कर्नाटक सूखा: राहत कार्यों के लिए ₹329 करोड़ तैयार, उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने दिया आश्वासन
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने 23 जुलाई को स्पष्ट किया कि राज्य सरकार मौजूदा सूखे की विकट स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सक्षम है और राहत कार्यों के लिए धन की कोई कमी नहीं है। बेंगलुरु स्थित अपने आधिकारिक आवास पर जन शिकायतें सुनने के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि पेयजल आपूर्ति और किसानों की सहायता के लिए पर्याप्त वित्तीय प्रबंध किए जा चुके हैं।
वित्तीय आवंटन और राहत की तैयारी
परमेश्वर ने बताया कि पेयजल संकट से निपटने के लिए प्रत्येक विधायक को ₹1 करोड़ और हर जिले को ₹5 करोड़ आवंटित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, पीडी (Personal Deposit) खातों में पहले से ₹329 करोड़ उपलब्ध हैं, जिन्हें आवश्यकता पड़ने पर तत्काल उपयोग में लाया जा सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसानों और आम नागरिकों को किसी भी स्तर पर असुविधा नहीं होने दी जाएगी।
समीक्षा बैठकों का कार्यक्रम
राज्य के कई हिस्सों में सूखे की समीक्षा बैठकें पूरी हो चुकी हैं। बेंगलुरु राजस्व मंडल की समीक्षा बैठक 25 जुलाई को मुख्यमंत्री और परमेश्वर के संयुक्त नेतृत्व में आयोजित होगी, जिसके बाद मैसूरु मंडल की बैठक होगी। सभी बैठकों के उपरांत राज्यभर की स्थिति का व्यापक आकलन कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
मनरेगा और पलायन रोकने की पहल
परमेश्वर ने बताया कि उन्होंने सभी जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (सीईओ) को निर्देश दिया है कि सूखा प्रभावित क्षेत्रों से पलायन रोकने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत तत्काल रोजगार उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि जिन जिलों का उन्होंने दौरा किया, वहाँ किसानों ने प्री-मानसून वर्षा के बाद बुआई की थी, लेकिन बाद में बारिश न होने से फसलें सूख गईं। किसान अब अगस्त में अच्छी बारिश की प्रतीक्षा में हैं ताकि दोबारा बुआई हो सके।
केंद्र से सहायता और 150 साल का सबसे भीषण सूखा
परमेश्वर ने बताया कि राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से भी आर्थिक सहायता माँगी है, लेकिन अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। उनके अनुसार, केंद्र सरकार आमतौर पर अगस्त में ऐसे प्रस्तावों पर विचार करती है और राज्य सरकार उस समय अपना ज्ञापन सौंपेगी। गौरतलब है कि बुधवार को उन्होंने कहा था कि कर्नाटक पिछले 150 वर्षों के सबसे भीषण सूखे का सामना कर रहा है, जिसमें सामान्य से काफी कम वर्षा के कारण 40 प्रतिशत से भी कम बुआई हो सकी है।
नीट विवाद और राजनीतिक मोर्चे पर बयान
नीट प्रश्नपत्र लीक मामले पर परमेश्वर ने कहा कि यह लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है और संसद में इस पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पहली परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करने वाले कई छात्रों के पुनर्परीक्षा में कम अंक आए हैं। उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वास्तव में छात्रों के साथ खड़े हैं, तो केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाया जाना चाहिए और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। परमेश्वर ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ कथित व्यवहार की भी आलोचना की और कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार देता है। कर्नाटक में जारी राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों पर उन्होंने कहा कि यदि भारतीय जनता पार्टी (BJP) राजभवन जाकर शिकायत करना चाहती है, तो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) को इससे कोई आपत्ति नहीं है। आने वाले हफ्तों में केंद्र की प्रतिक्रिया और मानसून की स्थिति यह तय करेगी कि सूखे की मार झेल रहे किसानों को कितनी राहत मिल पाती है।