शिवसेना (यूबीटी) पर TMC जैसी अटकलें महज अफवाह: अरविंद सावंत, 'ऑपरेशन टाइगर' पर भी कसा तंज
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने 11 जून 2026 को मुंबई में स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी की स्थिति तृणमूल कांग्रेस (TMC) जैसी होने की अटकलें पूरी तरह बेबुनियाद हैं और इन्हें महज अफवाह समझा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने न आए, अफवाहों पर ध्यान देना उचित नहीं है।
TMC तुलना पर सावंत का खंडन
सावंत ने कहा, 'अफवाहों का सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं होता।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि TMC का कोई भी नेता कहीं नहीं गया है और इस तरह की धारणाएं भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा राजनीतिक उद्देश्य से फैलाई जा रही हैं। उनके अनुसार, BJP के लोग 'राजनीतिक दुराग्रह' से ग्रसित होकर बेबुनियाद अवधारणाएँ प्रचारित कर रहे हैं।
जाने वाले सांसदों पर बेबाक टिप्पणी
सावंत ने माना कि यदि कोई सांसद पार्टी छोड़ना चाहे तो उसे रोका नहीं जा सकता। उन्होंने कहा, 'जाने वालों को कैसे रोका जा सकता है — ऐसे लोगों को रोकने का कोई मतलब नहीं बनता।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब विपक्षी दलों में टूट की आशंकाओं को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है।
'ऑपरेशन टाइगर' पर तंज
शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के कथित 'ऑपरेशन टाइगर' पर सावंत ने तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि शिवसेना का तो रोज़ ऑपरेशन हो रहा है — उनके लोगों को दिल्ली जाकर सिर झुकाना पड़ रहा है, फिर भी वे इस पर चुप हैं और उल्टे शिवसेना (यूबीटी) के बारे में अफवाहें फैला रहे हैं।
केंद्र सरकार की उपलब्धियों पर सवाल
सावंत ने मोदी सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि अनुच्छेद 370 हटाने के बाद क्या अन्य राज्यों के हिंदू जम्मू-कश्मीर में बसने लगे? क्या पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को वापस लिया गया? उन्होंने बेरोज़गारी को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि युवा वर्ग त्रस्त है और लोग देश की नागरिकता छोड़कर विदेश जा रहे हैं।
नेहरू-मोदी तुलना पर आपत्ति
सावंत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना पंडित जवाहरलाल नेहरू से किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। उनके अनुसार, नेहरू ने देश को IIM जैसे संस्थान दिए, जब देश का बजट मात्र ₹197 करोड़ था, तब उन्होंने ₹196 करोड़ का योगदान दिया और 9 महीने जेल में भी रहे। उन्होंने कहा कि दोनों की पारस्परिक तुलना अप्रासंगिक है और मौजूदा सरकार द्वारा बनाए गए पुल भी ध्वस्त हो गए।