26 अगस्त 2026
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कर्नाटक के 102 तालुकों में सूखे का ऐलान संभव, डिप्टी सीएम परमेश्वर ने दिए संकेत

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कर्नाटक के 102 तालुकों में सूखे का ऐलान संभव, डिप्टी सीएम परमेश्वर ने दिए संकेत

सारांश

कर्नाटक सरकार 102 तालुकों में सूखे का आधिकारिक ऐलान करने की तैयारी में है। डिप्टी सीएम जी. परमेश्वर ने संकेत दिया कि जमीनी रिपोर्टों की समीक्षा के बाद अगली कैबिनेट बैठक में फैसला होगा। पेयजल संकट और फसल नुकसान के बीच यह घोषणा लाखों किसानों के लिए राहत पैकेज की राह खोल सकती है।

मुख्य बातें

कर्नाटक के डिप्टी सीएम जी.
परमेश्वर ने 26 अगस्त को कहा कि 102 तालुकों में सूखे का ऐलान अगली कैबिनेट बैठक में हो सकता है।
सरकार को सभी 102 तालुकों से जमीनी हकीकत की रिपोर्टें मिल चुकी हैं; घोषणा केंद्र के मानदंडों के अनुसार होगी।
राज्य में पेयजल की गंभीर कमी और किसानों की फसलें बर्बाद होने की सूचना है।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के दिल्ली दौरे पर मंत्री बी.
नागेंद्र के इस्तीफे पर कांग्रेस आलाकमान से चर्चा संभव।
परमेश्वर ने कैबिनेट फेरबदल की अटकलें खारिज कीं; कहा — कोई भी फैसला आलाकमान पर निर्भर।
राज्य सरकार आंतरिक आरक्षण लागू कर चुकी है; परमेश्वर ने इसे 'तय मामला' बताया।

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने बुधवार, 26 अगस्त को स्पष्ट किया कि राज्य सरकार 102 तालुकों में सूखे की स्थिति का व्यापक आकलन कर रही है और अगली कैबिनेट बैठक में आधिकारिक सूखा घोषणा की जा सकती है। बेंगलुरु में अपने आवास के निकट पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि जमीनी हकीकत की रिपोर्टें सरकार को मिल चुकी हैं और उन पर विधिवत चर्चा की जाएगी।

सूखे का आकलन और घोषणा की प्रक्रिया

परमेश्वर ने बताया कि सरकार को 102 तालुकों से ज़मीनी स्तर की रिपोर्टें प्राप्त हुई हैं। उन्होंने कहा, 'हम केंद्र द्वारा तय किए गए मानदंडों के अनुसार सूखे का ऐलान करेंगे और हर सप्ताह स्थिति की समीक्षा करते रहेंगे।' राज्य में पेयजल की गंभीर कमी और किसानों की फसलों को हुए नुकसान को देखते हुए यह घोषणा अहम मानी जा रही है।

गौरतलब है कि कर्नाटक में मानसून की अनियमितता के चलते कई जिलों में खरीफ फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य के जलाशयों में जलस्तर सामान्य से काफी कम बना हुआ है।

भाजपा पर परमेश्वर का पलटवार

उपमुख्यमंत्री ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष ने सूखे का आकलन करने के लिए टीमें तो बनाईं, लेकिन न तो विधानसभा में अपनी रिपोर्ट पर चर्चा की और न ही मुख्यमंत्री या राजस्व मंत्री को कोई रिपोर्ट या ज्ञापन सौंपा। परमेश्वर ने कहा कि विपक्ष को सूखे और पेयजल संकट जैसे असली मुद्दों पर सुझाव देने चाहिए, न कि विधानसभा में राजनीति करनी चाहिए। उन्होंने BJP पर पदयात्रा के ज़रिए राजनीतिक हथकंडे अपनाने का भी आरोप लगाया।

मंत्री नागेंद्र और कैबिनेट फेरबदल पर स्थिति

मंत्री बी. नागेंद्र के संभावित इस्तीफे से जुड़े सवालों पर परमेश्वर ने कहा कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बुधवार या गुरुवार को दिल्ली जाने की संभावना है और यदि वे कांग्रेस आलाकमान से मिलते हैं तो इस मुद्दे पर चर्चा हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी चार्जशीट में नागेंद्र का नाम नहीं है और सीबीआई जांच पर फैसला कैबिनेट में विचार-विमर्श के बाद लिया जाएगा। कैबिनेट फेरबदल की अटकलों को उन्होंने सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ऐसा कोई भी निर्णय पूरी तरह आलाकमान पर निर्भर करेगा।

सिद्धारमैया के बयान और आंतरिक आरक्षण

पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के उस बयान को परमेश्वर ने सही ठहराया जिसमें कहा गया था कि सिद्धारमैया ने कांग्रेस आलाकमान से परमेश्वर को डिप्टी सीएम बनाने का आग्रह किया था। परमेश्वर ने कहा कि जब सिद्धारमैया ने इस्तीफा दिया था, तब उन्होंने पहले परमेश्वर को मुख्यमंत्री और बाद में उपमुख्यमंत्री बनाने की सिफारिश की थी।

आंतरिक आरक्षण के सवाल पर परमेश्वर ने कहा कि राज्य सरकार वर्षों के संघर्ष के बाद यह व्यवस्था लागू कर चुकी है और यह अब एक तय मामला है।

बेंगलुरु के शहरी मुद्दे

पार्क की भूमि के 5 प्रतिशत हिस्से के प्रस्तावित उपयोग और सड़क किनारे वाहन पार्किंग पर शुल्क लगाने के प्रस्ताव पर परमेश्वर ने कहा कि दोनों मामलों में अंतिम निर्णय संबंधित निकायों की चर्चा के बाद लिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्क की ज़मीन का उपयोग सार्वजनिक हित के कार्यों के लिए होगा।

आने वाली कैबिनेट बैठक में सूखा घोषणा पर अंतिम निर्णय होने के बाद राज्य सरकार केंद्र से राहत पैकेज की माँग करने की स्थिति में होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि राहत राशि किसानों तक कितनी तेज़ी से पहुँचती है — कर्नाटक में पिछले सूखा-राहत चक्रों में यही सबसे बड़ी अड़चन रही है। परमेश्वर का भाजपा पर पलटवार राजनीतिक दृष्टि से समझ में आता है, लेकिन विपक्ष की रिपोर्टों को नज़रअंदाज़ करने की बजाय उन्हें सार्वजनिक करना पारदर्शिता की दृष्टि से बेहतर होता। नागेंद्र प्रकरण और कैबिनेट फेरबदल की अटकलें यह भी दर्शाती हैं कि सूखे जैसे गंभीर संकट के बीच सत्तारूढ़ गठबंधन की आंतरिक राजनीति समानांतर चल रही है — जो प्रशासनिक ध्यान बँटाने का जोखिम पैदा करती है।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक में 102 तालुकों में सूखे का ऐलान कब होगा?
डिप्टी सीएम जी. परमेश्वर के अनुसार, अगली कैबिनेट बैठक में जमीनी रिपोर्टों की समीक्षा के बाद सूखे की आधिकारिक घोषणा की जा सकती है। सरकार को सभी 102 तालुकों से रिपोर्टें मिल चुकी हैं।
कर्नाटक सूखा घोषणा से किसानों को क्या फायदा होगा?
आधिकारिक सूखा घोषणा के बाद राज्य सरकार केंद्र से राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (NDRF) के तहत वित्तीय सहायता माँग सकती है। इससे प्रभावित किसानों को फसल नुकसान का मुआवज़ा और पेयजल आपूर्ति के लिए आपातकालीन संसाधन मिल सकते हैं।
भाजपा और कांग्रेस के बीच कर्नाटक सूखे पर विवाद क्यों है?
परमेश्वर ने आरोप लगाया कि BJP ने सूखे का आकलन करने के लिए टीमें बनाईं, लेकिन न विधानसभा में रिपोर्ट पेश की और न सरकार को ज्ञापन दिया। उनका कहना है कि विपक्ष रचनात्मक सुझाव देने की बजाय राजनीति कर रहा है।
मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे पर क्या स्थिति है?
परमेश्वर ने कहा कि किसी भी चार्जशीट में नागेंद्र का नाम नहीं है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के दिल्ली दौरे पर कांग्रेस आलाकमान से इस विषय पर चर्चा हो सकती है और सीबीआई जांच पर फैसला कैबिनेट में होगा।
कर्नाटक में आंतरिक आरक्षण की क्या स्थिति है?
परमेश्वर ने बताया कि राज्य सरकार वर्षों के संघर्ष के बाद आंतरिक आरक्षण लागू कर चुकी है और यह अब एक तय मामला है। पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी असमानता दूर करने के लिए आरक्षण और आंतरिक आरक्षण को ज़रूरी बताया है।
राष्ट्र प्रेस
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