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कर्नाटक सूखा संकट: उपमुख्यमंत्री परमेश्वर बोले — कैबिनेट विस्तार के बावजूद राज्य सरकार पूरी तरह सतर्क

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कर्नाटक सूखा संकट: उपमुख्यमंत्री परमेश्वर बोले — कैबिनेट विस्तार के बावजूद राज्य सरकार पूरी तरह सतर्क

सारांश

कैबिनेट विस्तार पर विपक्षी निशाने के बीच उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने साफ किया — कर्नाटक सरकार सूखे से आँखें नहीं मूँद रही। ₹324 करोड़ जारी, 16 जिलों की समीक्षा हो चुकी और रविवार को सभी जिलाधिकारियों के साथ बैठक तय है।

मुख्य बातें

परमेश्वर ने 18 जुलाई को कहा कि कर्नाटक सरकार कैबिनेट विस्तार और सूखा प्रबंधन दोनों एक साथ संभाल रही है।
सरकार ने पीने के पानी की जरूरतों के लिए प्रत्येक जिले को ₹5 करोड़ की दर से कुल ₹324 करोड़ जारी किए हैं।
डिप्टी कमिश्नरों के पीडी खातों में ₹600–700 करोड़ स्थानीय जरूरतों के लिए उपलब्ध हैं।
बेलागवी और कलबुर्गी डिवीजन के 16 जिलों की समीक्षा बैठकें मुख्यमंत्री शिवकुमार और परमेश्वर पहले ही कर चुके हैं।
रविवार को सभी डिप्टी कमिश्नरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए स्थिति की समीक्षा और निर्देश जारी किए जाएंगे।
PM मोदी और केंद्रीय कृषि मंत्री को पत्र लिखकर सूखा घोषणा के नियमों में ढील और केंद्रीय सहायता की माँग की गई है।

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने शनिवार, 18 जुलाई को बेंगलुरु में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार प्रस्तावित कैबिनेट विस्तार की प्रक्रिया के साथ-साथ सूखे की गंभीर स्थिति से निपटने में पूरी तरह सक्षम है। उन्होंने विपक्ष और मीडिया के उस आरोप को खारिज किया जिसमें कहा जा रहा था कि सत्तारूढ़ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस / INC) सरकार राजनीतिक गतिविधियों में व्यस्त रहते हुए शासन की अनदेखी कर रही है।

मुख्य घटनाक्रम

पत्रकारों से बात करते हुए परमेश्वर ने कहा कि मीडिया और विपक्ष का रुख विरोधाभासी है। उन्होंने कहा, 'एक तरफ तो कहा जाता है कि सरकार बिना पूरी कैबिनेट के काम कर रही है, और दूसरी तरफ जब विस्तार किया जा रहा है तो यह कहा जाता है कि कांग्रेस राजनीतिक गतिविधियों में लगी है जबकि राज्य सूखे का सामना कर रहा है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक के कई जिलों में जल संकट और फसल नुकसान की खबरें सामने आ रही हैं।

सूखा प्रबंधन पर सरकारी कदम

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और उन्होंने बेलागवी डिवीजन के 8 जिलों और कलबुर्गी डिवीजन के 8 जिलों की स्थिति की समीक्षा बैठकें पहले ही कर ली हैं। परमेश्वर ने यह भी कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से अपने गृह जिले तुमकुरु और चित्रदुर्ग में जाकर हालात का जायजा लिया है। रविवार को सभी डिप्टी कमिश्नरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस बुलाई गई है, जिसमें स्थिति का आकलन कर आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे।

वित्तीय प्रावधान

पानी की कमी से निपटने के लिए राज्य सरकार ने हर जिले को ₹5 करोड़ की दर से कुल ₹324 करोड़ पीने के पानी की जरूरतों के लिए जारी किए हैं। इसके अतिरिक्त, डिप्टी कमिश्नरों के पीडी खातों में ₹600 करोड़ से ₹700 करोड़ उपलब्ध हैं, जिन्हें स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार खर्च करने के निर्देश दिए गए हैं। गौरतलब है कि यह राशि तत्काल राहत के लिए है और दीर्घकालिक सूखा राहत पैकेज अलग से विचाराधीन है।

केंद्र से सहायता की मांग

परमेश्वर ने बताया कि मुख्यमंत्री शिवकुमार और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय कृषि मंत्री को पत्र लिखकर सूखा घोषित करने के नियमों में ढील देने और केंद्रीय सहायता की माँग की है। उन्होंने विपक्ष को भी सीधे संदेश दिया — 'विपक्ष यह सुनिश्चित करे कि केंद्र से फंड जारी हो। हम खाली नहीं बैठे हैं; हम जिम्मेदारी से काम कर रहे हैं।'

आगे की राह

मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और डिप्टी कमिश्नर स्थिति पर निरंतर नजर रखेंगे। रविवार की वीडियो कॉन्फ्रेंस के बाद राज्य सरकार आगे की रणनीति तय करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्र की त्वरित प्रतिक्रिया और नियमों में ढील इस संकट से उबरने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि ₹324 करोड़ की यह राशि उन जिलों के लिए कितनी पर्याप्त है जहाँ फसलें पहले ही बर्बाद हो चुकी हैं। केंद्र से सूखा राहत नियमों में ढील की माँग बताती है कि राज्य अपने संसाधनों की सीमा पहचान चुका है। गौरतलब है कि कर्नाटक पिछले कई वर्षों से मानसून की अनिश्चितता झेल रहा है, और हर बार केंद्र-राज्य के बीच राहत राशि को लेकर राजनीतिक खींचतान देखने को मिलती है। रविवार की वीडियो कॉन्फ्रेंस और उसके बाद के ठोस कदम ही तय करेंगे कि यह सरकारी सक्रियता वास्तविक है या महज़ छवि-प्रबंधन।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक में सूखे की स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
राज्य सरकार ने प्रत्येक जिले को ₹5 करोड़ की दर से कुल ₹324 करोड़ पीने के पानी की जरूरतों के लिए जारी किए हैं। इसके अलावा डिप्टी कमिश्नरों के पीडी खातों में ₹600–700 करोड़ स्थानीय जरूरतों के लिए उपलब्ध हैं।
उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने विपक्ष के आरोपों पर क्या कहा?
परमेश्वर ने कहा कि मीडिया और विपक्ष का रुख विरोधाभासी है — पहले कैबिनेट पूरी न होने पर सवाल, और जब विस्तार हो रहा है तो राजनीतिक व्यस्तता का आरोप। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार एक साथ दोनों मोर्चों पर काम करने में सक्षम है।
कर्नाटक सरकार ने केंद्र से क्या माँग की है?
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने PM मोदी और केंद्रीय कृषि मंत्री को पत्र लिखकर सूखा घोषित करने के नियमों में ढील और केंद्रीय वित्तीय सहायता की माँग की है।
कर्नाटक के किन जिलों में सूखे की समीक्षा हो चुकी है?
बेलागवी डिवीजन के 8 जिलों और कलबुर्गी डिवीजन के 8 जिलों की समीक्षा बैठकें मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पहले ही कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त परमेश्वर ने व्यक्तिगत रूप से तुमकुरु और चित्रदुर्ग जिलों में स्थिति का जायजा लिया है।
सूखे की समीक्षा के लिए अगली बैठक कब होगी?
रविवार को सभी डिप्टी कमिश्नरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी, जिसमें स्थिति का आकलन कर आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे। मुख्य कार्यकारी अधिकारी और डिप्टी कमिश्नर निरंतर निगरानी रखेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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