उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका: शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसद एकनाथ शिंदे खेमे में शामिल, 'ऑपरेशन टाइगर' सफल
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे को 22 जून 2026 को उस वक्त बड़ा राजनीतिक झटका लगा, जब उनकी पार्टी के 6 सांसदों ने मुंबई में उप-मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की उपस्थिति में शिवसेना की सदस्यता ग्रहण कर ली। इस घटनाक्रम को शिंदे खेमे ने 'ऑपरेशन टाइगर' का नाम दिया और इसे अपनी बड़ी राजनीतिक जीत बताया।
मुख्य घटनाक्रम
उप-मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'मैंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सब कुछ कह दिया है। 'ऑपरेशन टाइगर' सफल रहा।' शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने भी इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि इन छह सांसदों के आने से शिवसेना की ताकत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के दोनों गुटों के बीच प्रभुत्व की लड़ाई जारी है। गौरतलब है कि ये सांसद करीब दो साल पहले लोकसभा चुनाव जीतकर आए थे।
नेताओं की प्रतिक्रिया
मंत्री शंभूराज देसाई ने इन सांसदों के कदम का बचाव करते हुए कहा कि इन्हें 'बागी' नहीं कहा जाना चाहिए। उनके अनुसार, ये सांसद अपने-अपने लोकसभा क्षेत्रों की समस्याओं और जनहित के कार्यों के लिए ढाई साल तक काम करना चाहते थे, परंतु तत्कालीन पार्टी नेतृत्व ने उनका साथ नहीं दिया।
शिवसेना विधायक संजय गायकवाड़ ने दावा किया कि इन 6 सांसदों के शामिल होने से महाराष्ट्र में शिवसेना (शिंदे गुट) सांसदों की संख्या के मामले में नंबर एक पार्टी बन गई है। उन्होंने कहा कि हर जनप्रतिनिधि अपनी राजनीतिक सुरक्षा और जनसेवा के अवसरों को लेकर चिंतित रहता है।
शिवसेना सांसद ज्योति वाघमारे ने यूबीटी नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि एकनाथ शिंदे जनता से सीधे जुड़ते हैं, उनका दुख समझते हैं और उन्हें सशक्त बनाते हैं, जबकि यूबीटी के नेता जनता से संपर्क नहीं रखते।
एनसीपी का नज़रिया
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) नेता जीशान सिद्दीकी ने कहा कि यदि कोई जनप्रतिनिधि अपनी पार्टी में अपनी बात रखने का अवसर नहीं पाता या शीर्ष नेतृत्व तक उसकी पहुँच नहीं है, तो स्वाभाविक रूप से वह ऐसी जगह जाएगा जहाँ उसकी सुनी जाए।
आम जनता और राजनीति पर असर
यह घटनाक्रम महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन को और मज़बूत करता है, जबकि विपक्षी महाविकास अघाड़ी (MVA) के लिए यह एक संगठनात्मक चुनौती बन सकती है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के दल-बदल से मतदाताओं के जनादेश का सम्मान प्रश्नों के घेरे में आता है।
क्या होगा आगे
इन 6 सांसदों के शिंदे खेमे में शामिल होने के बाद यूबीटी की संसदीय ताकत में कमी आएगी। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, उद्धव ठाकरे अब अपनी पार्टी को एकजुट रखने की चुनौती का सामना करेंगे। आने वाले दिनों में इस मामले पर कानूनी और संवैधानिक पहलुओं पर भी बहस होने की संभावना है।