कर्नाटक सूखा 2025: CM शिवकुमार ने 178 तालुकों की स्थिति की समीक्षा की, हर तालुका को ₹1 करोड़ का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने रविवार, 19 जुलाई को बेंगलुरू स्थित विधान सौधा में जिला पंचायतों के उपायुक्तों और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में राज्य के 178 तालुकों में छाई सूखे की गंभीर स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई और राहत उपायों को ज़मीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने की रणनीति तय की गई।
बैठक में क्या हुआ
बैठक में पीने के पानी की आपूर्ति, पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता, कृषि कार्य, रोज़गार सृजन और सूखाग्रस्त क्षेत्रों में राहत उपायों के क्रियान्वयन पर केंद्रित चर्चा हुई। उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर, मंत्री केजे जॉर्ज, रामलिंगा रेड्डी, ईश्वर खंड्रे और यतींद्र सिद्धारमैया भी इस बैठक में उपस्थित रहे। मुख्य सचिव शालिनी रजनीश, मुख्यमंत्री के आर्थिक सलाहकार एलके अतीक, अतिरिक्त मुख्य सचिव तुषार गिरिनाथ और गौरव गुप्ता सहित वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
मुख्यमंत्री के निर्देश और चेतावनी
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने समीक्षा के दौरान स्पष्ट किया कि वे कागज़ी रिपोर्टों की बजाय फील्ड रिपोर्ट को प्राथमिकता देंगे। उन्होंने अधिकारियों को लापरवाही के विरुद्ध कड़ी चेतावनी देते हुए कहा, 'अगर फील्ड रिपोर्ट और अधिकारियों की जमा की गई रिपोर्ट में कोई अंतर पाया गया तो कार्रवाई की जाएगी।' उन्होंने सभी ज़िला अधिकारियों को 'टीम कर्नाटक' के रूप में एकजुट होकर काम करने का निर्देश दिया।
शिवकुमार ने नए बोरवेल की खुदाई में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य की। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी फर्जी या बोगस बोरवेल दावे के लिए संबंधित सीईओ सीधे ज़िम्मेदार होंगे।
सूखे का आकलन और राहत घोषणाएँ
मुख्यमंत्री ने बताया कि कर्नाटक में अभी 60 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई है, जिससे 178 तालुके प्रभावित हुए हैं। उन्होंने ज़िला प्रशासन को अगले 15 दिनों के भीतर पूरा डेटा संकलित करने का निर्देश दिया, ताकि केंद्र सरकार को सूखे की रिपोर्ट समय पर सौंपी जा सके। पीने के पानी की कमी दूर करने के लिए उन्होंने हर ग्रामीण तालुका को ₹1 करोड़ अतिरिक्त देने की घोषणा की।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण भारत के कई राज्य मानसून की अनियमितता से जूझ रहे हैं और कर्नाटक में जलाशयों का भंडारण स्तर सामान्य से काफी नीचे है। शिवकुमार ने अधिकारियों को वर्षा के पैटर्न और जलाशय के भंडारण स्तर के आधार पर किसानों को कृषि कार्यों के बारे में मार्गदर्शन देने को भी कहा। उन्होंने छोटे और सीमांत किसानों के हितों की सुरक्षा पर विशेष ज़ोर दिया।
उपमुख्यमंत्री परमेश्वर की चेतावनी
उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के ज़रिए अधिकारियों को संबोधित करते हुए बताया कि राज्य में 68 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई है और 88 तालुकों में भूजल स्तर गिर चुका है। उन्होंने पीने के पानी की आपूर्ति, रोज़गार सृजन और चारे की उपलब्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया। परमेश्वर ने अधिकारियों को विकसित भारत-जी राम जी योजना के तहत कार्यों में तेज़ी लाने, साप्ताहिक ज़िला टास्क फोर्स बैठकें आयोजित करने और केंद्रीय सहायता प्राप्त करने के लिए ज़मीनी रिपोर्ट समय पर जमा करने के निर्देश दिए।
आगे क्या होगा
राज्य सरकार अगले 15 दिनों में केंद्र को सूखे की विस्तृत रिपोर्ट सौंपने की तैयारी में है, जिसके आधार पर राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (NDRF) से सहायता की माँग की जाएगी। सूखे का आकलन करने वाली केंद्रीय टीमों को राज्य अधिकारियों का पूरा सहयोग देने के निर्देश दिए गए हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि फील्ड रिपोर्ट और सरकारी आँकड़ों के बीच का अंतर कितना पाटा जा सकता है।