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कर्नाटक सूखा संकट: हर जिले को ₹5 करोड़, उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने बेलगावी में दी चेतावनी

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कर्नाटक सूखा संकट: हर जिले को ₹5 करोड़, उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने बेलगावी में दी चेतावनी

सारांश

जून में कम बारिश और गिरते भूजल स्तर के बीच कर्नाटक सरकार ने हर जिले को ₹5 करोड़ देने का फैसला किया है। उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने बेलगावी में चेताया — अगर बारिश नहीं हुई तो हालात गंभीर होंगे। साथ ही केंद्र पर माँगी राहत का 10% भी न देने का आरोप लगाया।

मुख्य बातें

कर्नाटक सरकार ने पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक जिले को ₹5 करोड़ आवंटित करने की घोषणा की।
परमेश्वर ने 1 जुलाई 2026 को बेलगावी में कहा — बारिश नहीं हुई तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
बेलगावी जिले में जून 2026 में सामान्य से कम वर्षा के कारण भूजल स्तर में गिरावट आई है।
सूखा घोषणा और क्लाउड सीडिंग पर फिलहाल कोई निर्णय नहीं; स्थिति के अनुसार फैसला होगा।
परमेश्वर ने केंद्र पर आरोप लगाया — राज्य की रिपोर्ट में माँगी राहत का 10% भी जारी नहीं किया।
मंदिर संपत्तियों पर अतिक्रमण हटाने और राजस्व कार्यों में तेज़ी लाने के भी निर्देश जारी।

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने 1 जुलाई 2026 को बेलगावी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्पष्ट किया कि यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई, तो राज्य में स्थिति गंभीर हो सकती है। इससे निपटने के लिए राज्य सरकार ने निर्बाध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु प्रत्येक जिले को ₹5 करोड़ आवंटित करने की घोषणा की है, जिसे संबंधित उपायुक्तों के माध्यम से लागू किया जाएगा।

बेलगावी में सूखे जैसे हालात

परमेश्वर ने बताया कि बेलगावी जिले में जून 2026 में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है, जिसके चलते भूजल स्तर में उल्लेखनीय गिरावट आई है और पेयजल की कमी की आशंका बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस क्षेत्र की समस्याओं की समीक्षा करेगी और पेयजल संकट तथा फसल नुकसान दोनों से निपटने के लिए ठोस उपाय किए जाएंगे।

उन्होंने कहा, 'हम एहतियाती उपायों पर चर्चा करेंगे और पर्याप्त पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करेंगे।' तैयार की गई कार्य योजना को जिला स्तर पर उपायुक्त लागू करेंगे।

सूखा घोषणा और क्लाउड सीडिंग पर स्थिति

किसी तालुका या जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने पर परमेश्वर ने स्पष्ट किया कि इसके लिए स्थापित मानदंड हैं — जिनमें वर्षा की कमी, फसल का नुकसान और पानी की उपलब्धता जैसे कारक शामिल हैं। उन्होंने कहा, 'अभी तक सूखा घोषित करने पर कोई चर्चा नहीं हुई है। हम फिलहाल क्लाउड सीडिंग पर भी विचार नहीं कर रहे हैं — स्थिति के अनुसार निर्णय लिया जाएगा।'

केंद्र पर निराशा, राहत का 10% भी नहीं मिला

उपमुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के असहयोग पर खुलकर निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा, 'हम इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं करना चाहते, लेकिन केंद्र ने हमारी रिपोर्ट में माँगी गई राहत का 10 प्रतिशत भी जारी नहीं किया है।' उन्होंने यह भी कहा कि जब भी ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है, राज्य सरकार इसे केंद्र के संज्ञान में लाती है।

राजस्व और धार्मिक बंदोबस्ती विभाग पर निर्देश

परमेश्वर ने राजस्व विभाग की पहलों का उल्लेख करते हुए बताया कि पौठी खाता, स्वामित्व विलेखों का वितरण, आकार बंध और राजस्व गाँवों की घोषणा जैसे कार्य पिछले तीन वर्षों से सफलतापूर्वक चल रहे हैं। सरकार ने इन्हें निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करने के लिए गति बढ़ाने का निर्णय लिया है।

धार्मिक बंदोबस्ती विभाग के संदर्भ में उन्होंने कहा कि श्रेणी A, B और C के मंदिरों की संपत्तियों पर अतिक्रमण पाए गए हैं। जिला अधिकारियों को सर्वेक्षण कर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए हैं। मंदिरों को प्राप्त धन का उपयोग सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बाद ही किया जाएगा और किसी भी अनावश्यक व्यय पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

खेल सुविधाओं पर भी ध्यान

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार खेल क्षेत्र को अधिक प्राथमिकता देगी। जिन जिला स्तरीय विद्यालयों और कॉलेजों में खेल सुविधाओं की कमी है, उन्हें खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त सहायता प्रदान की जाएगी। राज्य सरकार की यह घोषणाएँ ऐसे समय में आई हैं जब मानसून की अनिश्चितता ने कर्नाटक के कई जिलों में चिंता बढ़ा दी है और आगामी हफ्तों में वर्षा की स्थिति नीतिगत निर्णयों की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह दीर्घकालिक जल प्रबंधन नीति का विकल्प नहीं है। गौरतलब है कि कर्नाटक पिछले कई वर्षों से मानसून की अनिश्चितता से जूझ रहा है और हर बार संकट आने पर तदर्थ राहत ही मुख्य हथियार बनती है। केंद्र पर राहत न देने का आरोप राजनीतिक रूप से सुविधाजनक है, लेकिन असली सवाल यह है कि राज्य की अपनी जल-संचयन और भूजल पुनर्भरण योजनाएँ कहाँ हैं। बिना संरचनात्मक बदलाव के, हर सूखे के मौसम में यही चक्र दोहराता रहेगा।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक सरकार ने सूखे की आशंका में प्रत्येक जिले को कितनी राशि दी है?
कर्नाटक सरकार ने निर्बाध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक जिले को ₹5 करोड़ आवंटित किए हैं। यह राशि संबंधित उपायुक्तों द्वारा लागू की जाएगी।
क्या कर्नाटक में सूखा घोषित किया गया है?
नहीं, अभी तक किसी तालुका या जिले को आधिकारिक रूप से सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया गया है। उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने कहा कि सूखा घोषणा वर्षा की कमी, फसल नुकसान और पानी की उपलब्धता जैसे मानदंडों पर आधारित होती है और स्थिति के अनुसार निर्णय लिया जाएगा।
बेलगावी में जल संकट की स्थिति क्यों बनी है?
बेलगावी जिले में जून 2026 में सामान्य से कम वर्षा हुई है, जिसके कारण भूजल स्तर में गिरावट आई है। इससे पेयजल की कमी की आशंका बढ़ गई है और सूखे जैसे हालात बन रहे हैं।
केंद्र सरकार ने कर्नाटक को राहत क्यों नहीं दी?
उपमुख्यमंत्री परमेश्वर के अनुसार, केंद्र सरकार ने राज्य की रिपोर्ट में माँगी गई राहत का 10 प्रतिशत भी जारी नहीं किया है। हालाँकि उन्होंने कहा कि वे इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं करना चाहते।
क्या कर्नाटक सरकार क्लाउड सीडिंग का सहारा लेगी?
फिलहाल नहीं। उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने स्पष्ट किया कि सरकार अभी क्लाउड सीडिंग पर विचार नहीं कर रही है और स्थिति के अनुसार आगे का निर्णय लिया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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