कर्नाटक में भीषण सूखा: 80% झीलें सूखीं, उपमुख्यमंत्री परमेश्वर बोले — लोगों को संकट नहीं झेलने देंगे
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक इस वर्ष गंभीर सूखे की चपेट में है — राज्य की लगभग 80 प्रतिशत झीलें सूख चुकी हैं और जलाशयों का जलस्तर खतरनाक रूप से नीचे आ गया है। उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने 25 जुलाई को चित्रदुर्ग में कहा कि राज्य सरकार स्थिति की गंभीरता से भली-भाँति परिचित है और किसी भी परिस्थिति में आम जनता को इस आपदा का बोझ नहीं उठाने दिया जाएगा। राज्य में अब तक 42 प्रतिशत से अधिक वर्षा की कमी दर्ज की गई है।
मुख्य घटनाक्रम
उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के साथ चित्रदुर्ग जिले के हिरियूर तालुक का दौरा कर सूखा प्रभावित क्षेत्रों का सीधे निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने मुरुघराजेंद्र बृहन्मठ के अनुभव मंटप सभागार में आयोजित बेंगलुरु राजस्व मंडल स्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित किया। बैठक में जिलेवार वर्षा की कमी, पेयजल प्रबंधन और राहत उपायों पर विस्तृत चर्चा हुई।
पेयजल संकट और सरकारी उपाय
परमेश्वर ने स्पष्ट किया कि जलाशयों में उपलब्ध जल का उपयोग अब केवल पेयजल के लिए किया जाएगा — कृषि कार्यों में इसका इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा। अधिकारियों को इस संबंध में सख्त निर्देश जारी किए जा चुके हैं। जल संकट से निपटने के लिए निजी बोरवेल किराये पर लिए जा रहे हैं और टैंकरों के माध्यम से पानी पहुँचाया जा रहा है। सरकार ने प्रत्येक जिले को ₹5 करोड़ पेयजल व्यवस्था के लिए जारी किए हैं, साथ ही प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के लिए ₹1 करोड़ की अतिरिक्त सहायता भी स्वीकृत की गई है।
कृषि पर असर और जिलेवार स्थिति
पूरे राज्य में सामान्य बुवाई का केवल 15 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो पाया है। जिलेवार स्थिति और भी चिंताजनक है — चिकलबल्लापुर में मात्र 2 प्रतिशत, कोलार में 1.5 से 2 प्रतिशत, चित्रदुर्ग में 3 से 4 प्रतिशत और कुछ क्षेत्रों में 10 प्रतिशत तक ही बुवाई संभव हो सकी है। बेंगलुरु राजस्व मंडल में वर्षा की कमी का आँकड़ा भी चौंकाने वाला है — बेंगलुरु शहरी में 28 प्रतिशत, बेंगलुरु ग्रामीण में 18 प्रतिशत, रामनगर में 24 प्रतिशत, कोलार में 36 प्रतिशत, चिक्कबल्लापुर में 28 प्रतिशत, तुमकुरु में 18 प्रतिशत, चित्रदुर्ग में 28 प्रतिशत तथा दावणगेरे और शिवमोग्गा में 48-48 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। पूरे बेंगलुरु राजस्व मंडल में औसतन 37 प्रतिशत वर्षा की कमी रही है।
सुपर एल-नीनो और वैश्विक संदर्भ
परमेश्वर ने बताया कि प्रशांत महासागर के सतही तापमान में असामान्य वृद्धि के कारण सुपर एल-नीनो की स्थिति बनी है, जिसने मानसून को बाधित किया है। उन्होंने कहा कि पिछले 75 वर्षों में 25 बार एल-नीनो की स्थिति बनी, लेकिन इस बार समुद्र के तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की असाधारण वृद्धि हुई है। यह ऐसे समय में आया है जब दुनिया के लगभग आधे हिस्से में सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है — यूरोप भी भीषण गर्मी और सूखे की मार झेल रहा है।
पलायन, पशुधन और केंद्र से माँग
बागलकोट, विजयपुरा, कोप्पल, बल्लारी और यादगिर जिलों से लोगों के पलायन की खबरें सामने आई हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि प्रभावित गाँवों में सरकारी योजनाओं के तहत तत्काल रोजगार उपलब्ध कराया जाए। पशुधन के लिए अगले 30 से 40 सप्ताह तक पर्याप्त चारा उपलब्ध होने का दावा किया गया है, और जहाँ पानी उपलब्ध है वहाँ किसानों को चारा उत्पादन के लिए बीज किट वितरित करने के निर्देश दिए गए हैं। परमेश्वर ने बताया कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और उन्होंने स्वयं प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री तथा केंद्रीय कृषि मंत्री को पत्र लिखकर सूखे की स्थिति से अवगत कराया है। उन्होंने केंद्र सरकार से सूखा घोषित करने के लिए निर्धारित 10 मानकों में ढील देने की माँग की है। गौरतलब है कि 15 अगस्त से पहले केंद्र को सूखा संबंधी ज्ञापन नहीं भेजा जा सकता — यदि अगस्त में पर्याप्त बारिश होती है तो स्थिति बदल सकती है, इसलिए अंतिम रिपोर्ट भेजने में कुछ समय लग सकता है।