31 जुलाई 2026
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शिवसेना (यूबीटी) में एकजुटता महज दिखावा, पार्टी का दम टूटा : मंत्री संजय शिरसाट

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शिवसेना (यूबीटी) में एकजुटता महज दिखावा, पार्टी का दम टूटा : मंत्री संजय शिरसाट

सारांश

महाराष्ट्र के मंत्री संजय शिरसाट ने शिवसेना (यूबीटी) की हालिया बैठक को महज दिखावा करार दिया। उनका दावा है कि पार्टी भीतर से बिखर चुकी है, 'ऑपरेशन टाइगर' निराधार है, और संजय राउत खुद अपना घर संभालने में असमर्थ हैं।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र सरकार के मंत्री संजय शिरसाट ने 15 जून को मुंबई में कहा कि शिवसेना (यूबीटी) की एकजुटता केवल दिखावा है।
शिरसाट के अनुसार, हाल की पार्टी बैठक जनता को भ्रमित करने के लिए बुलाई गई थी, न कि वास्तविक एकता के लिए।
उन्होंने 'ऑपरेशन टाइगर' के दावों को खारिज करते हुए कहा कि ऐसा कोई अभियान न चल रहा है, न चलाने की जरूरत है।
शिरसाट ने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अब पार्टी के साथ नहीं हैं, इसलिए बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे हैं।
संजय राउत पर तंज कसते हुए कहा कि जिनका खुद का घर बिखर रहा है, वे दूसरों को एकजुट होने की सलाह दे रहे हैं।

महाराष्ट्र सरकार में मंत्री संजय शिरसाट ने सोमवार, 15 जून को मुंबई में पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि शिवसेना (यूबीटी) के नेता आपस में बिखरे हुए हैं और उनकी एकजुटता केवल जनता को भ्रमित करने का प्रयास है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पार्टी के भीतर अब कोई वास्तविक संगठनात्मक ताकत नहीं बची है।

बैठक पर सवाल

शिरसाट ने शिवसेना (यूबीटी) की हाल ही में बुलाई गई बैठक को सीधे निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि यह बैठक केवल इसलिए आयोजित की गई ताकि बाहरी दुनिया को यह संदेश दिया जा सके कि 'हम एकजुट हैं', जबकि जमीनी हकीकत इसके विपरीत है। उनके अनुसार, पार्टी प्रमुख चाहे कितने भी प्रयास करें, बिखरे हुए नेताओं को एक सूत्र में पिरोना अब संभव नहीं है।

भाषा और लहजे पर टिप्पणी

मंत्री शिरसाट ने कहा कि बैठक में नेताओं के बोलने के तरीके से ही उनकी कमज़ोरी झलक रही थी। उन्होंने कहा कि नेता आग्रहपूर्वक एक-दूसरे से साथ रहने और मनोबल बढ़ाने की अपील कर रहे थे, जो यह दर्शाता है कि पार्टी में अब वह दमखम नहीं रहा जो पहले हुआ करता था।

'ऑपरेशन टाइगर' पर पलटवार

शिरसाट ने 'ऑपरेशन टाइगर' के दावों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि कोई ऑपरेशन नहीं चल रहा और न ही चलाने की जरूरत है। उनके अनुसार, शिवसेना (यूबीटी) के नेता जिस डाली पर बैठे हैं, उसे खुद काट रहे हैं — इसलिए किसी बाहरी 'ऑपरेशन' की आवश्यकता ही नहीं है।

सांसदों और संजय राउत पर निशाना

मंत्री ने यह भी कहा कि शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं को स्वयं पता है कि उनके सांसद अब उनके साथ नहीं हैं, इसलिए वे बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। संजय राउत पर तंज कसते हुए शिरसाट ने कहा कि जिनका अपना घर बिखर रहा है, वे दूसरों को एकजुट होने की सलाह दे रहे हैं — यह विरोधाभास स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि राउत को बेतुके बयान देने की आदत पड़ चुकी है और इस तरह वे अपनी छवि को ऊँचा दिखाने की कोशिश करते हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) के लिए परिस्थितियाँ किसी भी हाल में अनुकूल नहीं होंगी — यह उनका स्पष्ट दावा था।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि असली सवाल यह है कि क्या शिवसेना (यूबीटी) के भीतर वाकई दरारें हैं या यह सत्तापक्ष की सोची-समझी कथा है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजय शिरसाट ने शिवसेना (यूबीटी) के बारे में क्या कहा?
महाराष्ट्र के मंत्री संजय शिरसाट ने 15 जून को कहा कि शिवसेना (यूबीटी) की एकजुटता केवल दिखावा है और पार्टी में कोई वास्तविक संगठनात्मक ताकत नहीं बची। उनके अनुसार, हाल की बैठक जनता को भ्रमित करने के उद्देश्य से बुलाई गई थी।
'ऑपरेशन टाइगर' क्या है और शिरसाट ने इस पर क्या कहा?
'ऑपरेशन टाइगर' वह कथित अभियान है जिसके तहत शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं को तोड़ने की बात कही जा रही थी। शिरसाट ने इसे पूरी तरह निराधार बताया और कहा कि ऐसा कोई अभियान न चल रहा है, न चलाने की ज़रूरत है।
शिरसाट ने संजय राउत पर क्या टिप्पणी की?
शिरसाट ने संजय राउत पर तंज कसते हुए कहा कि जिनका खुद का घर बिखर रहा है, वे दूसरों को एकजुट होने की सलाह दे रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राउत को बेतुके बयान देने की आदत पड़ चुकी है।
शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों को लेकर शिरसाट ने क्या दावा किया?
शिरसाट ने दावा किया कि शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं को खुद पता है कि उनके सांसद अब उनके साथ नहीं हैं। इसीलिए, उनके अनुसार, पार्टी बेबुनियाद आरोप लगा रही है।
महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) की स्थिति क्या है?
शिरसाट के अनुसार, महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) के लिए परिस्थितियाँ किसी भी हाल में अनुकूल नहीं होंगी। पार्टी के भीतर बिखराव और नेतृत्व की कमज़ोरी को वे इसका मुख्य कारण मानते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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