रोहिणी पौधरोपण अभियान: विजेंद्र गुप्ता बोले — 'पेड़ लगाना नहीं, उसे बचाना है असली जिम्मेदारी'
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली विधानसभा के स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने 12 जुलाई 2025 को रोहिणी के सेक्टर-14 स्थित डीडीए डिस्ट्रिक्ट पार्क (चित्रगुप्त पार्क) में एक बड़े पौधरोपण अभियान का शुभारंभ किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी हरित अभियान की सफलता का असली पैमाना लगाए गए पौधों की संख्या नहीं, बल्कि उनके जीवित रहने की दर है। यह कार्यक्रम दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से आयोजित किया।
मुख्य घटनाक्रम
इस अभियान के दौरान 500 से अधिक जामुन के पौधे लगाए गए, जिसमें स्थानीय प्रजातियों को प्राथमिकता दी गई। स्पीकर गुप्ता ने कार्यक्रम में उपस्थित नागरिकों को संबोधित करते हुए कहा, 'पौधा लगाना सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं है, यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक वादा है। अभियान की असली सफलता इस बात में नहीं कि कितने पेड़ लगाए गए, बल्कि इसमें है कि उनमें से कितने बचते और फलते-फूलते हैं।'
उन्होंने आगे कहा, 'पौधा लगाने और उसके एक स्वस्थ पेड़ बनने को सुनिश्चित करने के बीच बहुत बड़ा फर्क है। हमारी जिम्मेदारी पौधा लगाने के साथ खत्म नहीं होती, बल्कि वहीं से शुरू होती है।'
रोहिणी की हरियाली और जन-भागीदारी
गुप्ता ने कहा कि लगातार जन-भागीदारी और दीर्घकालिक पर्यावरणीय प्रयासों के कारण रोहिणी आज दिल्ली के सबसे हरे-भरे इलाकों में से एक बनकर उभरा है। उन्होंने इस डिस्ट्रिक्ट पार्क से शुरू हुए अभियान को एक जन-आंदोलन का रूप देने का आह्वान किया, ताकि यह हर घर तक पहुँचे और नागरिक दिल्ली की हरियाली को सक्रिय रूप से बचाने में भागीदार बनें।
उन्होंने निवासियों से अपने आसपास के पार्कों में पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित करने और पर्यावरण संरक्षण में व्यक्तिगत जिम्मेदारी लेने की अपील की।
'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान से जुड़ाव
स्पीकर गुप्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देशव्यापी अभियान 'एक पेड़ माँ के नाम' का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पहल हर नागरिक को अपनी माँ के सम्मान में एक पेड़ लगाने और उसकी देखभाल करने के लिए प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि ऐसे पेड़ की देखभाल करना प्रेम, आभार और स्मृति का एक स्थायी प्रतीक बन जाता है, जिससे पारिवारिक मूल्य और पर्यावरण के प्रति जागरूकता — दोनों एक साथ मजबूत होते हैं।
आगे की राह
गौरतलब है कि दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले शहर में पौधरोपण अभियानों की संख्या तो अधिक है, लेकिन पौधों के जीवित रहने की दर को लेकर विशेषज्ञ अक्सर चिंता जताते रहे हैं। स्पीकर गुप्ता का यह बयान इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण है। DDA और स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से चलाया जा रहा यह अभियान आने वाले महीनों में अन्य क्षेत्रों तक विस्तारित किए जाने की संभावना है।