पीएम मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति, क्राउन प्रिंस और क्वीन मदर को भेंट किए 8 दुर्लभ भारतीय उपहार
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 मई 2026 को पाँच देशों की यात्रा पूर्ण कर भारत लौटे। इस राजनयिक दौरे के दौरान उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में वहाँ के शीर्ष नेताओं को भारत की समृद्ध शिल्प विरासत और कृषि विविधता को दर्शाने वाले विशेष उपहार भेंट किए। यूएई के राष्ट्रपति, क्राउन प्रिंस और क्वीन मदर — तीनों को अलग-अलग, सुविचारित भारतीय भेंट दी गईं, जो दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक सौहार्द और कूटनीतिक गर्मजोशी को रेखांकित करती हैं।
यूएई के राष्ट्रपति को भेंट: रोगन पेंटिंग, केसर आम और मेघालय अनानास
प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति को गुजरात के कच्छ क्षेत्र की दुर्लभ 'रोगन पेंटिंग' (ट्री ऑफ लाइफ) भेंट की। यह कपड़ा कला अपनी बारीक कारीगरी और चमकदार रंगों के लिए विश्वविख्यात है। इसमें 'ट्री ऑफ लाइफ' यानी जीवन वृक्ष का डिज़ाइन जीवन, जुड़ाव, शक्ति और निरंतरता का प्रतीक है — जिसकी जड़ें धरती में और शाखाएँ आकाश की ओर होती हैं, जो परंपरा और प्रगति के बीच के संतुलन को व्यक्त करती हैं।
इसके साथ ही, राष्ट्रपति को जीआई टैग प्राप्त 'केसर आम' और 'मेघालय अनानास' भी भेंट किए गए। गुजरात के जूनागढ़ से उत्पन्न केसर आम को 'आमों की रानी' कहा जाता है — इसका गूदा सुनहरा-नारंगी, रेशारहित और सुगंधित होता है। वहीं, मेघालय की पहाड़ी भूमि में उगाए जाने वाले जीआई टैग प्राप्त अनानास अपनी मिठास, न्यूनतम खट्टेपन और पोषक तत्वों — विशेषकर ब्रोमेलैन एंजाइम, विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट — के कारण विश्व के श्रेष्ठ फलों में गिने जाते हैं।
क्राउन प्रिंस को भेंट: कोफ्तगिरी खंजर और मिथिला मखाना
यूएई के क्राउन प्रिंस के लिए प्रधानमंत्री मोदी राजस्थान के उदयपुर में सिकलीगर कारीगरों द्वारा निर्मित 'कोफ्तगिरी खंजर' लेकर गए। इस पारंपरिक औपचारिक खंजर पर लोहे में बारीक सोने और चाँदी के तार जड़कर फूलों और ज्यामितीय आकृतियों के नयनाभिराम डिज़ाइन बनाए जाते हैं। यह दुर्लभ हस्तकला कभी राजपूत राजाओं के संरक्षण में पली-बढ़ी थी और आज केवल गिने-चुने कारीगर ही इस परंपरा को जीवित रखे हुए हैं। यूएई में खंजर की अपनी सांस्कृतिक परंपरा को देखते हुए यह उपहार साहस, सम्मान और शाही विरासत की साझा भावना का प्रतीक माना जा रहा है।
इसके साथ बिहार के मिथिला क्षेत्र का जीआई टैग प्राप्त 'मिथिला मखाना' भी भेंट किया गया। तालाबों और जलाशयों में उगाया जाने वाला यह उत्पाद हल्का, कुरकुरा और प्रोटीन, खनिज तथा एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है। यह खाद्य, स्नैक और धार्मिक परंपराओं तीनों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
क्वीन मदर को भेंट: करीमनगर फिलिग्री संदूक, महेश्वरी सिल्क और चक हाओ चावल
यूएई की क्वीन मदर को तीन विशिष्ट उपहार भेंट किए गए। पहला — तेलंगाना के करीमनगर की प्रसिद्ध धातु कला में निर्मित 'करीमनगर फिलिग्री संदूक', जिसमें चाँदी की शीट पर हथौड़े से एक शाही जुलूस — हाथी और हौदे सहित — का दृश्य उकेरा गया है। यह शान, उत्सव और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण है।
दूसरा उपहार था मध्य प्रदेश के महेश्वर की विश्वविख्यात 'महेश्वरी सिल्क' — सिल्क और कॉटन के मिश्रण से बना हल्का, मुलायम और हल्की चमक वाला यह कपड़ा 18वीं सदी में रानी अहिल्याबाई होलकर के संरक्षण में पला-बढ़ा। इसकी विशेषता इसका 'रिवर्सिबल बॉर्डर' है — अर्थात इसे दोनों तरफ से पहना जा सकता है — जो इसे महिला नेतृत्व और परंपरागत कारीगरी का प्रतीक बनाता है।
तीसरा उपहार था मणिपुर का 'चक हाओ चावल' — जिसे 'काला चावल' भी कहते हैं। पूर्वोत्तर भारत की उपजाऊ घाटियों से आने वाली यह दुर्लभ किस्म कभी केवल राजघरानों और विशेष समारोहों तक सीमित थी। इसका गहरा बैंगनी रंग, अनोखी सुगंध और डाइटरी फाइबर, आयरन, एंटीऑक्सीडेंट तथा धीरे पचने वाले कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होना इसे पोषण की दृष्टि से भी अत्यंत मूल्यवान बनाता है।
राजनयिक महत्व: उपहारों में भारत की विविधता का संदेश
यह ऐसे समय में आया है जब भारत और यूएई के बीच व्यापार, ऊर्जा और प्रवासी समुदाय के स्तर पर संबंध लगातार प्रगाढ़ हो रहे हैं। गौरतलब है कि इन उपहारों में गुजरात, राजस्थान, बिहार, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, मेघालय और मणिपुर — सात अलग-अलग राज्यों की कला, कृषि और शिल्प परंपराओं को समाहित किया गया है, जो भारत की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता का सशक्त राजनयिक संदेश देता है। इनमें से अधिकांश उत्पाद जीआई (भौगोलिक संकेत) टैग प्राप्त हैं, जो उनकी प्रामाणिकता और मूल की गारंटी देता है।
आने वाले समय में इस यात्रा के दौरान हुई द्विपक्षीय वार्ताओं के परिणाम और संभावित समझौतों की विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है।