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कर्नाटक के 102 तालुकों में सूखे जैसे हालात, अगस्त अंत तक केंद्र को सौंपी जाएगी विस्तृत रिपोर्ट

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कर्नाटक के 102 तालुकों में सूखे जैसे हालात, अगस्त अंत तक केंद्र को सौंपी जाएगी विस्तृत रिपोर्ट

सारांश

कर्नाटक के 102 तालुक सूखे की चपेट में हैं और राज्य सरकार अगस्त अंत तक केंद्र को विस्तृत रिपोर्ट सौंपने की तैयारी में है। साथ ही केंद्र ने फसल बीमा पंजीकरण की समय-सीमा बढ़ाकर किसानों को राहत दी है।

मुख्य बातें

परमेश्वर ने 25 अगस्त को बताया कि कर्नाटक के 102 तालुक सूखे जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं।
सूखे पर विस्तृत रिपोर्ट अगस्त के अंत तक केंद्र सरकार को सौंपी जाएगी; कैबिनेट में ग्राउंड-ट्रूथिंग के नतीजों पर चर्चा होगी।
केंद्र सरकार ने कर्नाटक के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में फसल बीमा पंजीकरण की समय-सीमा बढ़ा दी है।
शिवकुमार ने विधायकों से समूहों में मुलाकात कर उनके निर्वाचन क्षेत्रों की समस्याएँ सुनीं।
हनूर मामला सीआईडी को सौंपा गया; परमेश्वर ने इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताया।

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने मंगलवार, 25 अगस्त को बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट किया कि राज्य के 102 तालुक फिलहाल सूखे जैसी गंभीर स्थिति से जूझ रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस संकट पर एक विस्तृत रिपोर्ट अगस्त के अंत तक केंद्र सरकार को सौंपी जाएगी।

मुख्य घटनाक्रम

परमेश्वर ने कहा, 'सूखा घोषित करने के तय नियमों के अनुसार, अभी 102 तालुका सूखे की स्थिति का सामना कर रहे हैं। हम कैबिनेट में जमीनी स्तर पर की गई जांच के नतीजों पर चर्चा करेंगे। हम हर सप्ताह स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं। इस महीने के आखिर तक केंद्र सरकार को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी जाएगी।' उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और विधायकों के बीच मंगलवार को इस मुद्दे पर विशेष चर्चा हुई।

फसल बीमा पंजीकरण की समय-सीमा बढ़ी

मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, केंद्र सरकार ने कर्नाटक के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में फसल बीमा पंजीकरण की समय-सीमा बढ़ाने का निर्णय लिया है। गौरतलब है कि इससे पहले राज्य सरकार ने केंद्र को पत्र लिखकर यह माँग रखी थी, जिसे अब स्वीकार कर लिया गया है। यह राहत उन किसानों के लिए महत्वपूर्ण है जो समय पर पंजीकरण नहीं करा पाए थे।

विधायकों से समूह में बैठक

उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने बताया कि कई विधायक अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों से जुड़े मुद्दे उठाना चाहते थे, इसलिए मुख्यमंत्री शिवकुमार ने उन्हें समूहों में बुलाकर उनकी बातें सुनीं और समाधान के उपायों पर विचार-विमर्श किया। यह पूछे जाने पर कि क्या केवल कांग्रेस विधायकों को ही आमंत्रित किया गया, परमेश्वर ने कहा कि सत्ताधारी दल की जिम्मेदारी है कि वह एकजुट रहे और स्वाभाविक रूप से उसके विधायकों को प्राथमिकता दी जाती है।

जिला मंत्रियों की दोहरी जिम्मेदारी

स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारी और सरकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुँचाने के लिए प्रत्येक जिले में एक मंत्री नियुक्त किया गया है। परमेश्वर ने कहा, 'इन मंत्रियों की दो जिम्मेदारियाँ हैं — पार्टी का काम और विकास कार्यों की निगरानी। यह व्यवस्था लंबे समय से चली आ रही है।'

हनूर मामला सीआईडी को सौंपा

हनूर मामले को आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) को सौंपे जाने के फैसले पर परमेश्वर ने कहा कि जब किसी घटना को लेकर संदेह उत्पन्न होता है तो सरकार सामान्यतः ऐसे मामले सीआईडी को सौंप देती है। उन्होंने स्पष्ट किया, 'इसमें कुछ भी असाधारण नहीं है — यह एक स्थापित प्रक्रिया है।' यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में कई संवेदनशील मामलों की जांच को लेकर विपक्ष सवाल उठा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि केंद्र को रिपोर्ट सौंपने के बाद राहत राशि कितनी जल्दी और किस पारदर्शिता के साथ किसानों तक पहुँचेगी। कर्नाटक पिछले कुछ वर्षों में बार-बार सूखे की मार झेल चुका है, फिर भी दीर्घकालिक जल-प्रबंधन नीति पर ठोस प्रगति सीमित रही है। फसल बीमा समय-सीमा बढ़ाना तात्कालिक राहत है, लेकिन यह मूल संकट — अपर्याप्त वर्षा और सिंचाई अवसंरचना की कमी — का समाधान नहीं है। राज्य सरकार की साप्ताहिक समीक्षा की प्रतिबद्धता सराहनीय है, परंतु जवाबदेही तभी सुनिश्चित होगी जब ये समीक्षाएँ सार्वजनिक रूप से साझा की जाएँ।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक के कितने तालुकों में सूखे जैसी स्थिति है?
उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर के अनुसार, 25 अगस्त 2025 तक कर्नाटक के 102 तालुक सूखे की परिभाषा के तय मानदंडों के अनुसार सूखे जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं। सरकार हर सप्ताह स्थिति की समीक्षा कर रही है।
केंद्र सरकार को सूखे की रिपोर्ट कब सौंपी जाएगी?
परमेश्वर ने स्पष्ट किया कि अगस्त के अंत तक केंद्र सरकार को विस्तृत रिपोर्ट सौंपी जाएगी। इससे पहले कैबिनेट में ग्राउंड-ट्रूथिंग के नतीजों पर चर्चा होगी।
कर्नाटक में फसल बीमा पंजीकरण की समय-सीमा क्यों बढ़ाई गई?
केंद्र सरकार ने कर्नाटक सरकार के अनुरोध पर सूखा प्रभावित इलाकों में फसल बीमा पंजीकरण की समय-सीमा बढ़ाई है। राज्य सरकार ने पहले ही केंद्र को पत्र लिखकर यह माँग रखी थी ताकि प्रभावित किसान योजना का लाभ उठा सकें।
हनूर मामला सीआईडी को क्यों सौंपा गया?
उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने बताया कि जब किसी घटना को लेकर संदेह होता है तो सरकार मामले सीआईडी को सौंपती है। उन्होंने इसे एक स्थापित प्रशासनिक प्रक्रिया बताया और कहा कि इसमें कुछ भी असाधारण नहीं है।
कर्नाटक में जिला मंत्रियों की क्या भूमिका है?
राज्य सरकार ने प्रत्येक जिले के लिए एक मंत्री नियुक्त किया है जिनकी दोहरी जिम्मेदारी है — पार्टी संगठन का काम देखना और विकास कार्यों की निगरानी करना। आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को देखते हुए यह व्यवस्था विशेष रूप से सक्रिय की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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