नोएडा डूब क्षेत्र में 13 हजार अवैध बिजली कनेक्शन: CM योगी की फटकार के बाद विभाग सक्रिय
सारांश
मुख्य बातें
नोएडा के डूब क्षेत्र में 13 हजार से अधिक अवैध बिजली कनेक्शनों का मामला 29 अगस्त को शासन स्तर तक पहुँच गया, जब स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष यह मुद्दा उठाया। मुख्यमंत्री ने पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन आशीष गोयल को कड़ी फटकार लगाते हुए जवाब तलब किया, जिसके बाद बिजली विभाग ने तत्काल अभियान छेड़ दिया।
मुख्य घटनाक्रम
बिजली विभाग के आँकड़ों के अनुसार डूब क्षेत्र में केवल 3,800 वैध बिजली कनेक्शन हैं, जबकि कथित अवैध कनेक्शनों की संख्या 13 हजार तक आँकी जा रही है। विभाग की टीमें छिजारसी गाँव से अभियान शुरू करते हुए अवैध मीटर चिन्हित कर उन्हें बंद कर रही हैं और अवैध बिजली लाइनें काटी जा रही हैं। नोएडा के मुख्य अभियंता एसके जैन ने बताया कि कथित सिंडिकेट से जुड़े लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई भी की गई है।
कैसे खड़ा हुआ अवैध नेटवर्क
गौरतलब है कि डूब क्षेत्र में वर्ष 2017 से नए बिजली कनेक्शन देने पर पूर्ण प्रतिबंध लागू है। इसके बावजूद आरोप है कि एक निजी सिंडिकेट ने अवैध तरीके से मीटर लगाकर समानांतर बिजली आपूर्ति नेटवर्क खड़ा कर लिया। कथित तौर पर प्रत्येक कनेक्शन के लिए उपभोक्ताओं से न्यूनतम ₹1,000 प्रति माह वसूले जाने का अनुमान है। यदि 13 हजार कनेक्शनों को आधार बनाया जाए, तो इस नेटवर्क के जरिए हर महीने ₹1.5 करोड़ तक की वसूली होने की आशंका जताई जा रही है — हालाँकि इन आँकड़ों की आधिकारिक पुष्टि जाँच पूरी होने के बाद ही होगी।
विभागीय व्यवस्था पर सवाल
यह मामला इसलिए और गंभीर हो जाता है क्योंकि प्रतिबंध के सात वर्षों बाद भी इतने बड़े पैमाने पर अवैध नेटवर्क सक्रिय रहा और विभाग को इसकी जानकारी नहीं हुई। डूब क्षेत्र में खड़ी बड़ी इमारतों, फार्म हाउसों और अन्य निर्माणों तक बिजली पहुँचने पर भी सवाल उठ रहे हैं, जबकि इन निर्माणों की वैधता पहले से विवादास्पद रही है। आलोचकों का कहना है कि बिना विभागीय मिलीभगत के इतना बड़ा नेटवर्क वर्षों तक नहीं चल सकता था।
आगे क्या होगा
मुख्य अभियंता एसके जैन के अनुसार यह अभियान एक-दो दिन की कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रतिदिन जाँच जारी रखते हुए पूरे अवैध नेटवर्क को खत्म किया जाएगा। जाँच में यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि इस नेटवर्क में कौन-कौन शामिल हैं और अब तक कितनी राशि की वसूली हुई। यह प्रकरण उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग की निगरानी व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है और आने वाले दिनों में बड़े प्रशासनिक फेरबदल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।