क्या मुगलों और अंग्रेजों की तरह फिर से भेदभाव हो रहा है? : मौलाना साजिद रशीदी

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क्या मुगलों और अंग्रेजों की तरह फिर से भेदभाव हो रहा है? : मौलाना साजिद रशीदी

सारांश

मौलाना साजिद रशीदी ने बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के तुगलगी फरमान की आलोचना की है, जहां गैर हिंदुओं के मंदिरों में प्रवेश पर रोक लगाने की योजना है। उनका कहना है कि यह भेदभाव वही है जो मुगलों और अंग्रेजों ने किया। इस मुद्दे पर उनके विचार जानिए।

Key Takeaways

  • मौलाना साजिद रशीदी का तुगलगी फरमान से असहमत होना।
  • धार्मिक सहिष्णुता का महत्व।
  • मुगलों और अंग्रेजों की नीतियों की आलोचना।
  • सभी धर्मों के अनुयायियों के लिए समान अधिकार।
  • संस्कृति और तहजीब की रक्षा की आवश्यकता।

नई दिल्ली, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के उस निर्णय को तुगलगी फरमान कहा है, जिसमें बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर के अलावा कमेटी द्वारा संचालित अन्य मंदिरों में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की योजना बनाई जा रही है।

राष्ट्र प्रेस से बातचीत के दौरान मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि मैंने वेद, उपनिषद, गीता और रामायण का अध्ययन किया है। किसी भी धार्मिक ग्रंथ में यह नहीं लिखा है कि कोई मुसलमान मंदिर या पवित्र स्थान पर नहीं जा सकता है या कोई सिख या ईसाई वहां नहीं जा सकता। यदि आप सनातन धर्म का पालन करते हैं, तो आपको इसके ग्रंथों का सम्मान करना चाहिए। ये ग्रंथ सभी के प्रति प्यार और दया का संदेश देते हैं। आप उन लोगों को मना कर रहे हैं जो अपनी छोटी सी दुकान लगाकर अपना जीवन यापन करते हैं, जबकि मुसलमान चार धाम की यात्रा पर नहीं जाता है। मस्जिदों में हिंदुओं का जाना कोई समस्या नहीं है। यह सिर्फ एक तुगलगी फरमान है। मुगलों और अंग्रेजों ने जो किया, वही आज दोहराया जा रहा है।

मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि मुझे एक बात समझ में नहीं आती। जब हम यात्रा कर रहे होते हैं और नमाज का समय होता है, तो हम मंदिर जाकर पुजारी से कहते हैं कि हमें नमाज पढ़नी है। वहाँ हमें जगह, पानी और साफ कपड़ा दिया जाता है, कोई कठिनाई नहीं होती। इसी तरह, यदि कोई मुसाफिर मस्जिद में आता है और कहता है कि उसे भूख लगी है और खाना चाहिए, तो क्या कोई मुसलमान उसे मना करेगा? बिल्कुल नहीं। उसे खाना और रहने की जगह दी जाएगी। यह हमारी संस्कृति और तहजीब है। लेकिन कुछ लोग इस संस्कृति को भंग करना चाहते हैं। उनकी सोच वैसी ही है, जैसी पाकिस्तान आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर ने कही थी कि हिंदू और मुसलमान एक साथ नहीं रह सकते। ऐसी सोच को बढ़ावा देकर वे वास्तव में पाकिस्तान के लिए काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जो लोग नफरत फैलाते हैं, वे पाकिस्तान के एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं। जब पहलगाम पर हमला हुआ था, तब पूरा मुस्लिम समुदाय भारत और सरकार के साथ खड़ा था। सबने एक आवाज में पाकिस्तान के खिलाफ बात की। मैंने खुद भी कहा था कि पाकिस्तान को दुनिया के नक्शे से मिटा देना चाहिए। जब हम हिन्दुस्तान में रहते हैं, तो हमसे नफरत क्यों?

उन्होंने कहा कि भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की बात होती है, जबकि हम यह नहीं कहते कि भारत एक इस्लामिक राष्ट्र बनेगा। हमने देखा है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों का निर्माण कैसे हुआ है। नेपाल और श्रीलंका को देखने के बाद भी आप चाहते हैं कि भारत हिंदू राष्ट्र बने।

Point of View

NationPress
04/02/2026

Frequently Asked Questions

बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति का निर्णय क्या है?
बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने गैर हिंदुओं के मंदिरों में प्रवेश पर रोक लगाने का निर्णय लिया है।
मौलाना साजिद रशीदी का इस निर्णय पर क्या कहना है?
उन्होंने इसे तुगलगी फरमान बताया है और इसे मुगलों और अंग्रेजों की नीतियों के समान बताया है।
क्या मौलाना साजिद रशीदी ने धार्मिक सहिष्णुता का संदेश दिया है?
हाँ, उन्होंने सभी धर्मों को समान अधिकार देने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
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