11 जुलाई 2026
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बिहार में पेपरलेस डिजिटल रजिस्ट्री लॉन्च: 75+ उम्र के बुजुर्गों को घर पर मिलेगी निबंधन सुविधा

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बिहार में पेपरलेस डिजिटल रजिस्ट्री लॉन्च: 75+ उम्र के बुजुर्गों को घर पर मिलेगी निबंधन सुविधा

सारांश

बिहार में डिजिटल शासन की नई इबारत लिखी गई — मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 75 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए घर पर निबंधन की सुविधा शुरू की, साथ ही जीआईएस तकनीक से भूमि विवादों पर लगाम लगाने की कोशिश। यह बिहार की प्रशासनिक सुधार यात्रा में एक उल्लेखनीय पड़ाव है।

मुख्य बातें

CM सम्राट चौधरी ने 11 जुलाई 2026 को हाजीपुर से पेपरलेस होम रजिस्ट्री डिजिटल सिस्टम लॉन्च किया।
75 वर्ष या उससे अधिक आयु के नागरिकों को अब घर पर निबंधन सुविधा मिलेगी; पहले यह सीमा 80 वर्ष थी।
चार नई सेवाएं शुरू — होम रजिस्ट्रेशन, ऑनलाइन भूमि जाँच, पेपरलेस निबंधन और जीआईएस आधारित स्थल निरीक्षण।
निबंधन दस्तावेज अब व्हाट्सएप और ई-मेल से भी उपलब्ध होंगे।
15 जुलाई 2026 से 213 नए डिग्री कॉलेज शुरू होंगे; एक करोड़ पेंशन लाभार्थियों को हर माह ₹1,100 DBT से मिल रहे हैं।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 11 जुलाई 2026 को वैशाली (हाजीपुर) जिला निबंधन कार्यालय से राज्य की पेपरलेस होम रजिस्ट्री डिजिटल सिस्टम का शुभारंभ किया। इस प्रणाली के तहत 75 वर्ष या उससे अधिक आयु के नागरिक अब घर बैठे ही संपत्ति का निबंधन करा सकेंगे, जिससे उन्हें सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

चार नई डिजिटल सेवाओं की शुरुआत

नई प्रणाली के अंतर्गत चार प्रमुख डिजिटल सेवाएं एक साथ लागू की गई हैं — होम रजिस्ट्रेशन, भूमि संबंधी ऑनलाइन जाँच, पेपरलेस निबंधन, और जीआईएस (GIS) तकनीक आधारित स्थल निरीक्षण। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में मोबाइल रजिस्ट्रेशन यूनिट वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जो बुजुर्गों के घर जाकर निबंधन सेवा प्रदान करेंगे।

कार्यक्रम के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 83 वर्षीय अवधेश कुमार के घर पर डिजिटल निबंधन प्रक्रिया का लाइव प्रदर्शन किया गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि यह प्रणाली वास्तव में कितनी सरल और सुलभ है।

आयु सीमा 80 से घटाकर 75 वर्ष की गई

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि पहले यह होम रजिस्ट्रेशन सुविधा 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के नागरिकों के लिए प्रस्तावित थी, लेकिन सरकार ने अब आयु सीमा घटाकर 75 वर्ष कर दी है। इस बदलाव से अधिक संख्या में वरिष्ठ नागरिक इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। उन्होंने इस व्यवस्था को डिजिटल बिहार की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।

भूमि विवाद और फर्जीवाड़े पर लगाम

नई व्यवस्था के तहत भूमि की खरीद-बिक्री से पहले जीआईएस तकनीक और ऑनलाइन सत्यापन के माध्यम से भूमि की वास्तविक स्थिति की जाँच की जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे फर्जीवाड़े और भूमि विवादों में उल्लेखनीय कमी आएगी और खरीदारों का हित सुरक्षित रहेगा। निबंधन से जुड़े दस्तावेज अब व्हाट्सएप और ई-मेल के माध्यम से भी उपलब्ध कराए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि निबंधन कार्यालयों में आने वाले नागरिकों के लिए सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। साथ ही राज्य से बाहर रहने वाले लोगों के लिए भी आवेदन के माध्यम से डिजिटल निबंधन की सुविधा विकसित करने पर जोर दिया गया।

अन्य प्रमुख घोषणाएँ

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बताया कि 15 जुलाई 2026 से राज्य के विभिन्न प्रखंडों में 213 नए डिग्री कॉलेजों की शुरुआत होगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च शिक्षा का विस्तार होगा। इसके अलावा, सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत प्रत्येक माह की 10 तारीख को लगभग एक करोड़ लाभार्थियों के बैंक खातों में ₹1,100 की राशि डीबीटी (DBT) के माध्यम से भेजी जा रही है।

कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, उप मुख्यमंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव, मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन मंत्री मदन सहनी, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री संजय कुमार सिंह, जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा सहित कई विधायक, जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। यह कदम बिहार में डिजिटल शासन की दिशा में एक नई शुरुआत का संकेत देता है, और आने वाले महीनों में इसके क्रियान्वयन की गति पर सबकी नजर रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में इसके क्रियान्वयन की होगी, जहाँ इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल साक्षरता अभी भी असमान है। मोबाइल रजिस्ट्रेशन यूनिट का विचार सराहनीय है, परंतु यह कितने जिलों तक और कितनी तेज़ी से पहुँचेगा, यह सवाल अनुत्तरित है। जीआईएस आधारित भूमि सत्यापन भूमि विवादों में कमी ला सकता है — बशर्ते डेटाबेस अद्यतन और विश्वसनीय हो, जो बिहार में ऐतिहासिक रूप से एक चुनौती रही है। नीति की घोषणा और जमीनी अमल के बीच की खाई पाटना ही इस सुधार की वास्तविक परीक्षा होगी।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार की पेपरलेस होम रजिस्ट्री डिजिटल सिस्टम क्या है?
यह बिहार सरकार की एक नई डिजिटल निबंधन प्रणाली है जिसे 11 जुलाई 2026 को हाजीपुर से लॉन्च किया गया। इसमें होम रजिस्ट्रेशन, ऑनलाइन भूमि जाँच, पेपरलेस निबंधन और जीआईएस आधारित स्थल निरीक्षण जैसी चार सेवाएं शामिल हैं।
75 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को घर पर निबंधन सुविधा कैसे मिलेगी?
सरकार ने मोबाइल रजिस्ट्रेशन यूनिट वाहन तैनात किए हैं जो बुजुर्गों के घर जाकर संपत्ति का निबंधन करेंगे। पहले यह सुविधा 80 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए थी, जिसे अब घटाकर 75 वर्ष कर दिया गया है।
जीआईएस तकनीक से भूमि निबंधन में क्या बदलाव आएगा?
जीआईएस (GIS) तकनीक और ऑनलाइन सत्यापन के माध्यम से भूमि की खरीद-बिक्री से पहले उसकी वास्तविक स्थिति की जाँच होगी। इससे फर्जीवाड़े और भूमि विवादों में कमी आने की उम्मीद है और खरीदारों का हित सुरक्षित रहेगा।
क्या राज्य से बाहर रहने वाले लोग भी इस डिजिटल निबंधन सुविधा का लाभ उठा सकते हैं?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को राज्य से बाहर रहने वाले लोगों के लिए भी आवेदन के माध्यम से डिजिटल निबंधन सुविधा विकसित करने के निर्देश दिए हैं। हालाँकि, इस सुविधा के लागू होने की तिथि की अभी घोषणा नहीं की गई है।
बिहार में 213 नए डिग्री कॉलेज कब से शुरू होंगे?
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि 15 जुलाई 2026 से राज्य के विभिन्न प्रखंडों में 213 नए डिग्री कॉलेज शुरू होंगे। इनका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च शिक्षा की पहुँच बढ़ाना है।
राष्ट्र प्रेस
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