11 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

रोहिणी पौधरोपण अभियान: विजेंद्र गुप्ता बोले — 'पेड़ लगाना नहीं, उसे बचाना है असली जिम्मेदारी'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
रोहिणी पौधरोपण अभियान: विजेंद्र गुप्ता बोले — 'पेड़ लगाना नहीं, उसे बचाना है असली जिम्मेदारी'

सारांश

दिल्ली विधानसभा स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने रोहिणी के DDA पार्क में 500 से अधिक जामुन के पौधे लगाकर एक अहम संदेश दिया — पेड़ लगाना नहीं, उन्हें जिंदा रखना असली चुनौती है। PM मोदी के 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान से जोड़ते हुए उन्होंने इसे जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया।

मुख्य बातें

दिल्ली विधानसभा स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने रोहिणी सेक्टर-14 के DDA डिस्ट्रिक्ट पार्क में पौधरोपण अभियान का शुभारंभ किया।
अभियान में 500 से अधिक जामुन के पौधे लगाए गए, स्थानीय प्रजातियों को प्राथमिकता दी गई।
गुप्ता ने कहा — पौधों के जीवित रहने की दर ही हरित अभियान की सफलता का असली पैमाना है।
कार्यक्रम दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और स्वयंसेवी संस्थाओं के संयुक्त सहयोग से आयोजित हुआ।
स्पीकर ने PM मोदी के 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान का उल्लेख करते हुए नागरिकों से सक्रिय भागीदारी की अपील की।

दिल्ली विधानसभा के स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने 12 जुलाई 2025 को रोहिणी के सेक्टर-14 स्थित डीडीए डिस्ट्रिक्ट पार्क (चित्रगुप्त पार्क) में एक बड़े पौधरोपण अभियान का शुभारंभ किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी हरित अभियान की सफलता का असली पैमाना लगाए गए पौधों की संख्या नहीं, बल्कि उनके जीवित रहने की दर है। यह कार्यक्रम दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से आयोजित किया।

मुख्य घटनाक्रम

इस अभियान के दौरान 500 से अधिक जामुन के पौधे लगाए गए, जिसमें स्थानीय प्रजातियों को प्राथमिकता दी गई। स्पीकर गुप्ता ने कार्यक्रम में उपस्थित नागरिकों को संबोधित करते हुए कहा, 'पौधा लगाना सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं है, यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक वादा है। अभियान की असली सफलता इस बात में नहीं कि कितने पेड़ लगाए गए, बल्कि इसमें है कि उनमें से कितने बचते और फलते-फूलते हैं।'

उन्होंने आगे कहा, 'पौधा लगाने और उसके एक स्वस्थ पेड़ बनने को सुनिश्चित करने के बीच बहुत बड़ा फर्क है। हमारी जिम्मेदारी पौधा लगाने के साथ खत्म नहीं होती, बल्कि वहीं से शुरू होती है।'

रोहिणी की हरियाली और जन-भागीदारी

गुप्ता ने कहा कि लगातार जन-भागीदारी और दीर्घकालिक पर्यावरणीय प्रयासों के कारण रोहिणी आज दिल्ली के सबसे हरे-भरे इलाकों में से एक बनकर उभरा है। उन्होंने इस डिस्ट्रिक्ट पार्क से शुरू हुए अभियान को एक जन-आंदोलन का रूप देने का आह्वान किया, ताकि यह हर घर तक पहुँचे और नागरिक दिल्ली की हरियाली को सक्रिय रूप से बचाने में भागीदार बनें।

उन्होंने निवासियों से अपने आसपास के पार्कों में पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित करने और पर्यावरण संरक्षण में व्यक्तिगत जिम्मेदारी लेने की अपील की।

'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान से जुड़ाव

स्पीकर गुप्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देशव्यापी अभियान 'एक पेड़ माँ के नाम' का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पहल हर नागरिक को अपनी माँ के सम्मान में एक पेड़ लगाने और उसकी देखभाल करने के लिए प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि ऐसे पेड़ की देखभाल करना प्रेम, आभार और स्मृति का एक स्थायी प्रतीक बन जाता है, जिससे पारिवारिक मूल्य और पर्यावरण के प्रति जागरूकता — दोनों एक साथ मजबूत होते हैं।

आगे की राह

गौरतलब है कि दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले शहर में पौधरोपण अभियानों की संख्या तो अधिक है, लेकिन पौधों के जीवित रहने की दर को लेकर विशेषज्ञ अक्सर चिंता जताते रहे हैं। स्पीकर गुप्ता का यह बयान इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण है। DDA और स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से चलाया जा रहा यह अभियान आने वाले महीनों में अन्य क्षेत्रों तक विस्तारित किए जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन विजेंद्र गुप्ता का यह बयान — कि 'जिम्मेदारी पौधा लगाने से नहीं, वहीं से शुरू होती है' — उस असुविधाजनक सच्चाई को छूता है जिसे अधिकांश नेता नजरअंदाज करते हैं। दिल्ली में पिछले एक दशक में लाखों पौधे लगाए गए, पर जीवित रहने की दर को लेकर कोई पारदर्शी सरकारी डेटा सार्वजनिक नहीं किया गया। असली कसौटी यह होगी कि DDA और स्वयंसेवी संस्थाएँ इन 500 पौधों की निगरानी के लिए कोई सत्यापन-योग्य तंत्र स्थापित करती हैं या नहीं — अन्यथा यह भी एक और फोटो-अवसर बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विजेंद्र गुप्ता ने रोहिणी में कौन-सा पौधरोपण अभियान शुरू किया?
दिल्ली विधानसभा के स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने रोहिणी सेक्टर-14 के DDA डिस्ट्रिक्ट पार्क (चित्रगुप्त पार्क) में 500 से अधिक जामुन के पौधे लगाकर एक बड़े पौधरोपण अभियान की शुरुआत की। यह कार्यक्रम DDA और स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से आयोजित किया गया।
विजेंद्र गुप्ता ने पौधरोपण की सफलता को कैसे परिभाषित किया?
गुप्ता ने कहा कि किसी हरित अभियान की असली सफलता लगाए गए पौधों की संख्या नहीं, बल्कि उनके जीवित रहने और फलने-फूलने की दर से मापी जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि पौधा लगाने के बाद उसकी देखभाल करना सबसे अहम प्राथमिकता होनी चाहिए।
'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान का इस कार्यक्रम से क्या संबंध है?
स्पीकर गुप्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देशव्यापी 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पहल नागरिकों को अपनी माँ के सम्मान में पेड़ लगाने और उसकी देखभाल के लिए प्रेरित करती है। उन्होंने इसे पारिवारिक मूल्यों और पर्यावरण जागरूकता को एक साथ मजबूत करने वाला कदम बताया।
इस अभियान में किन पौधों को प्राथमिकता दी गई और क्यों?
अभियान में जामुन की प्रजाति के 500 से अधिक पौधे लगाए गए, जो एक स्थानीय और देशी वृक्ष प्रजाति है। आयोजकों ने स्थानीय प्रजातियों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया, क्योंकि ये दिल्ली की जलवायु में बेहतर जीवित रहती हैं और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अधिक उपयुक्त होती हैं।
रोहिणी को दिल्ली का हरा-भरा इलाका क्यों माना जाता है?
स्पीकर गुप्ता के अनुसार, लगातार जन-भागीदारी और दीर्घकालिक पर्यावरणीय प्रयासों के कारण रोहिणी दिल्ली के सबसे हरे-भरे इलाकों में से एक बनकर उभरा है। DDA पार्कों का सघन नेटवर्क और नागरिकों की सक्रिय भूमिका इसकी हरियाली के प्रमुख कारण बताए जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 दिन पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले