29 अगस्त 2026
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SC/ST आरक्षण पर NDA में दरार: चिराग पासवान ने मांझी-सुमन की 'क्रीमी लेयर' माँग को किया खारिज

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SC/ST आरक्षण पर NDA में दरार: चिराग पासवान ने मांझी-सुमन की 'क्रीमी लेयर' माँग को किया खारिज

सारांश

NDA के भीतर आरक्षण पर दरार खुलकर सामने आई — चिराग पासवान ने सहयोगी मांझी-सुमन की 'क्रीमी लेयर' माँग को संविधान-विरोधी बताया। बिहार चुनाव की पृष्ठभूमि में यह टकराव दलित राजनीति का अगला बड़ा मोर्चा बन सकता है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने 29 अगस्त को SC/ST आरक्षण में 'क्रीमी लेयर' की माँग का कड़ा विरोध किया।
पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी और राज्य मंत्री संतोष सुमन 'कोटा के भीतर कोटा' और उप-वर्गीकरण की माँग पर अड़े हैं।
चिराग ने कहा — आरक्षण आर्थिक नहीं, सामाजिक भेदभाव और अस्पृश्यता के निवारण के लिए है।
पासवान ने किसी भी बदलाव से पहले संसद में व्यापक संवैधानिक बहस की माँग की।
NDA के दोनों सहयोगी दल बिहार में दलित मतदाताओं के प्रतिनिधित्व का दावा करते हैं, लेकिन नीतिगत रुख परस्पर विरोधी है।

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने शनिवार, 29 अगस्त को पटना में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) आरक्षण में 'क्रीमी लेयर' प्रावधान लागू करने की माँग का कड़ा विरोध किया, जिससे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए। यह टकराव तब उभरा जब पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी और उनके पुत्र, राज्य मंत्री संतोष सुमन, आरक्षण में उप-वर्गीकरण और 'कोटा के भीतर कोटा' की माँग पर अड़े रहे।

मतभेद की जड़: क्या है विवाद

मांझी और संतोष सुमन का तर्क है कि SC/ST आरक्षण का लाभ सभी वंचित समुदायों तक समान रूप से नहीं पहुँचा है और इसलिए उप-वर्गीकरण ज़रूरी है। संतोष सुमन ने स्पष्ट किया कि उनकी माँग आरक्षण समाप्त करने की नहीं, बल्कि इसे अधिक न्यायसंगत बनाने की है, ताकि सबसे अधिक वंचित तबकों को उनका वाजिब हिस्सा मिल सके।

दूसरी ओर, चिराग पासवान ने इस माँग को सिरे से नकारते हुए कहा कि जो लोग SC/ST आरक्षण में 'क्रीमी लेयर' की वकालत कर रहे हैं, उन्हें पहले अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए। उनका कहना था कि आरक्षण की नींव आर्थिक स्थिति पर नहीं, बल्कि सदियों पुराने सामाजिक भेदभाव, बहिष्कार और अस्पृश्यता पर टिकी है — और इस मूल उद्देश्य को आर्थिक नज़रिए से देखना संविधान की भावना के विरुद्ध होगा।

चिराग की संसदीय बहस की माँग

पासवान ने ज़ोर देकर कहा कि आरक्षण ढाँचे में किसी भी बदलाव का प्रस्ताव अत्यंत संवेदनशील है और इसे संसद में व्यापक संवैधानिक बहस के ज़रिए उठाया जाना चाहिए, न कि राजनीतिक बयानबाज़ी के मंच से। उनके अनुसार, इस विषय पर जल्दबाज़ी में लिए गए किसी भी निर्णय से करोड़ों दलित और आदिवासी परिवारों के हितों को नुकसान पहुँच सकता है।

गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में SC/ST आरक्षण में उप-वर्गीकरण की संवैधानिक वैधता को स्वीकार किया है, जिसने इस बहस को नई ऊर्जा दी है। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ पृष्ठभूमि में शुरू हो चुकी हैं।

कांग्रेस पर निशाना

चिराग ने इस अवसर पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) को भी घेरा। उन्होंने तर्क दिया कि दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद यदि सामाजिक भेदभाव जारी है, तो कांग्रेस को भी इसके लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

बिहार की दलित राजनीति पर असर

यह असहमति बिहार की दलित राजनीति की जटिलता को उजागर करती है। चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) — दोनों NDA की सहयोगी हैं और दोनों खुद को हाशिए पर पड़े समुदायों का प्रतिनिधि बताती हैं। परंतु आरक्षण के भविष्य पर उनके दृष्टिकोण परस्पर विरोधी हैं।

आलोचकों का कहना है कि यह टकराव NDA की आंतरिक एकजुटता के लिए एक परीक्षा है — खासकर तब, जब गठबंधन दलित और अति-पिछड़े मतदाताओं को साधने की कोशिश में है। आने वाले हफ्तों में यह देखना अहम होगा कि क्या NDA के घटक दल इस संवेदनशील मुद्दे पर कोई साझा रुख अपना पाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसे मांझी-सुमन भरना चाहते हैं — और चिराग उसे बंद करना। असली सवाल यह है कि क्या BJP इस असहमति को चुनाव से पहले प्रबंधित कर पाएगी, या यह दरार बिहार में दलित-अति पिछड़े समीकरण को बिखेर देगी — जो 2024 में NDA की जीत की रीढ़ थी।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

SC/ST आरक्षण में 'क्रीमी लेयर' की माँग क्या है और इसे किसने उठाया?
पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी और राज्य मंत्री संतोष सुमन ने SC/ST आरक्षण में उप-वर्गीकरण और 'कोटा के भीतर कोटा' की माँग उठाई है। उनका तर्क है कि मौजूदा व्यवस्था में लाभ सभी वंचित समुदायों तक समान रूप से नहीं पहुँच रहा।
चिराग पासवान ने इस माँग का विरोध क्यों किया?
चिराग पासवान का कहना है कि SC/ST आरक्षण की नींव आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक भेदभाव और अस्पृश्यता के निवारण पर टिकी है। उन्होंने कहा कि 'क्रीमी लेयर' जैसे आर्थिक मापदंड लागू करने से आरक्षण का मूल उद्देश्य कमज़ोर हो जाएगा।
क्या NDA के भीतर यह मतभेद बिहार की राजनीति को प्रभावित करेंगे?
आलोचकों का कहना है कि यह टकराव बिहार में NDA की दलित-अति पिछड़े मतदाता आधार को प्रभावित कर सकता है। चिराग और मांझी-सुमन दोनों खुद को हाशिए पर पड़े समुदायों का प्रतिनिधि बताते हैं, लेकिन उनके नीतिगत रुख परस्पर विरोधी हैं।
चिराग पासवान ने आगे क्या माँग की?
चिराग पासवान ने माँग की कि आरक्षण ढाँचे में किसी भी बदलाव से पहले संसद में व्यापक संवैधानिक बहस होनी चाहिए। उन्होंने राजनीतिक बयानबाज़ी के बजाय इस संवेदनशील विषय पर विधायी मंच पर चर्चा को उचित बताया।
सर्वोच्च न्यायालय का SC/ST उप-वर्गीकरण पर क्या रुख है?
सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में SC/ST आरक्षण में उप-वर्गीकरण की संवैधानिक वैधता को स्वीकार किया है। इस फैसले ने मांझी-सुमन जैसे नेताओं की माँगों को नई राजनीतिक ऊर्जा दी है और NDA के भीतर इस बहस को तेज़ किया है।
राष्ट्र प्रेस
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