18 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

तुलु को कर्नाटक में राजभाषा का दर्जा, मंगलुरु जिले के लिए ₹32,611 करोड़ का विकास पैकेज

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
तुलु को कर्नाटक में राजभाषा का दर्जा, मंगलुरु जिले के लिए ₹32,611 करोड़ का विकास पैकेज

सारांश

दशकों की माँग के बाद कर्नाटक सरकार ने तुलु को आधिकारिक प्रशासनिक दर्जा दे दिया — लेकिन यह सिर्फ भाषाई पहचान की जीत नहीं है। मंगलुरु में हुई विशेष कैबिनेट बैठक में ₹32,611 करोड़ का विकास पैकेज और जिले के नामकरण का फैसला भी हुआ, जो तटीय कर्नाटक की राजनीतिक धुरी बदल सकता है।

मुख्य बातें

कर्नाटक मंत्रिमंडल ने 18 सितंबर 2026 को मंगलुरु में विशेष बैठक कर तुलु को उडुपी और दक्षिण कन्नड़ जिलों की दूसरी अतिरिक्त प्रशासनिक भाषा घोषित किया।
तटीय क्षेत्र के लिए ₹32,611 करोड़ की विकास परियोजनाएँ स्वीकृत, जिनमें ग्रामीण विकास के लिए ₹16,000 करोड़ शामिल।
दक्षिण कन्नड़ जिले का नाम मंगलुरु जिला करने की प्रक्रिया शुरू; एक महीने तक जनता की राय ली जाएगी।
मंगलुरु, उडुपी और कारवार के 12 द्वीपों को वैश्विक पर्यटन केंद्र बनाने की योजना को मंज़ूरी।
₹500 करोड़ के मेडिकल कॉलेज को भी अनुमोदन; मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने पूर्व मंत्री रामनाथ राय और विधायक अशोक कुमार राय को श्रेय दिया।

कर्नाटक मंत्रिमंडल ने 18 सितंबर 2026 को मंगलुरु में आयोजित एक ऐतिहासिक विशेष बैठक में तुलु भाषा को उडुपी और दक्षिण कन्नड़ जिलों में कन्नड़ के साथ दूसरी अतिरिक्त प्रशासनिक भाषा के रूप में मान्यता देने का सर्वसम्मत निर्णय लिया। इसके साथ ही, तटीय क्षेत्र के समग्र विकास के लिए ₹32,611 करोड़ की परियोजनाओं को हरी झंडी दी गई।

ऐतिहासिक निर्णय की पृष्ठभूमि

तुलु भाषा को आधिकारिक दर्जा दिलाने की माँग दशकों से तटीय कर्नाटक में उठती रही है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि यह निर्णय तुलु भाषी लोगों, संगठनों और जनप्रतिनिधियों की लंबे समय से चली आ रही माँग को पूरा करता है। उन्होंने कहा, 'तटीय जिलों में तुलु भाषा प्रमुखता से बोली जाती है।' मुख्यमंत्री ने पूर्व मंत्री रामनाथ राय को इस माँग को सबसे पहले उठाने का श्रेय दिया।

उन्होंने पुत्तूर विधायक अशोक कुमार राय का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने विधायक बनने के बाद विधानसभा में जो पहला सवाल उठाया, वह तुलु भाषा से संबंधित था। शिवकुमार ने कहा, 'मुझे आश्चर्य हुआ — उनकी पहली प्राथमिकता भाषा थी।'

मंगलुरु जिले का नामकरण और प्रशासनिक बदलाव

कैबिनेट ने दक्षिण कन्नड़ जिले का नाम बदलकर मंगलुरु जिला करने की प्रक्रिया शुरू करने का भी निर्णय लिया। शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि सरकार एक मसौदा अधिसूचना जारी करेगी और अंतिम निर्णय से पहले एक महीने तक जनता की राय और आपत्तियाँ आमंत्रित करेगी। उन्होंने कहा, 'लोग मंगलुरु को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचानते हैं और उन्होंने इस संबंध में अपनी इच्छा व्यक्त की है।'

₹32,611 करोड़ का तटीय विकास पैकेज

तटीय विकास मोर्चे पर कैबिनेट ने ₹32,611 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी दी, जिनमें ग्रामीण विकास परियोजनाओं के लिए ₹16,000 करोड़ अलग से निर्धारित हैं। इसके अतिरिक्त, मंगलुरु, उडुपी और कारवार जिलों के 12 द्वीपों के विकास को वैश्विक पर्यटन केंद्र में बदलने के लिए स्वीकृति दी गई। उडुपी क्षेत्र में ₹500 करोड़ के मेडिकल कॉलेज को भी अनुमोदन मिला।

मुख्यमंत्री का संदेश और राजनीतिक परिप्रेक्ष्य

शिवकुमार ने पिछली सरकार पर प्रत्यक्ष टिप्पणी से परहेज करते हुए कहा, 'हम भावनाओं पर आधारित राजनीति नहीं करेंगे।' उन्होंने ज़ोर दिया कि सरकार लोगों को सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर केंद्रित है। गौरतलब है कि तुलु को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की माँग भी लंबे समय से राष्ट्रीय स्तर पर उठती रही है, हालाँकि यह निर्णय अभी राज्य की प्रशासनिक सीमा तक सीमित है।

यह बैठक इस अर्थ में भी महत्वपूर्ण है कि कर्नाटक मंत्रिमंडल ने राजधानी बेंगलुरु के बाहर एक तटीय शहर में बैठकर यह निर्णय लिया — जो कि क्षेत्रीय आकांक्षाओं के प्रति सरकार की प्रतीकात्मक संवेदनशीलता को दर्शाता है।

आगे की राह

जिले के नामकरण पर सार्वजनिक परामर्श प्रक्रिया के बाद अंतिम अधिसूचना जारी होगी। तुलु को प्रशासनिक दर्जा मिलने से अब उडुपी और मंगलुरु जिलों में सरकारी कार्यालयों, दस्तावेज़ों और संवाद में इसके उपयोग का मार्ग प्रशस्त होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम संविधान की आठवीं अनुसूची में तुलु को शामिल कराने की भविष्य की माँग को भी बल देगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह निर्णय संविधान की आठवीं अनुसूची से बाहर रहता है — जो तुलु आंदोलन की मूल माँग थी। राज्य सरकार ने जो दिया, वह प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण पर संवैधानिक रूप से सीमित है। ₹32,611 करोड़ का पैकेज तटीय कर्नाटक में राजनीतिक समीकरण साधने का भी प्रयास है, जहाँ भारतीय जनता पार्टी (BJP) का पारंपरिक जनाधार मज़बूत रहा है। असली कसौटी यह होगी कि भाषाई मान्यता को लागू करने वाला प्रशासनिक ढाँचा कितनी तेज़ी से खड़ा होता है और द्वीप विकास परियोजनाएँ पर्यावरणीय संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ती हैं या नहीं।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तुलु को कर्नाटक में किन जिलों में प्रशासनिक भाषा का दर्जा मिला है?
तुलु को उडुपी और दक्षिण कन्नड़ (मंगलुरु) जिलों में कन्नड़ के साथ दूसरी अतिरिक्त प्रशासनिक भाषा के रूप में मान्यता दी गई है। यह दर्जा पूरे कर्नाटक में नहीं, बल्कि इन दो तटीय जिलों तक सीमित है।
कर्नाटक में दक्षिण कन्नड़ जिले का नाम बदलकर मंगलुरु कब होगा?
कर्नाटक कैबिनेट ने नामकरण प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है। सरकार पहले एक मसौदा अधिसूचना जारी करेगी और एक महीने तक जनता की राय और आपत्तियाँ आमंत्रित करने के बाद अंतिम निर्णय लेगी।
कर्नाटक के तटीय क्षेत्र के लिए ₹32,611 करोड़ का पैकेज किसके लिए है?
यह पैकेज मंगलुरु, उडुपी और कारवार जिलों के समग्र विकास के लिए है। इसमें ग्रामीण विकास के लिए ₹16,000 करोड़ और तीनों जिलों के 12 द्वीपों को वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना शामिल है।
तुलु भाषा को आधिकारिक दर्जा देने की माँग कितने समय से चली आ रही थी?
तुलु को आधिकारिक दर्जा दिलाने की माँग दशकों पुरानी है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बताया कि पूर्व मंत्री रामनाथ राय ने यह माँग सबसे पहले उठाई थी और विधायक अशोक कुमार राय समेत कई जनप्रतिनिधियों ने इसके लिए लगातार दबाव बनाया।
क्या तुलु को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया है?
नहीं। कर्नाटक कैबिनेट का यह निर्णय केवल राज्य स्तर पर प्रशासनिक मान्यता तक सीमित है। तुलु को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराना एक अलग और राष्ट्रीय स्तर की प्रक्रिया है, जिसके लिए केंद्र सरकार की भूमिका अपेक्षित होगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 घंटे पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले