31 जुलाई 2026
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शिवसेना (यूबीटी) पर TMC जैसी अटकलें महज अफवाह: अरविंद सावंत, 'ऑपरेशन टाइगर' पर भी कसा तंज

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शिवसेना (यूबीटी) पर TMC जैसी अटकलें महज अफवाह: अरविंद सावंत, 'ऑपरेशन टाइगर' पर भी कसा तंज

सारांश

शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने TMC जैसी टूट की अटकलों को सिरे से खारिज किया, BJP पर 'झूठ फैलाने' का आरोप लगाया और 'ऑपरेशन टाइगर' को रोज़ाना के राजनीतिक समर्पण की संज्ञा दी। उनका बयान विपक्षी एकता पर उठते सवालों के बीच आया है।

मुख्य बातें

अरविंद सावंत ने 11 जून 2026 को शिवसेना (यूबीटी) की TMC जैसी स्थिति की अटकलों को अफवाह करार दिया।
उन्होंने माना कि पार्टी छोड़ने वाले सांसदों को रोकना संभव नहीं, लेकिन ऐसा होने की पुष्टि नहीं की।
'ऑपरेशन टाइगर' पर तंज — कहा कि शिवसेना (शिंदे गुट) के लोग दिल्ली में सिर झुकाते हैं, फिर भी चुप हैं।
मोदी सरकार के 12 वर्ष पर सवाल — अनुच्छेद 370 , बेरोज़गारी और ढहते पुलों का हवाला दिया।
पंडित नेहरू से मोदी की तुलना को 'अप्रासंगिक' बताया; नेहरू के ₹196 करोड़ योगदान और 9 माह कारावास का उल्लेख किया।

शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने 11 जून 2026 को मुंबई में स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी की स्थिति तृणमूल कांग्रेस (TMC) जैसी होने की अटकलें पूरी तरह बेबुनियाद हैं और इन्हें महज अफवाह समझा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने न आए, अफवाहों पर ध्यान देना उचित नहीं है।

TMC तुलना पर सावंत का खंडन

सावंत ने कहा, 'अफवाहों का सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं होता।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि TMC का कोई भी नेता कहीं नहीं गया है और इस तरह की धारणाएं भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा राजनीतिक उद्देश्य से फैलाई जा रही हैं। उनके अनुसार, BJP के लोग 'राजनीतिक दुराग्रह' से ग्रसित होकर बेबुनियाद अवधारणाएँ प्रचारित कर रहे हैं।

जाने वाले सांसदों पर बेबाक टिप्पणी

सावंत ने माना कि यदि कोई सांसद पार्टी छोड़ना चाहे तो उसे रोका नहीं जा सकता। उन्होंने कहा, 'जाने वालों को कैसे रोका जा सकता है — ऐसे लोगों को रोकने का कोई मतलब नहीं बनता।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब विपक्षी दलों में टूट की आशंकाओं को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है।

'ऑपरेशन टाइगर' पर तंज

शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के कथित 'ऑपरेशन टाइगर' पर सावंत ने तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि शिवसेना का तो रोज़ ऑपरेशन हो रहा है — उनके लोगों को दिल्ली जाकर सिर झुकाना पड़ रहा है, फिर भी वे इस पर चुप हैं और उल्टे शिवसेना (यूबीटी) के बारे में अफवाहें फैला रहे हैं।

केंद्र सरकार की उपलब्धियों पर सवाल

सावंत ने मोदी सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि अनुच्छेद 370 हटाने के बाद क्या अन्य राज्यों के हिंदू जम्मू-कश्मीर में बसने लगे? क्या पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को वापस लिया गया? उन्होंने बेरोज़गारी को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि युवा वर्ग त्रस्त है और लोग देश की नागरिकता छोड़कर विदेश जा रहे हैं।

नेहरू-मोदी तुलना पर आपत्ति

सावंत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना पंडित जवाहरलाल नेहरू से किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। उनके अनुसार, नेहरू ने देश को IIM जैसे संस्थान दिए, जब देश का बजट मात्र ₹197 करोड़ था, तब उन्होंने ₹196 करोड़ का योगदान दिया और 9 महीने जेल में भी रहे। उन्होंने कहा कि दोनों की पारस्परिक तुलना अप्रासंगिक है और मौजूदा सरकार द्वारा बनाए गए पुल भी ध्वस्त हो गए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उनकी यह स्वीकृति — कि जाने वाले सांसदों को रोका नहीं जा सकता — पार्टी की आंतरिक कमज़ोरी की परोक्ष स्वीकृति है। 2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद शिवसेना (यूबीटी) पहले से ही संख्यात्मक रूप से कमज़ोर है, और विपक्षी MVA गठबंधन में तनाव की खबरें नई नहीं हैं। BJP पर 'झूठ' का आरोप लगाना राजनीतिक रूप से सुविधाजनक है, लेकिन यह उस असली सवाल का जवाब नहीं देता कि उद्धव ठाकरे की पार्टी 2024 के विधानसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद संगठनात्मक पुनर्निर्माण कैसे करेगी।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अरविंद सावंत ने TMC तुलना को अफवाह क्यों बताया?
सावंत के अनुसार, शिवसेना (यूबीटी) में TMC जैसी टूट की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है और ये अटकलें BJP द्वारा राजनीतिक उद्देश्य से फैलाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि TMC का भी कोई नेता कहीं नहीं गया है।
'ऑपरेशन टाइगर' क्या है और सावंत ने इस पर क्या कहा?
'ऑपरेशन टाइगर' शिवसेना (शिंदे गुट) की कथित रणनीति से जुड़ा नाम है। सावंत ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि शिवसेना का तो रोज़ ऑपरेशन हो रहा है — उनके नेताओं को दिल्ली जाकर सिर झुकाना पड़ता है, लेकिन वे इस पर चुप रहते हैं।
क्या शिवसेना (यूबीटी) के सांसद पार्टी छोड़ सकते हैं?
सावंत ने स्पष्ट किया कि अगर कोई सांसद पार्टी छोड़ना चाहे तो उन्हें रोका नहीं जा सकता। हालांकि, उन्होंने किसी विशेष सांसद के जाने की पुष्टि नहीं की और इसे अफवाह ही बताया।
सावंत ने मोदी सरकार के 12 साल पर क्या सवाल उठाए?
सावंत ने अनुच्छेद 370 हटाने के बाद ज़मीनी बदलाव न होने, बेरोज़गारी से युवाओं के पलायन और सरकारी पुलों के ढहने का हवाला देते हुए केंद्र सरकार की उपलब्धियों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने सरकार से 12 वर्षों की ठोस उपलब्धियाँ गिनाने की चुनौती दी।
सावंत ने नेहरू-मोदी तुलना पर आपत्ति क्यों जताई?
सावंत के अनुसार पंडित नेहरू ने ₹197 करोड़ के बजट में से ₹196 करोड़ देश को दिए, IIM जैसे संस्थान बनाए और 9 महीने जेल में रहे — इसलिए दोनों की तुलना अप्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार की उपलब्धियाँ इस स्तर की नहीं हैं।
राष्ट्र प्रेस
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