क्या वारिस पठान के बयान पर मौलाना साजिद रशीदी का समर्थन उचित है?

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क्या वारिस पठान के बयान पर मौलाना साजिद रशीदी का समर्थन उचित है?

सारांश

क्या वारिस पठान के बयान पर मौलाना साजिद रशीदी का समर्थन उचित है? जानिए इस मुद्दे पर उनके विचार और राजनीतिक परिप्रेक्ष्य।

मुख्य बातें

मौलाना साजिद रशीदी ने वारिस पठान के बयान का समर्थन किया।
उन्होंने कहा कि हर दल को अपनी पार्टी के विस्तार का अधिकार है।
यूजीसी के नए नियमों पर चिंता व्यक्त की।
कांग्रेस पर मुसलमानों की आवाज उठाने का आरोप लगाया।
राजनीतिक संदर्भ में हरे रंग को लेकर विचार किए गए।

नई दिल्ली, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने एआईएमआईएम नेता वारिस पठान के महाराष्ट्र और देश को हरे रंग में बदलने वाले बयान का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि इसमें क्या गलत है, अगर कोई दल अपनी पार्टी के विस्तार की बात कर रहा है तो क्या गलत है।

नई दिल्ली में राष्ट्र प्रेस से बातचीत में मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि वारिस पठान के हरे रंग वाले बयान में बुराई क्या है। जो लोग कहते हैं कि राम को लाने वाले को लाएंगे, भगवा फहराएंगे, उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती है। अगर मुंबई और देश को हरा करने की बात हुई है तो दिक्कत क्या है। दिक्कत तब क्यों नहीं होती है जब मुसलमानों के प्रति नफरत फैलाने का काम किया जाता है।

उन्होंने पूछा, ऐसे गैर-संवैधानिक बयानों पर कोई बात नहीं होती है। किसी भी दल का अपना अधिकार है कि वह अपनी पार्टी का विस्तार करे, इसमें क्या गलत है? हरा रंग इस्लामी रंग नहीं है। कई लोग इसे इस्लाम से जोड़कर हमें बदनाम करने की कोशिश करते हैं।

यूजीसी के नए नियम को लेकर देशभर में सवर्ण समाज के लोग विरोध कर रहे हैं। मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि जिस तरह से ये कानून बनाए जाते हैं, उससे बेगुनाह लोग भी फंस सकते हैं। यह एक गंभीर मुद्दा है। मुझे लगता है कि यूजीसी के नए नियम का भी गलत इस्तेमाल होगा और बेगुनाह नौजवान इसमें फंस सकते हैं। ऐसा कानून सरकार को नहीं लाना चाहिए। अगर सरकार कानून ला रही है तो इसका अधिकार ऐसे हाथों में दिया जाए जो जायज को जायज ही कह दे। सवर्ण समाज भाजपा का कोर वोट बैंक भी है। इससे भाजपा के वोट बैंक पर भी प्रभाव पड़ेगा।

शंकराचार्य के अपमान से नाराज एक अधिकारी के इस्तीफे पर मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि अगर अधिकारी ने शंकराचार्य की वजह से इस्तीफा दिया है, तो मुझे लगता है कि यह गलत है क्योंकि शंकराचार्य ऐसे व्यक्ति हैं जो सत्ता पक्ष के खिलाफ हमेशा से विरोध करते रहे हैं। जब संगम पर पूरा संत समाज स्नान के दौरान पालकी का इस्तेमाल नहीं करता है तो शंकराचार्य पालकी का इस्तेमाल क्यों कर रहे थे, हालांकि कुछ संतों के साथ पुलिस ने जो बर्ताव किया, वह गलत था। शंकराचार्य का धरना देना गलत है और इस पर किसी भी जिला अधिकारी का इस्तीफा देना गलत है।

गणतंत्र दिवस को लेकर मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि हमारा देश तरक्की और विकास के रास्ते पर है। अगर हम देशभर में होने वाली नफरत की इक्का-दुक्का घटनाओं को नजरअंदाज कर दें तो देश बहुत ही पॉजिटिव दिशा में आगे बढ़ रहा है।

मुसलमानों के वोट का जिक्र करते हुए मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि मुझे एक बात समझ नहीं आती। कांग्रेस यह दावा क्यों करती है कि मुसलमान भाजपा से नाराज हैं? क्या मुसलमानों के पास किसी पार्टी को जिताने या हराने का कोई अधिकार है? भाजपा भी एक संवैधानिक पार्टी है। कांग्रेस से नाराज होकर कई मुसलमानों ने समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी या राष्ट्रीय जनता दल जैसी पार्टियों को वोट देना शुरू कर दिया है। कांग्रेस इसलिए परेशान है, क्योंकि अब भाजपा को 10-12 प्रतिशत मुस्लिम वोट मिल रहे हैं।

कांग्रेस अब मुसलमानों की आवाज को सड़कों पर नहीं उठाती है, जबकि पहले कभी कांग्रेस पार्टी ऐसा किया करती थी। आज की कांग्रेस सिर्फ बयानबाजी तक सीमित है। इससे कोई हल नहीं होने वाला है। राहुल गांधी कभी सड़कों पर उतरे, बयानबाजी से कुछ नहीं होता है। वोट चाहिए तो कांग्रेस को सड़कों पर मुसलमानों के लिए संघर्ष करना होगा। मुसलमानों के लिए विकल्प खुला है मुसलमान आजाद है, वह अपने अनुसार दूसरे दलों को वोट कर सकते हैं, भाजपा को भी वोट कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो कि देश की विविधता और राजनीतिक परिदृश्य की जटिलता को समझाती हैं।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या वारिस पठान का बयान विवादास्पद है?
हाँ, वारिस पठान का बयान कई लोगों के लिए विवादास्पद साबित हुआ है, खासकर राजनीतिक दृष्टिकोण से।
मौलाना साजिद रशीदी का इस पर क्या कहना है?
मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि किसी दल का अपनी पार्टी के विस्तार का अधिकार है और इसमें कोई बुराई नहीं है।
क्या हरा रंग इस्लाम से जुड़ा है?
मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि हरा रंग इस्लामी रंग नहीं है और इसे इस्लाम से जोड़कर बदनाम करने की कोशिश की जाती है।
क्या कांग्रेस मुसलमानों की आवाज उठाती है?
मौलाना साजिद रशीदी का कहना है कि कांग्रेस अब मुसलमानों की आवाज सड़कों पर नहीं उठाती, जबकि पहले ऐसा करती थी।
यूजीसी के नए नियमों पर मौलाना साजिद रशीदी की राय क्या है?
उन्होंने कहा कि यूजीसी के नए नियमों का गलत इस्तेमाल हो सकता है और इससे बेगुनाह लोग फंस सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस