8 जुलाई 2026
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यूपी ऊर्जा मंत्री एके शर्मा का ऐलान: पावर सबस्टेशनों पर पीएसी तैनाती का कोई आदेश नहीं, जनसेवा है प्राथमिकता

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यूपी ऊर्जा मंत्री एके शर्मा का ऐलान: पावर सबस्टेशनों पर पीएसी तैनाती का कोई आदेश नहीं, जनसेवा है प्राथमिकता

सारांश

यूपी के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने पावर सबस्टेशनों पर पीएसी तैनाती की अटकलें खारिज कीं और सपा पर पलटवार किया — अखिलेश काल के 1.8 करोड़ उपभोक्ताओं के मुकाबले आज 3.7 करोड़ और 14,000 मेगावाट पीक डिमांड के मुकाबले अब 30,000 मेगावाट से ऊपर।

मुख्य बातें

ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने 23 मई 2026 को स्पष्ट किया कि संवेदनशील पावर सबस्टेशनों पर पीएसी तैनाती का कोई आदेश नहीं है।
उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या सपा काल के 1.8 करोड़ से बढ़कर अब 3.7 करोड़ हो गई है।
पीक डिमांड 14,000 मेगावाट से बढ़कर 30,000 मेगावाट से अधिक हो गई — ढाई गुना वृद्धि।
शर्मा ने विद्युत कर्मियों को लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी।
सपा के बिजली संकट के आरोपों पर मंत्री ने अखिलेश यादव के कार्यकाल में हफ्तों चली बिजली कटौती का हवाला दिया।

उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने 23 मई 2026 को स्पष्ट किया कि राज्य के संवेदनशील पावर सबस्टेशनों पर प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी (पीएसी) की तैनाती को लेकर कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। उन्होंने दो-टूक कहा कि विभाग की एकमात्र प्राथमिकता जन-कल्याण है और बिजली आपूर्ति को बेहतर बनाने के लिए दिन-रात काम जारी है।

पीएसी तैनाती पर मंत्री का स्पष्टीकरण

शर्मा ने कहा, 'संवेदनशील पावर सबस्टेशनों पर पीएसी की तैनाती की ऐसी कोई आवश्यकता नहीं दिखती। हमारी विद्युत सेवा जनता के लिए है और जनता की बेहतर सेवा के लिए व्यवस्थाओं को निरंतर सुधारा जा रहा है।' उनका यह बयान उन अटकलों के बीच आया है जिनमें सुरक्षाबलों की तैनाती की संभावना जताई जा रही थी।

सपा के आरोपों पर पलटवार

बिजली संकट को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) के हमलों पर मंत्री एके शर्मा ने सीधा जवाब दिया। उन्होंने कहा, 'अगर पिछले 10 वर्षों की बात करें, तो अखिलेश यादव की सरकार को सत्ता छोड़े नौ साल हो चुके हैं। इस दौरान न तो उत्तर प्रदेश में गाँवों की संख्या बढ़ी है और न ही राज्य का भौगोलिक क्षेत्रफल। फिर भी, उनके कार्यकाल की तुलना में हम दोगुनी संख्या में उपभोक्ताओं को बिजली दे रहे हैं।'

शर्मा के अनुसार सपा के शासनकाल में उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या 1.8 करोड़ थी, जो अब बढ़कर 3.7 करोड़ हो चुकी है। इसी तरह तब पीक डिमांड करीब 14,000 मेगावाट थी, जो अब 30,000 मेगावाट से अधिक हो गई है — यानी ढाई गुना अधिक बिजली की आपूर्ति।

गर्मी में बिजली चुनौती और प्रबंधन

मंत्री ने स्वीकार किया कि गर्मी के मौसम में बिजली की माँग तेज़ी से बढ़ती है, जिससे आपूर्ति में चुनौतियाँ आती हैं। हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि यह स्थिति केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है — कई अन्य राज्य भी ऐसी ही परिस्थितियों से जूझते हैं। शर्मा ने दावा किया कि वर्तमान सरकार इस माँग को 'प्रोफेशनली मैनेज' कर रही है, जबकि सपा के कार्यकाल में कई हफ्तों तक बिजली कटौती होती थी।

विद्युत कर्मियों को चेतावनी, जनता को आश्वासन

एके शर्मा ने विद्युत विभाग के कर्मचारियों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ तत्व सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं और ऐसे लोगों को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी। साथ ही जनता को आश्वस्त किया कि वे निरंतर उनकी सेवा में प्रयासरत हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में गर्मी के चलते बिजली की माँग अपने उच्चतम स्तर पर है और विपक्ष सरकार पर दबाव बना रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 से 30,000 मेगावाट पीक डिमांड — वास्तविक विस्तार को दर्शाते हैं, लेकिन विस्तार और गुणवत्ता एक ही नहीं हैं। असली सवाल यह है कि प्रति उपभोक्ता औसत आपूर्ति के घंटे और ग्रामीण-शहरी असमानता में क्या बदलाव आया है — जो आँकड़े सरकार ने साझा नहीं किए। पीएसी तैनाती की अटकलें और विद्युत कर्मियों को दी गई सार्वजनिक चेतावनी यह संकेत देती है कि जमीनी दबाव उतना नियंत्रित नहीं है जितना आधिकारिक बयान में दिखता है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी के पावर सबस्टेशनों पर पीएसी तैनाती को लेकर क्या स्थिति है?
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने स्पष्ट किया है कि संवेदनशील पावर सबस्टेशनों पर पीएसी तैनाती का कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि ऐसी कोई आवश्यकता नहीं दिखती और विभाग का ध्यान जनसेवा पर केंद्रित है।
उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या कितनी बढ़ी है?
एके शर्मा के अनुसार सपा शासनकाल में उत्तर प्रदेश में 1.8 करोड़ बिजली उपभोक्ता थे, जो अब बढ़कर 3.7 करोड़ हो गए हैं। इसी अवधि में पीक डिमांड 14,000 मेगावाट से बढ़कर 30,000 मेगावाट से अधिक हो गई है।
सपा के बिजली संकट के आरोपों पर सरकार का क्या जवाब है?
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने कहा कि अखिलेश यादव के कार्यकाल में कई हफ्तों तक बिजली कटौती होती थी। उन्होंने तर्क दिया कि वर्तमान सरकार ढाई गुना अधिक बिजली की माँग को प्रोफेशनली मैनेज कर रही है और गर्मी में बिजली की बढ़ती माँग एक सामान्य चुनौती है जो कई राज्यों में देखी जाती है।
विद्युत कर्मियों को मंत्री ने क्या चेतावनी दी?
एके शर्मा ने विद्युत कर्मियों से अपील की कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को बदनाम करने की कोशिश करने वालों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
उत्तर प्रदेश में गर्मी के मौसम में बिजली की स्थिति क्या है?
ऊर्जा मंत्री के अनुसार गर्मी के मौसम में बिजली की माँग बढ़ने से आपूर्ति में चुनौतियाँ आती हैं, लेकिन यह स्थिति केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है। सरकार का दावा है कि वह इस माँग को पेशेवर तरीके से प्रबंधित कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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