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यूपी में बिजली कटौती के बीच 10% सरचार्ज: विद्युत उपभोक्ता परिषद ने की पुनर्विचार की मांग, दायर होगी याचिका

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यूपी में बिजली कटौती के बीच 10% सरचार्ज: विद्युत उपभोक्ता परिषद ने की पुनर्विचार की मांग, दायर होगी याचिका

सारांश

भीषण गर्मी में बिजली कटौती झेल रहे उत्तर प्रदेश के 3 करोड़ 73 लाख उपभोक्ताओं पर 10% सरचार्ज के ज़रिए ₹1,610 करोड़ की अतिरिक्त वसूली का बोझ डाला जा रहा है। विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इसे गलत बताते हुए नियामक आयोग में याचिका दायर करने की घोषणा की है।

मुख्य बातें

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने 10 प्रतिशत सरचार्ज को गलत बताते हुए पुनर्विचार की माँग की।
पावर कॉरपोरेशन ने ₹4.94 और ₹5.86 प्रति यूनिट की लागत के अंतर को आधार बनाकर ₹1,610 करोड़ की वसूली शुरू की।
बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का पहले से ₹51,000 करोड़ का सरप्लस होने का दावा।
प्रदेश में 3 करोड़ 73 लाख बिजली उपभोक्ता प्रभावित; विद्युत नियामक आयोग में याचिका दायर होगी।
मंत्री कैलाश सिंह राजपूत ने कहा उन्हें जून से प्रस्तावित बढ़ोतरी की जानकारी नहीं थी।

उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं पर लगाए गए 10 प्रतिशत अतिरिक्त सरचार्ज को लेकर विरोध तेज हो गया है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने 30 मई 2026 को इस फैसले को पूरी तरह गलत बताते हुए इस पर पुनर्विचार की माँग की है और विद्युत नियामक आयोग में याचिका दायर करने की घोषणा की है। उनका कहना है कि जब प्रदेश के लोगों को भीषण गर्मी में पर्याप्त बिजली भी नहीं मिल रही, तब उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना अनुचित है।

सरचार्ज का आधार और विवाद

विद्युत नियामक आयोग ने मार्च 2026 के लिए बिजली खरीद लागत ₹4.94 प्रति यूनिट स्वीकृत की थी। हालाँकि, पावर कॉरपोरेशन का दावा है कि वास्तविक खरीद लागत ₹5.86 प्रति यूनिट रही। इसी अंतर को आधार बनाकर प्रदेश के उपभोक्ताओं से ₹1,610 करोड़ की अतिरिक्त वसूली 10 प्रतिशत सरचार्ज के रूप में की जा रही है।

अवधेश कुमार वर्मा के अनुसार, पावर कॉरपोरेशन ने गलत आधार पर यह निर्णय लिया है और सोमवार को विद्युत नियामक आयोग में इस फैसले के विरुद्ध याचिका दायर की जाएगी।

उपभोक्ताओं की दोहरी मार

वर्मा ने बताया कि उपभोक्ताओं को पहले स्मार्ट मीटर की समस्याओं का सामना करना पड़ा और अब लगातार हो रही बिजली कटौती से जनता परेशान है। ऐसे समय में दरों में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ा देगी।

उन्होंने यह भी दावा किया कि बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का पहले से ही लगभग ₹51,000 करोड़ का सरप्लस निकलता है। ऐसे में नया आर्थिक बोझ डालना पूरी तरह अनुचित है।

मंत्री की प्रतिक्रिया

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश सिंह राजपूत ने कहा कि राज्य मंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद उन्होंने अपने गृह जिले कन्नौज, पड़ोसी जिले फर्रुखाबाद और अन्य स्थानों पर बिजली आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा के लिए तुरंत बैठक आयोजित की। उन्होंने कहा कि जो कमियाँ पहचानी गईं, उन्हें दूर किया गया और भीषण गर्मी में उपभोक्ताओं को राहत दिलाने के प्रयास किए गए।

उल्लेखनीय है कि मंत्री राजपूत ने स्वीकार किया कि उन्हें जून से बिजली बिलों में प्रस्तावित 10 प्रतिशत बढ़ोतरी से जुड़ी रिपोर्टों की जानकारी नहीं थी।

आम जनता पर असर

प्रदेश में करीब 3 करोड़ 73 लाख बिजली उपभोक्ता हैं। अवधेश कुमार वर्मा ने चेतावनी दी कि चुनावी माहौल में जनता की परेशानियों को नजरअंदाज करना किसी भी सरकार के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

आगे क्या होगा

वर्मा ने कहा कि आने वाले दिनों में बिजली संकट और गहरा सकता है, क्योंकि बिजली उत्पादन की स्थिति अभी संतोषजनक नहीं है। उपभोक्ता परिषद ने सरकार से समय रहते ठोस कदम उठाकर उपभोक्ताओं को राहत देने की अपील की है और हर स्तर पर संघर्ष जारी रखने की घोषणा की है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उत्तर प्रदेश में बिजली नियमन की पारदर्शिता पर एक बड़े सवाल का है — जब नियामक आयोग की स्वीकृत दर और पावर कॉरपोरेशन के दावे में इतना अंतर हो, तो जवाबदेही किसकी है? ₹51,000 करोड़ के कथित उपभोक्ता सरप्लस के बावजूद नई वसूली यह दर्शाती है कि राज्य की बिजली कंपनियाँ अपने वित्तीय दायित्व उपभोक्ताओं पर डालने की परंपरा से बाहर नहीं निकली हैं। भीषण गर्मी, लगातार कटौती और स्मार्ट मीटर की शिकायतों के बीच यह बढ़ोतरी जनाक्रोश को और भड़का सकती है — और चुनावी नजरिए से देखें तो सरकार के लिए यह सियासी जोखिम भी है।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तर प्रदेश में 10% बिजली सरचार्ज क्यों लगाया गया है?
पावर कॉरपोरेशन का दावा है कि मार्च 2026 में बिजली खरीद की वास्तविक लागत ₹5.86 प्रति यूनिट रही, जबकि विद्युत नियामक आयोग ने ₹4.94 प्रति यूनिट स्वीकृत की थी। इसी अंतर की भरपाई के लिए उपभोक्ताओं से 10% सरचार्ज के रूप में ₹1,610 करोड़ वसूले जा रहे हैं।
विद्युत उपभोक्ता परिषद इस सरचार्ज के खिलाफ क्या कदम उठा रही है?
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने विद्युत नियामक आयोग में याचिका दायर करने की घोषणा की है। उनका कहना है कि पावर कॉरपोरेशन ने गलत आधार पर यह निर्णय लिया है और इसे वापस लिया जाना चाहिए।
उत्तर प्रदेश में कितने बिजली उपभोक्ता इस सरचार्ज से प्रभावित होंगे?
प्रदेश में करीब 3 करोड़ 73 लाख बिजली उपभोक्ता हैं, जो इस 10% अतिरिक्त सरचार्ज से प्रभावित होंगे। यह बढ़ोतरी जून 2026 के बिलों से लागू होने की बात कही जा रही है।
क्या सरकार को इस सरचार्ज की जानकारी थी?
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश सिंह राजपूत ने कहा कि उन्हें जून से प्रस्तावित 10% बढ़ोतरी से जुड़ी रिपोर्टों की जानकारी नहीं थी। हालाँकि उन्होंने यह भी बताया कि बिजली आपूर्ति सुधारने के लिए समीक्षा बैठकें आयोजित की गई हैं।
उपभोक्ता परिषद का ₹51,000 करोड़ सरप्लस का दावा क्या है?
अवधेश कुमार वर्मा का दावा है कि बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का पहले से ही लगभग ₹51,000 करोड़ का सरप्लस बकाया है। उनके अनुसार, इस स्थिति में नया सरचार्ज लगाना पूरी तरह अनुचित और जनता पर दोहरी मार है।
राष्ट्र प्रेस
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