कर्नाटक ने 101 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया, 89 तालुक गंभीर श्रेणी में
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक सरकार ने 27 अगस्त 2026 को राज्य के 101 तालुकों को आधिकारिक रूप से सूखाग्रस्त घोषित कर दिया। 1 जून से 21 अगस्त 2026 के बीच 29 जिलों में दर्ज की गई भारी वर्षा कमी के आधार पर यह निर्णय वैज्ञानिक आकलन और निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार लिया गया है। इनमें से 89 तालुकों को गंभीर रूप से प्रभावित और 12 तालुकों को मध्यम रूप से प्रभावित श्रेणी में रखा गया है।
वर्षा की स्थिति: आँकड़े क्या कहते हैं
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, 1 जून से 21 अगस्त 2026 की अवधि में केवल 2 जिलों में सामान्य वर्षा दर्ज हुई, जबकि शेष 29 जिले वर्षा की कमी से जूझते रहे। तालुका स्तर पर स्थिति और विकट है — 176 तालुकों को कम वर्षा वाले क्षेत्रों में वर्गीकृत किया गया है, और 15 तालुकों में वर्षा की गंभीर कमी देखी गई है। इस पूरी अवधि में मात्र 49 तालुकों में सामान्य से अधिक बारिश हुई।
सूखा घोषणा: क्या है प्रावधान
यह घोषणा तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है और सरकारी आदेश की तिथि से छह महीने तक वैध रहेगी, जब तक राज्य सरकार इसे पहले रद्द न करे। जिला आयुक्तों को राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) के दिशानिर्देशों के तहत किसानों को तत्काल राहत देने के निर्देश जारी किए गए हैं। साथ ही उन्हें प्राथमिकता के आधार पर संयुक्त फसल हानि सर्वेक्षण कराने और तुरंत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।
मुख्यमंत्री का किसानों को आश्वासन
मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने किसान समुदाय को भरोसा दिलाया कि सरकार इस कठिन दौर में उनके साथ मज़बूती से खड़ी रहेगी। उन्होंने कहा, 'किसी को भी चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। हम आपके साथ हैं और इस कठिन समय में आपके साथ खड़े रहेंगे।' सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि अपर्याप्त वर्षा और उससे उपजी अनिश्चितता ने गंभीर चिंता पैदा की है, और किसानों को हर आवश्यक सहायता दी जाएगी।
आगे की निगरानी और संभावित विस्तार
सरकार ने राज्यभर में वर्षा पूर्वानुमान और फसलों की स्थिति पर साप्ताहिक समीक्षा करने का निर्णय लिया है। यदि स्थिति और बिगड़ी, तो आने वाले दिनों में अतिरिक्त तालुकों को भी सूखाग्रस्त घोषित किया जा सकता है। गौरतलब है कि कर्नाटक में मानसून की अनिश्चितता पिछले कुछ वर्षों में बार-बार सामने आई है — यह ऐसे समय में आया है जब राज्य के कई हिस्सों में खरीफ फसलों की बुवाई पहले ही प्रभावित हो चुकी है।