसे जोड़ा?
राधाकृष्णन ने कहा कि 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को हासिल करने के लिए ईमानदारी, विनम्रता और समर्पण आवश्यक हैं, और विकसित राजस्थान इस राष्ट्रीय लक्ष्य का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने राज्य की हर पीढ़ी के लोकतांत्रिक योगदान को इस दिशा में प्रेरणा बताया।
राष्ट्र प्रेस
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