सेल्सियस तापमान पैमाने की 282वीं वर्षगाँठ: 19 मई 1743 को बदली थी तापमान मापने की दुनिया

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सेल्सियस तापमान पैमाने की 282वीं वर्षगाँठ: 19 मई 1743 को बदली थी तापमान मापने की दुनिया

सारांश

जिस दिन नई दिल्ली 42 डिग्री की तपिश में जल रही है, उसी 19 मई को 282 साल पहले वह पैमाना बना था जिससे यह गर्मी मापी जाती है। सेंटीग्रेड स्केल की यह वर्षगाँठ विज्ञान और मौसम के एक अनोखे संगम की याद दिलाती है।

मुख्य बातें

19 मई 1743 को फ्रांसीसी वैज्ञानिक ज्यां पियरे क्रिस्टीन ने सेंटीग्रेड (सेल्सियस) तापमान पैमाना विकसित किया था।
स्वीडिश खगोलशास्त्री एंडर्स सेल्सियस ने 1742 में इस स्केल की नींव रखी थी, जिसमें शुरुआत में उबलने का बिंदु 0° और जमने का 100° था — बाद में इसे उलटा गया।
वर्ष 1948 में इसे आधिकारिक रूप से 'सेल्सियस' नाम दिया गया।
IMD के अनुसार आज नई दिल्ली का तापमान 42 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
सेल्सियस स्केल मौसम, चिकित्सा, उद्योग, खाद्य सुरक्षा और इंजीनियरिंग — सभी क्षेत्रों में वैश्विक मानक है।

भारत में भीषण हीटवेव के बीच आज 19 मई का दिन एक ऐतिहासिक वैज्ञानिक मील के पत्थर की याद दिलाता है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, आज नई दिल्ली का तापमान 42 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया — और यह वही 'सेल्सियस' पैमाना है जिसे आज से ठीक 282 वर्ष पहले, 19 मई 1743 को फ्रांसीसी वैज्ञानिक ज्यां पियरे क्रिस्टीन ने व्यावहारिक रूप में विकसित किया था।

सेल्सियस स्केल की उत्पत्ति और इतिहास

इस पैमाने की नींव सबसे पहले स्वीडिश खगोलशास्त्री एंडर्स सेल्सियस ने वर्ष 1742 में रखी थी। प्रारंभ में उन्होंने पानी के उबलने का तापमान 0 डिग्री और जमने का तापमान 100 डिग्री निर्धारित किया था — अर्थात् आज की तुलना में बिल्कुल उलटा। बाद में इस क्रम को पलट दिया गया और मानक वायुमंडलीय दबाव पर शुद्ध बर्फ का गलनांक 0 डिग्री सेल्सियस तथा शुद्ध पानी का क्वथनांक 100 डिग्री सेल्सियस स्थापित किया गया।

गौरतलब है कि 'सेंटीग्रेड' शब्द लैटिन मूल का है — जिसका अर्थ है 100 भागों में विभाजित। पानी के जमने और उबलने के बीच ठीक 100 डिग्री का अंतर होने के कारण यह नाम सटीक बैठता था। वर्ष 1948 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे आधिकारिक रूप से 'सेल्सियस' नाम दिया गया, एंडर्स सेल्सियस के सम्मान में।

क्यों बना यह पैमाना सबसे लोकप्रिय

वैज्ञानिकों के अनुसार, सेल्सियस स्केल की सरलता और व्यावहारिक सटीकता ने इसे वैश्विक स्तर पर सर्वाधिक उपयोग किया जाने वाला तापमान पैमाना बना दिया। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक हो जाता है जब भारत के कई राज्य भीषण गर्मी की चपेट में हैं और सरकार लगातार एडवाइजरी जारी कर रही है।

मौसम विभाग, स्वास्थ्य मंत्रालय और आयुष मंत्रालय — तीनों सेल्सियस स्केल के आधार पर ही नागरिकों को हीटवेव से सतर्क करते हैं। यह पैमाना केवल मौसम रिपोर्टिंग तक सीमित नहीं, बल्कि विज्ञान, उद्योग, चिकित्सा, खाद्य सुरक्षा और इंजीनियरिंग — हर क्षेत्र में इसकी अनिवार्य उपस्थिति है।

सेल्सियस स्केल के प्रमुख उपयोग

आज के दौर में सेल्सियस पैमाने का उपयोग इन प्रमुख क्षेत्रों में होता है:

मौसम पूर्वानुमान और हीटवेव चेतावनी — IMD की हर रिपोर्ट इसी पैमाने पर आधारित है। औद्योगिक प्रक्रियाओं का नियंत्रण — कारखानों में तापमान प्रबंधन के लिए। खाद्य सुरक्षा और खाना पकाना — सुरक्षित भंडारण तापमान निर्धारण में। वैज्ञानिक अनुसंधान — प्रयोगशालाओं में मानक माप के रूप में। इंजीनियरिंग और डिजाइन — सामग्री परीक्षण और संरचनात्मक विश्लेषण में।

भारत में हीटवेव और सेल्सियस की प्रासंगिकता

यह संयोग उल्लेखनीय है कि जिस दिन देश 42 डिग्री सेल्सियस की तपिश झेल रहा है, उसी दिन उस पैमाने की वर्षगाँठ है जिससे यह तापमान मापा जाता है। भारत सरकार ने कई राज्यों में बढ़ते तापमान को देखते हुए एडवाइजरी जारी की है, जिसमें नागरिकों को दोपहर में बाहर न निकलने, पर्याप्त पानी पीने और बुजुर्गों व बच्चों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है। सेल्सियस पैमाने की यह 282वीं वर्षगाँठ एक स्मरण है कि विज्ञान की एक छोटी-सी खोज किस तरह सदियों तक मानव जीवन को प्रभावित करती रहती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक अनुस्मारक है कि 18वीं सदी का वैज्ञानिक उपकरण आज जलवायु संकट की भाषा बन चुका है। मुख्यधारा की कवरेज इस दिन को 'रोचक तथ्य' की तरह पेश करती है, लेकिन असली सवाल यह है कि जिस पैमाने पर हम हीटवेव मापते हैं, उसी पैमाने पर हमारी नीतिगत प्रतिक्रिया कितनी सटीक है। IMD की चेतावनियाँ सेल्सियस में आती हैं, पर ज़मीनी तैयारी अभी भी उस मानक से पीछे है।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेंटीग्रेड (सेल्सियस) तापमान पैमाना कब और किसने बनाया?
सेंटीग्रेड पैमाने को 19 मई 1743 को फ्रांसीसी वैज्ञानिक ज्यां पियरे क्रिस्टीन ने व्यावहारिक रूप में विकसित किया था। इससे एक वर्ष पहले, 1742 में स्वीडिश खगोलशास्त्री एंडर्स सेल्सियस ने इसकी मूल अवधारणा प्रस्तुत की थी।
सेल्सियस और सेंटीग्रेड में क्या अंतर है?
'सेंटीग्रेड' और 'सेल्सियस' एक ही पैमाने के दो नाम हैं। वर्ष 1948 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे आधिकारिक रूप से 'सेल्सियस' नाम दिया गया, एंडर्स सेल्सियस के सम्मान में। इससे पहले यह 'सेंटीग्रेड' के नाम से जाना जाता था, जिसका अर्थ है 100 भागों में विभाजित।
सेल्सियस स्केल पर पानी का जमने और उबलने का तापमान क्या है?
मानक वायुमंडलीय दबाव पर शुद्ध बर्फ का गलनांक (फ्रीजिंग पॉइंट) 0 डिग्री सेल्सियस और शुद्ध पानी का क्वथनांक (बॉयलिंग पॉइंट) 100 डिग्री सेल्सियस है। शुरुआत में एंडर्स सेल्सियस ने इसे उलटे क्रम में रखा था, जिसे बाद में सुधारा गया।
भारत में हीटवेव के दौरान सेल्सियस पैमाने का उपयोग कैसे होता है?
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) , स्वास्थ्य मंत्रालय और आयुष मंत्रालय सभी सेल्सियस स्केल के आधार पर हीटवेव चेतावनियाँ और एडवाइजरी जारी करते हैं। आज नई दिल्ली का तापमान 42 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया और सरकार ने नागरिकों को दोपहर में बाहर न निकलने की सलाह दी है।
सेल्सियस स्केल का उपयोग किन-किन क्षेत्रों में होता है?
सेल्सियस स्केल का उपयोग मौसम पूर्वानुमान, औद्योगिक प्रक्रिया नियंत्रण, खाद्य सुरक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान और इंजीनियरिंग डिजाइन — सभी प्रमुख क्षेत्रों में होता है। इसकी सरलता और सटीकता के कारण यह विश्व का सर्वाधिक प्रचलित तापमान पैमाना बन गया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 3 सप्ताह पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 4 महीने पहले