मौलाना साजिद रशीदी: बंगाल में गाय न खरीदना मुसलमानों का सांप्रदायिक सद्भाव का संदेश

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मौलाना साजिद रशीदी: बंगाल में गाय न खरीदना मुसलमानों का सांप्रदायिक सद्भाव का संदेश

सारांश

ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने बंगाल में मुसलमानों के गाय न खरीदने के फैसले को सद्भाव का प्रतीक बताया, हिंदू पशुपालकों की आर्थिक पीड़ा पर सवाल उठाए और राजनीतिक भाषा के गिरते स्तर पर चिंता जताई।

मुख्य बातें

मौलाना साजिद रशीदी ने 21 मई को कहा कि पश्चिम बंगाल में मुसलमानों का गाय न खरीदना सांप्रदायिक सद्भाव का संदेश है।
उन्होंने कहा कि यदि हिंदू समाज एकजुट हो तो गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने से कोई नहीं रोक सकता।
बंगाल के हिंदू पशुपालक गायें न बिकने से कर्ज के बोझ तले दबे हैं; रशीदी ने बजरंग दल से मदद का सवाल उठाया।
'जर्सी गाय', 'गद्दार', 'वोट चोर' जैसे शब्दों को उन्होंने लोकतंत्र और समाज दोनों के लिए हानिकारक बताया।
उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह के दौर को सच्ची राजनीति का उदाहरण बताया।

ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने 21 मई 2026 को नई दिल्ली में कहा कि पश्चिम बंगाल में मुसलमानों द्वारा गायें न खरीदने का फैसला सांप्रदायिक सद्भाव और हिंदू धार्मिक आस्था के प्रति सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुसलमानों ने यह निर्णय यह कहते हुए लिया कि 'यह आपकी आस्था और आपकी माँ है; हम उसका सम्मान करते हैं।'

मुख्य घटनाक्रम

मौलाना रशीदी ने एक विशेष बातचीत में कहा कि यदि हिंदू समाज वास्तव में जागरूक और एकजुट हो जाए, तो गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने यह भी कहा कि समस्या तब उत्पन्न होती है जब आस्था का दुरुपयोग किया जाता है और धर्म के नाम पर दंगे भड़काए जाते हैं, जिससे हिंदू-मुस्लिम संबंध प्रभावित होते हैं।

हिंदू पशुपालकों की आर्थिक पीड़ा

मौलाना रशीदी ने बताया कि पश्चिम बंगाल में कई हिंदू पशुपालक इस समय गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। उनके अनुसार, लोगों ने सड़क पर आकर बताया कि गायें न बिकने से उनका कारोबार ठप हो गया है और वे कर्ज के बोझ तले दब गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे कठिन समय में बजरंग दल जैसे संगठन उन पशुपालकों की मदद के लिए आगे क्यों नहीं आते।

राजनीतिक विमर्श पर चिंता

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई विवादित टिप्पणी के संदर्भ में मौलाना रशीदी ने कहा कि राजनीति का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। उनके अनुसार, 'जर्सी गाय', 'गद्दार' और 'वोट चोर' जैसे शब्द अब राजनीतिक भाषा का हिस्सा बनते जा रहे हैं, जो लोकतंत्र और समाज दोनों के लिए हानिकारक है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

मौलाना रशीदी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह के दौर का उदाहरण देते हुए कहा कि तब विपक्ष में रहते हुए भी वाजपेयी को देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए संयुक्त राष्ट्र भेजा गया था — यही सच्ची राजनीति है। उन्होंने कहा कि 'गद्दार' या 'जर्सी गाय' जैसे शब्दों का इस्तेमाल न केवल राजनीति में, बल्कि पूरे समाज में पूरी तरह अस्वीकार्य है और यही राहुल गांधी की मौजूदा स्थिति तथा कांग्रेस के पतन के प्रमुख कारणों में से एक है।

आगे की राह

मौलाना रशीदी की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब देश में सांप्रदायिक सौहार्द को लेकर बहस तेज़ है। उनके बयान ने धार्मिक सहिष्णुता, पशुपालकों की आर्थिक तकलीफ और राजनीतिक संवाद की गुणवत्ता — तीनों मुद्दों को एक साथ उठाकर एक व्यापक विमर्श को जन्म दिया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी देखना होगा कि क्या यह ज़मीनी स्तर पर किसी ठोस बदलाव में तब्दील होता है या महज़ बयानबाज़ी तक सीमित रहता है।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना साजिद रशीदी ने बंगाल में गाय न खरीदने के फैसले को क्या बताया?
मौलाना साजिद रशीदी ने इसे सांप्रदायिक सद्भाव और हिंदू धार्मिक आस्था के प्रति सम्मान का संदेश बताया। उनके अनुसार मुसलमानों ने यह कहते हुए यह निर्णय लिया कि 'यह आपकी आस्था और आपकी माँ है; हम उसका सम्मान करते हैं।'
पश्चिम बंगाल के हिंदू पशुपालकों की क्या समस्या है?
मौलाना रशीदी के अनुसार बंगाल में कई हिंदू पशुपालक गायें न बिकने के कारण गंभीर आर्थिक संकट में हैं और कर्ज के बोझ तले दब गए हैं। उन्होंने बजरंग दल जैसे संगठनों से इन पशुपालकों की मदद के लिए आगे आने का सवाल उठाया।
मौलाना रशीदी ने राहुल गांधी की मोदी पर टिप्पणी पर क्या कहा?
'जर्सी गाय', 'गद्दार' और 'वोट चोर' जैसे शब्दों को उन्होंने लोकतंत्र और समाज दोनों के लिए अस्वीकार्य बताया। उन्होंने कहा कि यही राहुल गांधी की मौजूदा स्थिति और कांग्रेस के पतन के प्रमुख कारणों में से एक है।
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन क्या है?
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन भारत में मस्जिदों के इमामों का एक प्रमुख संगठन है, जिसके अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी हैं। यह संगठन धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर मुस्लिम समुदाय का पक्ष रखता है।
मौलाना रशीदी ने किस पुराने राजनीतिक उदाहरण का हवाला दिया?
उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह के दौर का उदाहरण दिया, जब विपक्ष में रहते हुए भी वाजपेयी को कांग्रेस सरकार ने संयुक्त राष्ट्र में देश का प्रतिनिधित्व करने भेजा था। रशीदी ने इसे सच्ची राजनीति की मिसाल बताया।
राष्ट्र प्रेस
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