नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्त आईडे बोले — मोदी ने वैश्विक मंच पर भारत को दिलाई विशेष पहचान

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नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्त आईडे बोले — मोदी ने वैश्विक मंच पर भारत को दिलाई विशेष पहचान

सारांश

43 वर्षों में पहली बार किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने ओस्लो का दौरा किया — और नॉर्वे के विदेश मंत्री ने इसे केवल एक राजनयिक यात्रा नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों में भारत की बढ़ती भूमिका की स्वीकृति बताया। ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप इस नए अध्याय की नींव है।

मुख्य बातें

नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्त आईडे ने 19 मई को ओस्लो में PM नरेंद्र मोदी को भारत का 'अत्यंत लोकप्रिय और प्रभावशाली' नेता बताया।
PM मोदी की ओस्लो यात्रा 43 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली नॉर्वे यात्रा थी।
दोनों देशों ने ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के तहत नवीकरणीय ऊर्जा, सर्कुलर इकोनॉमी और सतत विकास में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
एस्पेन ने भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर बताया।
विदेश मंत्री ने 18 मई की रात PM मोदी के साथ हुई लंबी बातचीत और अपने व्यक्तिगत भारत-जुड़ाव ( 1974 से) का भी उल्लेख किया।

नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्त आईडे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत का 'अत्यंत लोकप्रिय और प्रभावशाली' नेता बताते हुए कहा कि उन्होंने वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति को उल्लेखनीय रूप से मजबूत किया है। 19 मई को ओस्लो में दिए गए एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने पीएम मोदी की ओस्लो यात्रा को 43 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली नॉर्वे यात्रा बताते हुए इसे अत्यंत सफल और उपयोगी करार दिया।

मुख्य घटनाक्रम

प्रधानमंत्री मोदी की ओस्लो यात्रा के दौरान भारत और नॉर्वे के बीच नवाचार, हरित विकास, नवीकरणीय ऊर्जा और सतत आर्थिक सहयोग सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साझेदारी को विस्तार देने पर सहमति बनी। विदेश मंत्री एस्पेन ने बताया कि दोनों देशों के बीच आयोजित बिजनेस राउंडटेबल दोनों पक्षों के लिए सकारात्मक और उत्साहजनक रहा।

गौरतलब है कि यह यात्रा ऐसे समय में हुई जब वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरण तेज़ी से बदल रहे हैं और पारंपरिक गठबंधनों पर पुनर्विचार की आवश्यकता महसूस की जा रही है। एस्पेन ने कहा, 'बदलते वैश्विक हालात में पुराने तरीके और पारंपरिक गठबंधन पर फिर से विचार करने की जरूरत है, और इस काम में भारत के साथ मिलकर आगे बढ़ना बहुत अच्छा है।'

ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप

विदेश मंत्री एस्पेन ने विशेष रूप से 'ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' का उल्लेख किया, जिसके तहत दोनों देश आर्थिक विकास को पर्यावरणीय संतुलन के साथ आगे बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। इस साझेदारी में नवीकरणीय ऊर्जा, सर्कुलर इकोनॉमी, ऊर्जा दक्षता और सतत विकास जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि हरित ऊर्जा में निवेश दीर्घकाल में सबसे किफायती और लाभदायक ऊर्जा स्रोत साबित हो सकता है, जिससे देशों को ऊर्जा आत्मनिर्भरता भी प्राप्त होगी। यह ऐसे समय में आया है जब दुनिया पेरिस जलवायु समझौते के लक्ष्यों से अभी भी पीछे है, हालांकि एस्पेन ने स्वीकार किया कि देश अब हरित विकास की आवश्यकता को बेहतर ढंग से समझने लगे हैं।

भारत की आर्थिक भूमिका पर जोर

एस्पेन ने भारत को 'दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र' और 'तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्था' बताया, यह भी कहा कि भारत आने वाले समय में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल विकास की गति नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता और समावेशिता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

उनके शब्दों में, 'आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरणीय संतुलन — तीनों मिलकर ही वास्तविक और स्वस्थ विकास बनाते हैं।' यह टिप्पणी भारत जैसे तेज़ी से बढ़ते देशों के लिए विकास के मॉडल पर नॉर्वे के दृष्टिकोण को रेखांकित करती है।

मोदी की प्रशंसा और व्यक्तिगत जुड़ाव

एस्पेन ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ 18 मई की रात हुई लंबी बातचीत का विशेष उल्लेख किया और बताया कि उनका भारत से व्यक्तिगत जुड़ाव भी है — वे 1974 में पहली बार भारत गए थे और वाराणसी की यात्रा भी की थी, जो पीएम मोदी का संसदीय क्षेत्र है।

उन्होंने कहा, 'वे भारत के काफी लोकप्रिय नेता हैं और उन्होंने भारत को वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाने में अहम भूमिका निभाई है।' यह कथन भारत-नॉर्वे संबंधों के नए अध्याय की शुरुआत का संकेत देता है।

आगे की राह

इस यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में नई ऊर्जा आने की उम्मीद है। हरित साझेदारी के तहत आने वाले महीनों में ठोस परियोजनाओं और निवेश प्रस्तावों की रूपरेखा तैयार होने की संभावना है। भारत-नॉर्वे सहयोग का यह नया अध्याय वैश्विक दक्षिण और यूरोप के बीच बढ़ते रणनीतिक संवाद का हिस्सा बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

इसलिए यह साझेदारी केवल कूटनीतिक नहीं, आर्थिक हितों से भी प्रेरित है।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नॉर्वे के विदेश मंत्री ने PM मोदी के बारे में क्या कहा?
नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्त आईडे ने PM मोदी को भारत का 'अत्यंत लोकप्रिय और प्रभावशाली' नेता बताया और कहा कि उन्होंने वैश्विक मंच पर भारत को एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने 18 मई की रात मोदी के साथ हुई लंबी बातचीत का भी उल्लेख किया।
PM मोदी की ओस्लो यात्रा क्यों ऐतिहासिक मानी जा रही है?
PM मोदी की ओस्लो यात्रा 43 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की नॉर्वे की पहली यात्रा थी। इस दौरान दोनों देशों के बीच हरित विकास, नवीकरणीय ऊर्जा और नवाचार समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
भारत-नॉर्वे ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप क्या है?
यह एक द्विपक्षीय ढाँचा है जिसके तहत भारत और नॉर्वे नवीकरणीय ऊर्जा, सर्कुलर इकोनॉमी, ऊर्जा दक्षता और सतत विकास में मिलकर काम करेंगे। इसका उद्देश्य आर्थिक विकास को पर्यावरणीय संतुलन के साथ आगे बढ़ाना है।
नॉर्वे के विदेश मंत्री का भारत से व्यक्तिगत जुड़ाव क्या है?
एस्पेन बार्त आईडे ने बताया कि वे 1974 में पहली बार भारत गए थे और वाराणसी की भी यात्रा की थी — वही संसदीय क्षेत्र जहाँ से PM मोदी सांसद हैं। यह व्यक्तिगत जुड़ाव उनके भारत के प्रति गहरे लगाव को दर्शाता है।
नॉर्वे की नज़र में भारत की आर्थिक भूमिका क्या है?
नॉर्वे के विदेश मंत्री ने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्था बताया, जो जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकती है। उन्होंने समावेशी और पर्यावरण-अनुकूल विकास को असली प्रगति का मापदंड बताया।
राष्ट्र प्रेस
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