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दानिश अंसारी का अखिलेश पर पलटवार: 'सपा की नीति झूठ बोलो, बांटो और राज करो'

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दानिश अंसारी का अखिलेश पर पलटवार: 'सपा की नीति झूठ बोलो, बांटो और राज करो'

सारांश

भाजपा मंत्री दानिश अंसारी ने अखिलेश यादव के बिजली और फर्जी एनकाउंटर संबंधी आरोपों पर पलटवार करते हुए सपा को 'झूठ बोलो, बांटो और राज करो' की पार्टी बताया और 2012-17 के कार्यकाल की विफलताओं को आईना दिखाया।

मुख्य बातें

मंत्री दानिश आज़ाद अंसारी ने 27 मई 2026 को अखिलेश यादव पर तीखा पलटवार किया।
अंसारी ने सपा पर 'झूठ बोलो, बांटो और राज करो' की नीति अपनाने का आरोप लगाया।
2012-2017 के सपा कार्यकाल में केवल चुनिंदा वीआईपी जिलों में सुविधाएँ, बाकी जिलों में बिजली संकट रहा — अंसारी का दावा।
अखिलेश के फर्जी एनकाउंटर और पीडीए समुदाय पर निशाना साधने के आरोपों को भाजपा ने सिरे से खारिज किया।
शिवसेना नेता मनीषा कायंदे ने मुंबई से एनडीए की जीत का भरोसा जताया।

उत्तर प्रदेश के मंत्री दानिश आज़ाद अंसारी ने 27 मई 2026 को समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा पलटवार किया, जब अखिलेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार पर बिजली आपूर्ति की विफलता और राज्य में कथित फर्जी एनकाउंटर को लेकर सवाल उठाए। अंसारी ने सपा पर 'झूठ बोलो, बांटो और राज करो' की नीति पर चलने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी को अपने पिछले कार्यकाल का आईना देखना चाहिए।

मंत्री का सीधा हमला

मंत्री दानिश आज़ाद अंसारी ने कहा, 'समाजवादी पार्टी प्रमुख को अपने एयर-कंडीशन्ड कमरों से बाहर निकलकर उत्तर प्रदेश की वास्तविक स्थिति देखनी चाहिए।' उन्होंने याद दिलाया कि 2012 से 2017 के सपा कार्यकाल में केवल कुछ चुनिंदा जिलों को वीआईपी दर्जा मिला था, जबकि शेष जिलों में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव था।

अंसारी ने आरोप लगाया कि उस दौर में बिजली की आपूर्ति इतनी बदतर थी कि लोग कपड़े सुखाने के लिए बिजली के तारों का इस्तेमाल करने को मजबूर थे और बिजली केवल कुछ घंटों के लिए ही मिलती थी।

फर्जी एनकाउंटर के आरोप पर जवाब

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया था कि राज्य में सर्वाधिक फर्जी एनकाउंटर हो रहे हैं और पीडीए समुदाय — यानी पिछड़े, दलित व अल्पसंख्यक — विशेष रूप से निशाने पर हैं। इस पर अंसारी ने पलटवार करते हुए कहा, 'समाजवादी पार्टी के कार्यकाल को देखें तो पीडीए समुदाय के खिलाफ सबसे ज्यादा अपराध और अत्याचार उसी दौर में हुए थे।'

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार में कानून-व्यवस्था मज़बूत हुई है, जिससे अपराधी तत्व बौखलाए हुए हैं और इसीलिए इस तरह के बयान दिए जा रहे हैं।

सपा की तुलना अंग्रेजों से

अंसारी ने अपने बयान में तीखी भाषा अपनाते हुए कहा, '1947 से पहले अंग्रेज "बांटो और राज करो" की नीति अपनाते थे। आधुनिक भारत में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी झूठ और बंटवारे की उसी नीति पर चल रही हैं।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की सरगर्मियाँ तेज़ होती जा रही हैं।

शिवसेना की भी प्रतिक्रिया

मुंबई में शिवसेना नेता मनीषा कायंदे ने भी अखिलेश के बयानों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'पहले उत्तर प्रदेश में चुनाव हो जाने दीजिए। हमें पूरा विश्वास है कि राज्य में एनडीए की सरकार बनेगी। जो कोई भी इस तरह के बयान देना चाहता है, वह उसके बाद दे सकता है।' यह बयान संकेत देता है कि एनडीए घटक दल उत्तर प्रदेश की राजनीतिक लड़ाई में एकजुट नज़र आ रहे हैं।

आगे क्या

भाजपा और सपा के बीच यह वाकयुद्ध आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में और तेज़ होने की संभावना है। बिजली आपूर्ति, कानून-व्यवस्था और पीडीए समुदाय की राजनीति केंद्रीय मुद्दे बने रहेंगे, जिन पर दोनों दल अपनी-अपनी कथा गढ़ने में जुटे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

उनका खंडन तथ्यों के साथ क्यों नहीं आया। बिजली आपूर्ति के पुराने आँकड़े उछालना विपक्ष को कमज़ोर करने का प्रयास है, पर मौजूदा ज़मीनी हकीकत पर चुप्पी संदेह पैदा करती है। जैसे-जैसे 2027 के चुनाव नज़दीक आ रहे हैं, पीडीए की राजनीति केंद्रीय युद्धभूमि बनती जा रही है — और दोनों पक्ष अपनी-अपनी कथा को ही 'सच' साबित करने में जुटे हैं।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मंत्री दानिश अंसारी ने अखिलेश यादव पर क्या आरोप लगाए?
अंसारी ने अखिलेश यादव पर 'झूठ बोलो, बांटो और राज करो' की नीति अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 2012-2017 के सपा कार्यकाल में केवल वीआईपी जिलों में सुविधाएँ मिलती थीं और बाकी जिलों में बिजली संकट बना रहा।
अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर क्या आरोप लगाए थे?
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक फर्जी एनकाउंटर हो रहे हैं और पीडीए समुदाय — पिछड़े, दलित व अल्पसंख्यक — को विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने बिजली आपूर्ति की स्थिति पर भी सवाल उठाए।
पीडीए समुदाय क्या है और यह उत्तर प्रदेश की राजनीति में क्यों अहम है?
पीडीए का अर्थ है पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक — यह समाजवादी पार्टी का राजनीतिक फ्रेम है जो इन तीन वर्गों को एकजुट कर चुनावी गठबंधन बनाने की कोशिश करता है। उत्तर प्रदेश की आबादी में इनकी बड़ी हिस्सेदारी होने के कारण यह फ्रेम 2027 के विधानसभा चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
शिवसेना नेता मनीषा कायंदे ने क्या कहा?
शिवसेना नेता मनीषा कायंदे ने मुंबई से प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में चुनाव के बाद एनडीए की सरकार बनेगी और उसके बाद ही किसी को बयानबाज़ी करनी चाहिए। यह बयान एनडीए की एकजुटता का संकेत देता है।
यह विवाद उत्तर प्रदेश के आगामी चुनाव के संदर्भ में कितना अहम है?
2027 के विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में भाजपा और सपा के बीच बिजली, कानून-व्यवस्था और पीडीए राजनीति पर यह वाकयुद्ध चुनावी एजेंडा सेट करने की कोशिश का हिस्सा है। दोनों दल अपने-अपने कार्यकाल की उपलब्धियाँ और विपक्ष की विफलताएँ मतदाताओं के सामने रखने में जुटे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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