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कमल हासन के खिलाफ कन्नड़ भाषा विवाद मामला बेंगलुरु की विशेष MLA/MP अदालत को स्थानांतरित, 22 जुलाई को अगली सुनवाई

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कमल हासन के खिलाफ कन्नड़ भाषा विवाद मामला बेंगलुरु की विशेष MLA/MP अदालत को स्थानांतरित, 22 जुलाई को अगली सुनवाई

सारांश

कमल हासन का 'कन्नड़ भाषा तमिल से जन्मी है' वाला बयान अब अदालत तक पहुँच गया है। राज्यसभा सांसद बनने के बाद मामला बेंगलुरु की विशेष MLA/MP अदालत को स्थानांतरित हुआ, अगली सुनवाई 22 जुलाई को — और माफी से इनकार अब भी कायम है।

मुख्य बातें

कमल हासन के खिलाफ कन्नड़ भाषा के कथित अपमान का मामला 8 जुलाई 2026 को बेंगलुरु की 42वीं जनप्रतिनिधि विशेष अदालत को स्थानांतरित किया गया।
विवाद की जड़ मई 2025 में चेन्नई के एक फिल्म प्रमोशन कार्यक्रम में दिया गया वह बयान है जिसमें उन्होंने कहा था कि कन्नड़ भाषा तमिल से जन्मी है ।
मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई 2026 को निर्धारित है।
कमल हासन ने माफी माँगने से इनकार किया; कहा — बयान स्नेहवश और इतिहासकारों के विचारों पर आधारित था।
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कमल हासन को फटकार लगाते हुए कहा था कि एक माफी से पूरा विवाद समाप्त हो सकता था।
तमिलनाडु से राज्यसभा सांसद चुने जाने के बाद मामला कनकपुरा टाउन कोर्ट से विशेष MLA/MP अदालत को भेजा गया।

अभिनेता और राज्यसभा सांसद कमल हासन के विरुद्ध कन्नड़ भाषा, साहित्य, भूमि एवं संस्कृति के कथित अपमान से जुड़ा मामला 8 जुलाई 2026 को बेंगलुरु की 42वीं जनप्रतिनिधि विशेष अदालत को स्थानांतरित कर दिया गया। विशेष अदालत ने प्रकरण की सुनवाई करते हुए अगली तारीख 22 जुलाई निर्धारित की है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद मई 2025 में चेन्नई में आयोजित एक फिल्म प्रमोशनल कार्यक्रम के दौरान शुरू हुआ, जब कमल हासन ने सार्वजनिक मंच से कहा कि कन्नड़ भाषा तमिल से जन्मी है। इस बयान ने कर्नाटक में तीव्र भाषाई विवाद को जन्म दिया और व्यापक विरोध प्रदर्शनों की लहर उठ खड़ी हुई। शुरुआत में यह निजी शिकायत कनकपुरा टाउन कोर्ट में दर्ज कराई गई थी। तमिलनाडु से राज्यसभा सदस्य के रूप में निर्वाचित होने के बाद, न्यायिक प्रक्रिया के तहत इसे विधायकों-सांसदों के मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष अदालत को भेजा गया।

कर्नाटक में विरोध और राजनीतिक प्रतिक्रिया

कमल हासन के बयान के बाद कर्नाटक के विभिन्न हिस्सों में व्यापक प्रदर्शन हुए। संगठनों ने उनसे बिना शर्त माफी की माँग की और उनकी फिल्मों के बहिष्कार की चेतावनी दी। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सहित कई वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं ने भी इस बयान की सार्वजनिक आलोचना की।

कमल हासन का पक्ष

कमल हासन ने माफी माँगने से इनकार करते हुए कहा कि उनकी टिप्पणी स्नेहवश और इतिहासकारों के विचारों पर आधारित थी। बाद में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भाषा की उत्पत्ति जैसे संवेदनशील विषयों पर बहस का अधिकार राजनेताओं को नहीं, बल्कि भाषाविदों को है।

कर्नाटक उच्च न्यायालय की टिप्पणियाँ

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने इस मामले में कमल हासन को कड़ी फटकार लगाई थी। न्यायालय ने कहा था, 'किसी को भी लोगों की भावनाएँ आहत करने का अधिकार नहीं है' और यह भी कि 'एक माफी से पूरा विवाद समाप्त हो सकता था।' पीठ ने यह भी पूछा था कि क्या वह इतिहासकार हैं या भाषाविद्, और कहा था कि 'एक सार्वजनिक व्यक्ति सार्वजनिक मंच पर इस तरह का बयान कैसे दे सकता है?'

आगे क्या होगा

मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई 2026 को बेंगलुरु की 42वीं जनप्रतिनिधि विशेष अदालत में होगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत इस भाषाई विवाद को किस दिशा में ले जाती है — विशेषकर तब, जब कमल हासन अब एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि की भूमिका में हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के रूप में उनकी जिम्मेदारी के सवाल को और जटिल बना देता है। कर्नाटक उच्च न्यायालय की तीखी टिप्पणियाँ बताती हैं कि न्यायपालिका भी इस मामले को सामान्य नहीं मान रही। असली सवाल यह है कि क्या भाषाई संवेदनशीलता के मुद्दों पर सार्वजनिक हस्तियों के लिए कोई स्पष्ट जवाबदेही तंत्र है — या हर विवाद केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप बनकर रह जाता है।
RashtraPress
23 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कमल हासन के खिलाफ कन्नड़ भाषा विवाद मामला क्या है?
यह मामला मई 2025 में चेन्नई में एक फिल्म प्रमोशनल कार्यक्रम के दौरान कमल हासन के उस बयान से जुड़ा है जिसमें उन्होंने कहा था कि कन्नड़ भाषा तमिल से जन्मी है। इस बयान के बाद कर्नाटक में व्यापक विरोध हुआ और कनकपुरा टाउन कोर्ट में उनके खिलाफ निजी शिकायत दर्ज कराई गई।
मामला विशेष MLA/MP अदालत को क्यों स्थानांतरित किया गया?
कमल हासन के तमिलनाडु से राज्यसभा सांसद चुने जाने के बाद, न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार मामला बेंगलुरु की 42वीं जनप्रतिनिधि विशेष अदालत को भेजा गया, जो विधायकों और सांसदों से जुड़े मामलों की सुनवाई करती है।
कमल हासन ने माफी क्यों नहीं माँगी?
कमल हासन ने कहा कि उनकी टिप्पणी स्नेहवश और इतिहासकारों के विचारों पर आधारित थी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भाषा की उत्पत्ति जैसे विषयों पर बहस करने के लिए राजनेता नहीं, बल्कि भाषाविद् योग्य हैं।
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने इस मामले पर क्या कहा?
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कमल हासन को कड़ी फटकार लगाई और कहा कि एक माफी से पूरा विवाद समाप्त हो सकता था। अदालत ने यह भी कहा कि 'किसी को भी लोगों की भावनाएँ आहत करने का अधिकार नहीं है' और पूछा कि क्या वह इतिहासकार हैं या भाषाविद्।
इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
बेंगलुरु की 42वीं जनप्रतिनिधि विशेष अदालत ने अगली सुनवाई 22 जुलाई 2026 के लिए निर्धारित की है।
राष्ट्र प्रेस
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