PM मोदी ने नॉर्वे के किंग, क्वीन, PM और क्राउन प्रिंस को दिए भारतीय हस्तशिल्प के अनमोल उपहार
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 मई 2026 को पाँच देशों की विदेश यात्रा पूर्ण कर नई दिल्ली लौटे। नॉर्वे प्रवास के दौरान उन्होंने वहाँ के शीर्ष नेतृत्व — प्रधानमंत्री, किंग, क्वीन और क्राउन प्रिंस — को भारत की समृद्ध हस्तशिल्प परंपरा से जुड़े विशेष उपहार भेंट किए। इन उपहारों में सिक्किम, ओडिशा और आंध्र प्रदेश की दुर्लभ कलाओं की झलक थी, जो भारत-नॉर्वे मैत्री को सांस्कृतिक गहराई देती है।
नॉर्वे के प्रधानमंत्री को प्रेस्ड ऑर्किड पेंटिंग और पेपरवेट
नॉर्वे के प्रधानमंत्री को प्रेस्ड ऑर्किड पेंटिंग और ऑर्किड पेपरवेट भेंट किए गए। ये कलाकृतियाँ सिक्किम की धुंध भरी हिमालयी घाटियों में पाए जाने वाले असली प्रेस्ड ऑर्किड और फर्न से तैयार की गई हैं। प्रत्येक फूल और फर्न को स्थानीय कारीगरों ने बड़े यत्न से चुनकर संरक्षित किया है, ताकि पूर्वी हिमालय की अनूठी जैव विविधता को स्थायी रूप दिया जा सके।
गौरतलब है कि सिक्किम भारत का पहला पूर्णतः जैविक (ऑर्गेनिक) राज्य है। यह कला पर्यावरण संरक्षण और संतुलित जीवनशैली के प्रति गहरी प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है — एक मूल्य जो प्रकृति-प्रेमी नॉर्वे की संस्कृति से स्वाभाविक रूप से जुड़ता है।
किंग हेराल्ड पंचम को तारकशी सेलबोट
नॉर्वे के राजा किंग हेराल्ड पंचम के लिए पीएम मोदी एक विशेष बारीक नक्काशीदार चाँदी की सेलबोट लेकर गए। यह मॉडल ओडिशा के कटक की 500 वर्ष पुरानी तारकशी (सिल्वर फिलिग्री) कला का उत्कृष्ट नमूना है, जिसके कारण कटक को 'सिल्वर सिटी' के नाम से भी जाना जाता है। इस कला में अत्यंत महीन चाँदी के तारों को मोड़-जोड़कर जटिल और सुंदर आकृतियाँ बनाई जाती हैं।
यह नौका ओडिशा की प्राचीन समुद्री विरासत और उन भारतीय व्यापारियों की स्मृति का प्रतीक है जो सदियों पहले समुद्र मार्ग से दूरदराज़ देशों तक पहुँचते थे। यह उपहार इसलिए भी विशेष अर्थ रखता है क्योंकि किंग हेराल्ड पंचम का जीवनभर नौकायन से गहरा नाता रहा है और उन्होंने ओलंपिक खेलों में नॉर्वे का प्रतिनिधित्व भी किया था। वाइकिंग्स और समुद्री अन्वेषण की लंबी परंपरा वाले नॉर्वे के लिए यह उपहार एक सांस्कृतिक सेतु का काम करता है।
क्वीन को ताड़पत्र पर उकेरी पाम लीफ पट्टचित्र
नॉर्वे की रानी को पाम लीफ पट्टचित्र (स्थानीय भाषा में ताला पट्टचित्र) भेंट की गई। यह ओडिशा की सबसे पुरानी और सूक्ष्म कला परंपराओं में से एक है, जिसमें विशेष रूप से तैयार किए गए ताड़ के पत्तों पर बेहद महीन चित्र उकेरे जाते हैं। कपड़े पर बनने वाली साधारण पेंटिंग से भिन्न, इस कला में कहानी, लिखावट और पारंपरिक चित्रकारी का अद्भुत संगम होता है।
इन्हें अक्सर धागों से जोड़कर मोड़ने योग्य पट्टियों के रूप में बनाया जाता है। इसकी प्राकृतिक बनावट और महीन कारीगरी पीढ़ियों से संचित धैर्य और रचनात्मकता को अभिव्यक्त करती है — ठीक उसी तरह जैसे नॉर्डिक पांडुलिपियों और लोककला में सांस्कृतिक स्मृति को सँजोया जाता है।
क्राउन प्रिंस को सूर्य-चंद्रमा थीम की कलमकारी पेंटिंग
नॉर्वे के क्राउन प्रिंस को सूर्य और चंद्रमा थीम वाली कलमकारी पेंटिंग भेंट की गई। कलमकारी आंध्र प्रदेश की एक प्राचीन कला है जिसमें प्राकृतिक रंगों और बाँस की कलम या हाथ से तराशे लकड़ी के ब्लॉक से चित्र उकेरे जाते हैं। इसकी दो प्रमुख शैलियाँ हैं — श्रीकालहस्ती शैली (हाथ से बनाई जाती है) और मछलीपट्टनम शैली (ब्लॉक प्रिंटिंग)।
इस पेंटिंग में सूर्य ऊर्जा, जीवनशक्ति और जागरूकता का प्रतीक है, जबकि चंद्रमा शांति, संवेदनशीलता और मन की गहराई को दर्शाता है। यह भारत की वैदिक परंपराओं से जुड़ी कहानी कहने की कला है। इसके आकाशीय प्रतीक नॉर्वे के प्रसिद्ध 'मिडनाइट सन' की अवधारणा से एक सार्वभौमिक जुड़ाव बनाते हैं, जहाँ रोशनी और अंधेरा एक साथ सह-अस्तित्व में रहते हैं।
कूटनीतिक महत्व और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी विदेश नीति में सांस्कृतिक कूटनीति को तेज़ी से एक प्रभावी साधन के रूप में उपयोग कर रहा है। प्रत्येक उपहार प्राप्तकर्ता की व्यक्तिगत रुचि और नॉर्वे की सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर चुना गया, जो भारत की सोची-समझी सॉफ्ट पावर रणनीति को दर्शाता है। पाँच देशों की इस यात्रा के पूर्ण होने के साथ, भारत-नॉर्वे द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है।