मौलाना साजिद रशीदी के बयान पर बवाल: महिला आयोग, भाजपा और वीएचपी ने की कड़ी निंदा
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी एक विवादित बयान के कारण देशभर में तीखी आलोचना के घेरे में आ गए हैं। 11 जुलाई को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में उन्होंने लड़कियों की जल्द शादी को बलात्कार की घटनाओं से जोड़ा, जिसके बाद उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने एकजुट होकर उनकी निंदा की।
विवादित बयान क्या था
मौलाना रशीदी ने सार्वजनिक मंच से कहा, 'देर से शादी होने की वजह से रेप की घटनाएं हो रही हैं। अगर अपनी बेटियों को सुरक्षित रखना चाहते हैं तो उनकी शादी जल्दी कर दीजिए।' यह बयान सामने आते ही सोशल और राजनीतिक मंचों पर तीखी प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया।
गौरतलब है कि भारत में महिलाओं की विवाह की न्यूनतम कानूनी उम्र 18 वर्ष है और सरकार इसे 21 वर्ष तक बढ़ाने पर विचार कर चुकी है। ऐसे में यह बयान न केवल सामाजिक रूप से बल्कि कानूनी दृष्टि से भी संवेदनशील माना जा रहा है।
महिला आयोग की प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान ने बयान की कड़ी निंदा करते हुए इसे 'संकीर्ण और महिला विरोधी सोच' का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, 'आज भारत की महिलाएं हर क्षेत्र में देश का नाम रोशन कर रही हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी भी महिला सशक्तीकरण की बात करते हैं और महिलाओं को पुरुषों के बराबर लाना चाहते हैं, क्योंकि देश की आधी आबादी महिलाएं हैं। अगर आज भी हम पीछे हैं, तो उसकी वजह ऐसी सोच रखने वाले लोग हैं।'
भाजपा और वीएचपी का विरोध
विश्व हिंदू परिषद (VHP) के प्रवक्ता विनोद बंसल ने बयान को 'कट्टर और संकीर्ण मानसिकता' का परिचायक बताया। उन्होंने कहा कि भारत में सभी महिलाओं को समान अधिकार प्राप्त हैं और ऐसे बयान देने वाले धार्मिक नेताओं को महिलाओं से तुरंत माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने राष्ट्रीय महिला आयोग से इस मामले में कार्रवाई की माँग भी की।
भाजपा नेता राम कदम ने कहा कि कुछ मौलाना केवल सुर्खियाँ बटोरने के लिए ऐसे बयान देते हैं और यह फैसला हर लड़की का व्यक्तिगत अधिकार है कि वह कब विवाह करे। भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने सीधे सवाल किया कि 'क्या मौलाना रेप जैसी जघन्य घटना को सही ठहराने की कोशिश कर रहे हैं?' उन्होंने ऐसी सोच रखने वाले लोगों के विरुद्ध तत्काल कानूनी कार्रवाई की माँग की।
धार्मिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
हनुमानगढ़ी के पुजारी देवेश आचार्य ने भी बयान को 'बेहद आपत्तिजनक' करार दिया। उन्होंने सभी धर्मों के लोगों से अपील की कि वे ऐसी सोच से दूर रहें और महिलाओं के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। यह ऐसे समय में आया है जब देश में महिला सुरक्षा और बाल विवाह के विरुद्ध जागरूकता अभियान जोर-शोर से चल रहे हैं।
आगे क्या होगा
आलोचकों का कहना है कि इस मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग को स्वतः संज्ञान लेना चाहिए। अब तक मौलाना साजिद रशीदी की ओर से कोई आधिकारिक सफाई या खेद प्रकट नहीं किया गया है। राजनीतिक दलों की माँग है कि संबंधित अधिकारी इस बयान की जाँच करें और आवश्यक कदम उठाएँ।