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बागी सांसदों पर अरविंद सावंत का हमला: 'गैरकानूनी काम करने वाले ही दिल्ली भागते हैं'

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बागी सांसदों पर अरविंद सावंत का हमला: 'गैरकानूनी काम करने वाले ही दिल्ली भागते हैं'

सारांश

शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने बागी सांसदों की अमित शाह से मुलाकात को 'गैरकानूनी काम की स्वीकृति' बताया और परिसीमन पर चेतावनी दी कि जनसंख्या-आधारित सीट वितरण दक्षिण भारत को राजनीतिक रूप से कमज़ोर कर सकता है।

मुख्य बातें

अरविंद सावंत ने 15 जुलाई 2026 को मुंबई में बागी सांसदों पर निशाना साधते हुए कहा कि 'गैरकानूनी काम करने वाले ही दिल्ली के चक्कर लगाते हैं।' बागी सांसदों के अमित शाह से मिलने के 'विकास' वाले दावे को सावंत ने सिरे से खारिज किया।
सावंत ने राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े मामलों में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
18 जुलाई को नागपुर में प्रस्तावित राम रक्षा आंदोलन को BJP की 'ध्यान भटकाने की राजनीति' बताया।
परिसीमन पर चेतावनी — जनसंख्या-आधारित सीट पुनर्वितरण से दक्षिण भारत का संसदीय प्रतिनिधित्व घट सकता है।
NCP (शरद पवार गुट) की मुखिया सुप्रिया सुले हैं; उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में शिवसेना (यूबीटी) की वैचारिक प्रतिबद्धता जारी रहेगी।

शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ सांसद अरविंद सावंत ने 15 जुलाई 2026 को मुंबई में बागी सांसदों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जो लोग असंवैधानिक और गैरकानूनी कार्य करते हैं, वही दिल्ली के चक्कर लगाते हैं और सुरक्षा मांगते हैं। उन्होंने बागी सांसदों को भेजे गए कानूनी नोटिस, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उनकी मुलाकात, राम रक्षा आंदोलन, महिला आरक्षण और परिसीमन (डीलिमिटेशन) जैसे संवेदनशील मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी।

बागी सांसदों पर सीधा हमला

बागी सांसदों द्वारा अमित शाह से मुलाकात के सवाल पर सावंत ने कहा कि यदि उन पर लगाए गए आरोप निराधार हैं, तो उन्हें दिल्ली जाकर सुरक्षा माँगने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है? उनके अनुसार, जो नेता अपनी विचारधारा छोड़कर राजनीतिक पाला बदलते हैं, उनके पास नैतिकता का कोई आधार शेष नहीं रहता।

बागी सांसदों के इस दावे को कि उनकी अमित शाह से मुलाकात अपने संसदीय क्षेत्रों के विकास के लिए थी, सावंत ने पूरी तरह नकार दिया। उन्होंने कहा कि जवाहरलाल नेहरू से लेकर मनमोहन सिंह तक की सरकारों में विपक्षी सांसदों के क्षेत्रों का विकास बिना दल-बदल के होता रहा है। उनके अनुसार, राजनीति केवल धन और सत्ता प्राप्ति का साधन नहीं, बल्कि यह विचारधारा और सिद्धांतों पर टिकी होनी चाहिए।

सांसद निधि और भ्रष्टाचार के आरोप

सावंत ने सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास निधि का उल्लेख करते हुए कहा कि सांसदों को मिलने वाली राशि बेहद सीमित है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेता विकास की आड़ में वास्तव में धन और व्यक्तिगत लाभ के लिए सत्तापक्ष का साथ चुनते हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े मामलों का भी उल्लेख करते हुए भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और कहा कि कुछ लोग केवल लाभ के लिए संस्थाओं से जुड़ना चाहते हैं।

राम रक्षा आंदोलन और राजनीतिक विमर्श

18 जुलाई को नागपुर में प्रस्तावित राम रक्षा आंदोलन पर सावंत ने कहा कि उनका पक्ष भगवान राम के आदर्शों की रक्षा का है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके सहयोगी भ्रष्टाचार व लूट के सवालों से ध्यान भटकाने के लिए नए मुद्दे उठाते हैं। उनके अनुसार, अब जनता सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार की कथनी और करनी का अंतर भली-भाँति समझ चुकी है।

परिसीमन पर उत्तर-दक्षिण असंतुलन की चेतावनी

महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर सावंत ने आरोप लगाया कि जब महिला आरक्षण विधेयक लाया गया, तब उसके साथ परिसीमन का प्रश्न जोड़ दिया गया, लेकिन उस समय इस पर स्पष्ट चर्चा नहीं हुई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में संसदीय सीटों का निर्धारण केवल जनसंख्या के आधार पर हुआ, तो दक्षिण भारत के राज्यों का संसद में प्रतिनिधित्व घट सकता है, जबकि अधिक जनसंख्या वाले उत्तर भारतीय राज्यों का प्रभाव बढ़ेगा। सावंत के अनुसार, उन्होंने यह आशंका संसद में पहले ही उठाई थी।

महा विकास अघाड़ी और आगे की राह

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मुलाकात पर सावंत ने कहा कि मुलाकात करने में कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि NCP (शरद पवार गुट) की मुखिया सुप्रिया सुले हैं। सावंत ने विश्वास व्यक्त किया कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में शिवसेना (यूबीटी) अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ती रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो इसकी विश्वसनीयता स्वतः संदिग्ध हो जाती है। परिसीमन पर उनकी चेतावनी अधिक महत्वपूर्ण है — उत्तर-दक्षिण राजनीतिक असंतुलन का यह प्रश्न केवल महाराष्ट्र का नहीं, बल्कि तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक जैसे राज्यों की साझा चिंता है। मुख्यधारा की कवरेज इस संरचनात्मक प्रश्न को बागी-बनाम-वफादार की कहानी में दबा देती है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अरविंद सावंत ने बागी सांसदों पर क्या आरोप लगाए?
सावंत ने कहा कि जो लोग असंवैधानिक और गैरकानूनी कार्य करते हैं, वही दिल्ली जाकर सुरक्षा माँगते हैं। उनके अनुसार, विचारधारा छोड़कर पाला बदलने वाले नेताओं के पास नैतिकता का कोई आधार नहीं बचता।
बागी सांसदों और अमित शाह की मुलाकात पर सावंत का क्या कहना है?
सावंत ने बागी सांसदों के 'विकास के लिए मुलाकात' वाले दावे को पूरी तरह खारिज किया। उन्होंने कहा कि नेहरू से मनमोहन सिंह तक की सरकारों में विपक्षी सांसदों के क्षेत्रों का विकास बिना दल-बदल के होता रहा है।
परिसीमन पर सावंत की क्या चेतावनी है?
सावंत ने आगाह किया कि यदि संसदीय सीटों का पुनर्निर्धारण केवल जनसंख्या के आधार पर हुआ, तो दक्षिण भारत के राज्यों का संसद में प्रतिनिधित्व घट सकता है और उत्तर भारत का राजनीतिक प्रभाव बढ़ेगा। उन्होंने यह मुद्दा संसद में पहले भी उठाया था।
18 जुलाई का राम रक्षा आंदोलन क्या है और सावंत का इस पर क्या रुख है?
18 जुलाई 2026 को नागपुर में प्रस्तावित राम रक्षा आंदोलन के बारे में सावंत ने कहा कि उनका पक्ष भगवान राम के आदर्शों की रक्षा का है। उन्होंने BJP पर आरोप लगाया कि यह आंदोलन भ्रष्टाचार के सवालों से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश है।
शिवसेना (यूबीटी) और NCP (शरद पवार गुट) के बीच संबंध कैसे हैं?
सावंत ने NCP (शरद पवार गुट) के नेता जयंत पाटिल और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मुलाकात पर कोई आपत्ति नहीं जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि NCP (शरद पवार गुट) की मुखिया सुप्रिया सुले हैं और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में शिवसेना (यूबीटी) अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ती रहेगी।
राष्ट्र प्रेस
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