29 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कर्नाटक सूखा राहत: डिप्टी सीएम परमेश्वर ने कहा — सितंबर के पहले हफ्ते तक केंद्र को सौंपा जाएगा ज्ञापन

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कर्नाटक सूखा राहत: डिप्टी सीएम परमेश्वर ने कहा — सितंबर के पहले हफ्ते तक केंद्र को सौंपा जाएगा ज्ञापन

सारांश

कर्नाटक ने 101 तालुकों को सूखा-प्रभावित घोषित करते हुए केंद्र को सितंबर के पहले हफ्ते तक ज्ञापन सौंपने की तैयारी की है। डिप्टी सीएम परमेश्वर ने SDRF से ₹1,200 करोड़ तुरंत जारी करने की माँग की — और 2023 की तरह सुप्रीम कोर्ट तक जाने की नौबत न आए, यही सरकार की कोशिश है।

मुख्य बातें

कर्नाटक ने 101 तालुकों को सूखा-प्रभावित घोषित किया; अगले 15 दिनों में सूची और बढ़ सकती है।
परमेश्वर ने कहा — अगस्त के अंत या सितंबर के पहले हफ्ते तक केंद्र को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
केंद्र ने SDRF के तहत ₹1,200 करोड़ देने का निर्णय किया है; राज्य ने तत्काल जारी करने की अपील की।
2023 के सूखे में राज्य को ₹39,000 करोड़ का नुकसान हुआ था; केवल ₹3,500 करोड़ सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मिले थे।
राशि मिलते ही 1 सप्ताह से 10 दिनों के भीतर किसानों को मुआवजा वितरित करने की योजना।

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने 29 अगस्त को मैसूर में मीडिया से बात करते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार अगस्त के अंत या सितंबर के पहले सप्ताह तक सूखे से राहत की माँग को लेकर केंद्र सरकार को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपेगी। राज्य ने अब तक 101 तालुकों को सूखा-प्रभावित घोषित किया है और अगले 15 दिनों तक स्थिति की निरंतर निगरानी जारी रहेगी।

ज्ञापन की तैयारी और आकलन प्रक्रिया

परमेश्वर ने बताया कि फसलों के नुकसान का आकलन किया जा रहा है और उसी के आधार पर ज्ञापन तैयार होगा। उन्होंने कहा, 'हम इस महीने के आखिर तक या सितंबर के पहले हफ्ते में केंद्र को सूखे से जुड़ा ज्ञापन सौंपेंगे। इसके बाद केंद्रीय टीमें राज्य का दौरा करके सर्वे करेंगी और फिर सूखे से राहत के लिए मदद जारी की जाएगी।' उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आकलन के आधार पर सूखा-प्रभावित सूची में और तालुक जोड़े जा सकते हैं।

किसानों के लिए प्राथमिकताएँ

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को प्रति एकड़ मुआवजे पर शीघ्र निर्णय लेगी। उन्होंने पेयजल आपूर्ति, पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था और पलायन रोकने को सरकार की तीन सर्वोच्च प्राथमिकताएँ बताया। परमेश्वर के अनुसार, इन दिशाओं में कदम पहले ही उठाए जा चुके हैं।

2023 के सूखे का संदर्भ और केंद्र से माँग

यह ऐसे समय में आया है जब 2023 के सूखे की कड़वी यादें अभी भी ताज़ा हैं। परमेश्वर ने याद दिलाया कि उस वर्ष राज्य को अनुमानित ₹39,000 करोड़ का नुकसान हुआ था और सरकार ने ₹18,000 करोड़ की राहत माँगी थी। उन्होंने कहा, 'हम दिल्ली गए और विरोध प्रदर्शन किया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद ₹3,500 करोड़ जारी किए गए। इस बार ऐसी स्थिति नहीं बननी चाहिए।'

गौरतलब है कि केंद्र ने इस बार राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) के तहत ₹1,200 करोड़ देने का निर्णय किया है। परमेश्वर ने केंद्र से यह राशि तत्काल जारी करने का आग्रह किया है। उन्होंने बताया कि SDRF में राज्य और केंद्र का योगदान 25:75 के अनुपात में होता है और यह राशि मिलते ही एक सप्ताह से 10 दिनों के भीतर किसानों तक पहुँचाई जाएगी।

बी. नागेंद्र के इस्तीफे पर परमेश्वर का पक्ष

मीडिया ने जब पूर्व मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे पर सवाल उठाए, तो परमेश्वर ने कहा कि नागेंद्र ने कोई अपराध नहीं किया और सीबीआई या ईडी की चार्जशीट में उनका नाम शामिल नहीं था। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर आरोप लगाया कि उसने इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देकर नागेंद्र को इस्तीफा देने पर मजबूर किया। परमेश्वर ने कहा, 'पार्टी के एक अनुशासित सिपाही के तौर पर नागेंद्र ने इस्तीफा दे दिया ताकि सरकार को शर्मिंदगी न हो। उन्हें इस्तीफा देने की कोई ज़रूरत नहीं थी।'

उन्होंने विपक्ष को चुनौती दी कि अगर उनके पास दस्तावेज़ हैं तो वे उन्हें विधानसभा के सामने रखें। परमेश्वर ने पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के मौन रहने की बात को भी खारिज करते हुए कहा कि वे विधानसभा में उपस्थित थे और जल्द ही सक्रिय होंगे।

आगे क्या होगा

ज्ञापन सौंपे जाने के बाद केंद्रीय दल राज्य का दौरा करेगा और स्वतंत्र सर्वेक्षण के आधार पर राहत राशि तय की जाएगी। राज्य सरकार उम्मीद कर रही है कि इस बार 2023 जैसी देरी नहीं होगी और SDRF की ₹1,200 करोड़ की राशि समय पर जारी होगी, जिससे सूखा-प्रभावित किसानों को त्वरित सहायता मिल सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ के नुकसान के बावजूद केवल ₹3,500 करोड़ मिलने की घटना यह बताती है कि केंद्र-राज्य आपदा राहत तंत्र में संरचनात्मक खामियाँ हैं — जो राजनीतिक समीकरणों के आगे किसानों की ज़रूरतों को पीछे धकेल देती हैं। इस बार परमेश्वर का स्वर पहले से अधिक सतर्क और दबावपूर्ण है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि SDRF की ₹1,200 करोड़ की राशि बिना न्यायालय के हस्तक्षेप के समय पर मिलती है या नहीं। 101 तालुकों की सूची अभी अधूरी है और 15 दिनों में और विस्तार की संभावना है — यानी ज्ञापन की राशि और माँग दोनों बदल सकती हैं, जो केंद्रीय दल के दौरे से पहले राज्य की स्थिति को और पेचीदा बना सकती है।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक सरकार केंद्र को सूखे से जुड़ा ज्ञापन कब सौंपेगी?
डिप्टी सीएम जी. परमेश्वर के अनुसार, राज्य सरकार अगस्त के अंत तक या सितंबर के पहले सप्ताह तक केंद्र को सूखा राहत ज्ञापन सौंपेगी। फसलों के नुकसान का आकलन पूरा होने के बाद ज्ञापन को अंतिम रूप दिया जाएगा।
कर्नाटक में कितने तालुक सूखा-प्रभावित घोषित किए गए हैं?
अब तक 101 तालुकों को सूखा-प्रभावित घोषित किया गया है। अगले 15 दिनों तक स्थिति का आकलन जारी रहेगा और इस सूची में और तालुक जोड़े जा सकते हैं।
SDRF के तहत कर्नाटक को कितनी राशि मिलने की उम्मीद है?
केंद्र सरकार ने राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) के तहत ₹1,200 करोड़ देने का निर्णय किया है। परमेश्वर ने इस राशि को तत्काल जारी करने की माँग की है ताकि एक सप्ताह से 10 दिनों के भीतर किसानों को मुआवजा दिया जा सके।
2023 के सूखे में कर्नाटक को केंद्र से कितनी राहत मिली थी?
2023 में राज्य को अनुमानित ₹39,000 करोड़ का नुकसान हुआ था और ₹18,000 करोड़ की माँग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद केवल ₹3,500 करोड़ जारी किए गए — जो माँग का एक छोटा हिस्सा था।
सूखा राहत मिलने के बाद किसानों को मुआवजा कैसे मिलेगा?
परमेश्वर के अनुसार, SDRF की राशि मिलते ही एक सप्ताह से 10 दिनों के भीतर किसानों को प्रति एकड़ मुआवजा वितरित किया जाएगा। पेयजल, पशु चारा और पलायन रोकना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताएँ हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 21 घंटे पहले
  2. कल
  3. 2 दिन पहले
  4. 3 दिन पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 1 महीना पहले