शिवसेना (यूबीटी) में एकजुटता महज दिखावा, पार्टी का दम टूटा : मंत्री संजय शिरसाट
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री संजय शिरसाट ने सोमवार, 15 जून को मुंबई में पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि शिवसेना (यूबीटी) के नेता आपस में बिखरे हुए हैं और उनकी एकजुटता केवल जनता को भ्रमित करने का प्रयास है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पार्टी के भीतर अब कोई वास्तविक संगठनात्मक ताकत नहीं बची है।
बैठक पर सवाल
शिरसाट ने शिवसेना (यूबीटी) की हाल ही में बुलाई गई बैठक को सीधे निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि यह बैठक केवल इसलिए आयोजित की गई ताकि बाहरी दुनिया को यह संदेश दिया जा सके कि 'हम एकजुट हैं', जबकि जमीनी हकीकत इसके विपरीत है। उनके अनुसार, पार्टी प्रमुख चाहे कितने भी प्रयास करें, बिखरे हुए नेताओं को एक सूत्र में पिरोना अब संभव नहीं है।
भाषा और लहजे पर टिप्पणी
मंत्री शिरसाट ने कहा कि बैठक में नेताओं के बोलने के तरीके से ही उनकी कमज़ोरी झलक रही थी। उन्होंने कहा कि नेता आग्रहपूर्वक एक-दूसरे से साथ रहने और मनोबल बढ़ाने की अपील कर रहे थे, जो यह दर्शाता है कि पार्टी में अब वह दमखम नहीं रहा जो पहले हुआ करता था।
'ऑपरेशन टाइगर' पर पलटवार
शिरसाट ने 'ऑपरेशन टाइगर' के दावों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि कोई ऑपरेशन नहीं चल रहा और न ही चलाने की जरूरत है। उनके अनुसार, शिवसेना (यूबीटी) के नेता जिस डाली पर बैठे हैं, उसे खुद काट रहे हैं — इसलिए किसी बाहरी 'ऑपरेशन' की आवश्यकता ही नहीं है।
सांसदों और संजय राउत पर निशाना
मंत्री ने यह भी कहा कि शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं को स्वयं पता है कि उनके सांसद अब उनके साथ नहीं हैं, इसलिए वे बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। संजय राउत पर तंज कसते हुए शिरसाट ने कहा कि जिनका अपना घर बिखर रहा है, वे दूसरों को एकजुट होने की सलाह दे रहे हैं — यह विरोधाभास स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि राउत को बेतुके बयान देने की आदत पड़ चुकी है और इस तरह वे अपनी छवि को ऊँचा दिखाने की कोशिश करते हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) के लिए परिस्थितियाँ किसी भी हाल में अनुकूल नहीं होंगी — यह उनका स्पष्ट दावा था।