शिवसेना यूबीटी में 'ऑपरेशन टाइगर': छह बागी सांसदों ने शिंदे गुट से मिलाया हाथ, उद्धव के पास बचे सिर्फ तीन सांसद
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) के संसदीय गुट में 18 जून 2026 को बड़ी दरार आ गई, जब पार्टी के नौ में से छह लोकसभा सांसदों ने 'ऑपरेशन टाइगर' के तहत बगावत कर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होने का औपचारिक अनुरोध किया। इस घटनाक्रम के बाद उद्धव ठाकरे के पास लोकसभा में केवल तीन वफादार सांसद ही शेष रह गए हैं।
मुख्य घटनाक्रम: कैसे रचा गया 'ऑपरेशन टाइगर'
शिंदे गुट के सूत्रों के अनुसार, इस पूरे ऑपरेशन की सबसे बड़ी खासियत इसकी गोपनीयता थी। उद्धव खेमे को भनक न लगे, इसके लिए सभी छह सांसद अलग-अलग रास्तों, अलग-अलग शहरों और अलग-अलग परिवहन साधनों से नई दिल्ली पहुँचे।
16 जून की देर रात 1:30 बजे, सांसद नागेश पाटिल अष्टिकर नांदेड़ से फ्लाइट लेकर दिल्ली पहुँचे। उसी दिन दोपहर में संजय देशमुख और संजय बंधु जाधव नांदेड़ से अलग-अलग उड़ानों से आए। शाम को भाऊसाहेब वाकचौरे हैदराबाद से प्राइवेट जेट के ज़रिए दिल्ली पहुँचे, जबकि रात में संजय दीना पाटिल मंत्री प्रताप सरनाईक के साथ राजधानी पहुँचे।
17 जून को सुबह 3 बजे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे मुंबई-जयपुर रूट से दिल्ली पहुँचे और सुबह 4:30 बजे ओमप्रकाशराजे निंबालकर पुणे के रास्ते दिल्ली आए। सभी छह सांसदों को दिल्ली के एक फाइव-स्टार होटल में ठहराया गया, जो इस पूरे ऑपरेशन का बेस कैंप बना।
लोकसभा स्पीकर के समक्ष औपचारिक प्रस्ताव
बुधवार सुबह 7 बजे सांसद ओमप्रकाशराजे निंबालकर ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से अकेले मुलाकात कर आधार तैयार किया। सुबह 10:20 बजे शेष पाँच सांसद भी उनके साथ जुड़े और एक हस्ताक्षरित, आधिकारिक प्रस्ताव स्पीकर को सौंपा।
इस प्रस्ताव में छह सांसदों ने आरोप लगाया कि शिवसेना (यूबीटी) अपने मूल वैचारिक आधार से भटक चुकी है और पार्टी के वरिष्ठ नेता सक्रिय रूप से उसे कांग्रेस में विलय कराने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने आधिकारिक तौर पर एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होने का अनुरोध किया और लोकसभा चैंबर में अपनी बैठने की व्यवस्था बदलने की माँग की।
देर रात कॉन्फ्रेंस कॉल और जयपुर रवानगी
गौरतलब है कि उद्धव ठाकरे गुट के संसदीय नेता अरविंद सावंत ने अगले दिन एक 'लिटमस टेस्ट' बैठक बुलाई थी। किसी भी जवाबी बातचीत को रोकने के लिए, दिल्ली में ज़मीनी कामकाज संभाल रहे श्रीकांत शिंदे — जो उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पुत्र और शिवसेना सांसद हैं — ने देर रात एक अहम कॉन्फ्रेंस कॉल करवाई।
इस कॉल में ओमप्रकाशराजे निंबालकर (धाराशिव) और संजय दीना पाटिल (उत्तर-पूर्व मुंबई) जैसे हाई-प्रोफाइल सांसदों की चिंताओं को दूर किया गया। श्रीकांत शिंदे ने पक्का भरोसा दिलाते हुए कहा, 'शिवसेना पूरी मजबूती से आपके साथ खड़ी रहेगी।' इसके बाद गुरुवार सुबह छहों सांसदों को दिल्ली के होटल से जयपुर में एक सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया।
दलबदल विरोधी कानून और कानूनी स्थिति
लोकसभा के नौ में से छह सांसदों के पाला बदलने के कारण शिंदे गुट के पास संसदीय दल का स्पष्ट दो-तिहाई बहुमत है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के तहत उनकी स्थिति को मज़बूत करता है।
दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे गुट ने स्पीकर ओम बिरला से मिलकर छहों सदस्यों को तत्काल अयोग्य घोषित करने की माँग करने की योजना की घोषणा की है। शिंदे खेमे की कानूनी टीमें विपक्ष की संभावित जवाबी चालों की समीक्षा कर रही हैं और अगले 48 घंटों तक कोई संयुक्त तस्वीर या औपचारिक विलय की घोषणा नहीं की जाएगी।
आगे क्या होगा
एकनाथ शिंदे और छहों सांसदों के बीच 20 जून को आमने-सामने की औपचारिक बैठक तय है, जिसमें आधिकारिक कागज़ी कार्रवाई और अलग होने के कारणों को सार्वजनिक किया जाएगा। इस बीच, शिवसेना-यूबीटी नेता संजय राउत की तीखी सार्वजनिक चेतावनियों के बाद स्थानीय स्तर पर राजनीतिक विरोध की आशंका को देखते हुए महाराष्ट्र में सभी छह बागी सांसदों के आवासों के बाहर पुलिस सुरक्षा काफी बढ़ा दी गई है। महाराष्ट्र की राजनीति में यह नया मोड़ आने वाले हफ्तों में और भी तीखा रूप ले सकता है।