29 अगस्त 2026
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मौलाना साजिद रशीदी के बयान पर विहिप ने मांगी कड़ी कार्रवाई, BJP और सपा नेताओं ने भी जताई आपत्ति

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मौलाना साजिद रशीदी के बयान पर विहिप ने मांगी कड़ी कार्रवाई, BJP और सपा नेताओं ने भी जताई आपत्ति

सारांश

मौलाना साजिद रशीदी के इस्लामिक कानून और महिलाओं से जुड़े कथित बयान ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया। विहिप ने देश से निष्कासन तक की माँग की, जबकि BJP और सपा — दोनों ने संविधान को सर्वोच्च बताते हुए बयान की निंदा की।

मुख्य बातें

विहिप प्रवक्ता विनोद बंसल ने मौलाना साजिद रशीदी के कथित बयान पर कड़ी कार्रवाई की माँग की — 'जेल या सीमा के बाहर'।
BJP सांसद दिनेश शर्मा ने कहा कि नाबालिग विवाह अपराध का समाधान नहीं; कानून सभी के लिए समान है।
सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने बयान पर सीधी टिप्पणी से परहेज करते हुए संविधान की सर्वोच्चता दोहराई।
सपा नेता राम प्रसाद चौधरी ने बयान को 'गलत' बताया और धर्मनिरपेक्षता का हवाला दिया।
अब तक मौलाना रशीदी के विरुद्ध किसी औपचारिक कानूनी कार्रवाई की पुष्टि नहीं।

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के प्रवक्ता विनोद बंसल ने 29 अगस्त को मौलाना साजिद रशीदी के इस्लामिक कानून और महिलाओं से जुड़े कथित बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उनके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की माँग की। नई दिल्ली में विभिन्न दलों के नेताओं ने भी इस बयान को संविधान-विरोधी बताते हुए निंदा की।

विहिप की माँग

विनोद बंसल ने कहा कि ऐसी मानसिकता भारत में रहने लायक नहीं है। उनके अनुसार, मौलाना साजिद रशीदी न भारतीय संविधान को मानते हैं, न भारत के विचार को, और न ही भारतीय महिलाओं की स्वतंत्रता की बात करते हैं — बल्कि शरीयत लागू करना चाहते हैं। बंसल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऐसे व्यक्ति के लिए दो ही विकल्प हैं — 'या तो जेल के अंदर या फिर सीमा के बाहर।'

भाजपा सांसद की प्रतिक्रिया

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद दिनेश शर्मा ने कहा कि दुष्कर्म जैसे अपराधों को रोकने के लिए नाबालिग लड़कियों की शादी की सलाह देना किसी भी दृष्टि से समाधान नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत संविधान के अनुसार चलता है और आपराधिक मामलों में कानून सभी नागरिकों के लिए समान रूप से लागू होना चाहिए। शर्मा ने महिला सुरक्षा के मुद्दे पर राजनीति न करने की अपील करते हुए कहा कि अपराधी की पहचान उसके धर्म से नहीं, उसके अपराध से होनी चाहिए।

समाजवादी पार्टी का रुख

समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने कहा कि उनकी पार्टी मौलाना के बयान पर सीधी टिप्पणी नहीं करना चाहती, लेकिन देश बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के संविधान से चलता है और सभी को उस पर भरोसा रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी पर आरोप लगने पर न्यायपालिका के माध्यम से सुनवाई होती है और दोष सिद्ध होने पर कानून के अनुसार दंड मिलता है।

सपा नेता राम प्रसाद चौधरी ने मौलाना रशीदी के बयान को 'गलत' बताया और कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है जहाँ सभी धर्मों का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि किसी भी मुद्दे का समाधान संविधान और कानून के दायरे में रहकर ही निकाला जाना चाहिए।

व्यापक संदर्भ

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब महिला सुरक्षा और धार्मिक कानून बनाम संवैधानिक अधिकारों पर राष्ट्रीय बहस तेज़ हो रही है। गौरतलब है कि इस तरह के धार्मिक बयान अक्सर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं को जन्म देते हैं और संसदीय बहसों तक पहुँचते हैं। आलोचकों का कहना है कि ऐसे बयानों पर सभी दलों की स्पष्ट और एकजुट प्रतिक्रिया जरूरी है।

आगे की स्थिति

अब तक मौलाना साजिद रशीदी के खिलाफ किसी औपचारिक कानूनी कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है। विहिप की माँग के बाद यह देखना होगा कि सरकार और कानून-प्रवर्तन एजेंसियाँ इस मामले में क्या कदम उठाती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो खुद में एक राजनीतिक संकेत है। लेकिन मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह सवाल छोड़ देती है कि क्या ऐसे बयानों पर कानूनी कार्रवाई वास्तव में होती है या केवल राजनीतिक बयानबाज़ी तक सिमट जाती है। विहिप की 'जेल या सीमा के बाहर' वाली माँग कानूनी दृष्टि से अव्यावहारिक है, फिर भी यह मीडिया चक्र को नियंत्रित करती है। असली जवाबदेही तब होगी जब FIR दर्ज हो, अदालत में मामला चले — न कि केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस से।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना साजिद रशीदी ने क्या कहा था जिस पर विवाद हुआ?
मौलाना साजिद रशीदी ने कथित तौर पर इस्लामिक कानून और महिलाओं से जुड़ा एक बयान दिया, जिसे विभिन्न नेताओं ने संविधान-विरोधी और महिला अधिकारों के प्रतिकूल बताया। बयान के सटीक शब्दों को लेकर विभिन्न पक्षों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएँ दी हैं।
विहिप ने मौलाना रशीदी के खिलाफ क्या माँग की?
विहिप प्रवक्ता विनोद बंसल ने माँग की कि मौलाना रशीदी के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो — उनके अनुसार या तो जेल या देश से निष्कासन। उन्होंने कहा कि ऐसी मानसिकता भारत में रहने योग्य नहीं है।
BJP सांसद दिनेश शर्मा ने इस मामले पर क्या कहा?
BJP सांसद दिनेश शर्मा ने कहा कि दुष्कर्म जैसे अपराधों को रोकने के लिए नाबालिग लड़कियों की शादी की सलाह देना समाधान नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत संविधान के अनुसार चलता है और आपराधिक कानून सभी के लिए समान है।
समाजवादी पार्टी का इस विवाद पर क्या रुख है?
सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने बयान पर सीधी टिप्पणी से परहेज किया और संविधान की सर्वोच्चता पर जोर दिया। सपा नेता राम प्रसाद चौधरी ने बयान को 'गलत' बताया और कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है।
क्या मौलाना साजिद रशीदी के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई हुई है?
अब तक किसी औपचारिक कानूनी कार्रवाई या FIR की पुष्टि नहीं हुई है। विहिप और अन्य नेताओं की माँगों के बाद मामले की आगे की स्थिति स्पष्ट नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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