दिल्ली में 48 घंटों में 9°C की गिरावट, IMD ने पश्चिमी विक्षोभ को बताया कारण
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 27 मई से 29 मई 2026 के बीच मात्र 48 घंटों में तापमान 9 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया, जिससे कई दिनों की भीषण लू से झुलस रहे दिल्लीवासियों को बड़ी राहत मिली। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इस नाटकीय बदलाव की पुष्टि करते हुए इसका कारण उत्तर-पश्चिमी भारत को प्रभावित करने वाला पश्चिमी विक्षोभ बताया है।
मुख्य तापमान आँकड़े
27 मई को राजधानी के कई मौसम केंद्रों पर भीषण गर्मी का प्रकोप रहा। रिज स्टेशन पर 45.6°C, आया नगर में 45.4°C, पालम में 44.6°C, लोधी रोड पर 44.6°C और सफदरजंग में 44.3°C तापमान दर्ज किया गया था।
29 मई तक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखा गया। रिज में तापमान गिरकर 36.8°C, आया नगर में 36.0°C, पालम में 35.2°C, लोधी रोड में 35.7°C और सफदरजंग में 36.8°C पर आ गया — कई स्थानों पर 8 से 9 डिग्री की गिरावट दर्ज हुई।
पश्चिमी विक्षोभ की भूमिका
IMD के अधिकारियों के अनुसार, यह अचानक तापमान परिवर्तन उत्तर-पश्चिमी भारत पर सक्रिय हुए पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से हुआ। इस मौसमी प्रणाली के कारण कुछ क्षेत्रों में तेज हवाएँ, बादल और हल्की बारिश हुई, जिसने लू की तीव्रता को कम करने में निर्णायक भूमिका निभाई। विभाग के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने कहा कि इस तरह की गिरावट से बुजुर्गों, बच्चों और बाहरी कामगारों को विशेष राहत मिली है।
आम जनता पर असर
तापमान में गिरावट से वायु गुणवत्ता में मामूली सुधार दर्ज किया गया है। भीषण गर्मी के दौरान अस्पतालों में लू लगने के मामले बढ़ गए थे, अब उनमें कमी आने की उम्मीद है। एयर कंडीशनर के अत्यधिक उपयोग के चलते बिजली की माँग रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई थी, उसमें भी राहत मिलने के संकेत हैं।
आगे का मौसम पूर्वानुमान
IMD ने अगले कुछ दिनों के लिए अपेक्षाकृत सुहावने मौसम का पूर्वानुमान जारी किया है। अधिकतम तापमान 35 से 38°C के बीच रहने की संभावना है, जिसके बाद धीरे-धीरे फिर बढ़ोतरी हो सकती है। गौरतलब है कि दिल्ली में मई और जून का मौसम अनिश्चित रहता है और यह राहत अस्थायी हो सकती है।
विशेषज्ञों की सलाह
मौसम वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि पश्चिमी विक्षोभ से मिली राहत अल्पकालिक है। निवासियों को सलाह दी गई है कि वे पर्याप्त पानी पीते रहें, दोपहर की धूप में निकलने से बचें और मौसम विभाग के अपडेट पर नज़र रखें। यह ऐसे समय में आया है जब पूरे उत्तर भारत में मानसून-पूर्व की गर्मी असामान्य रूप से तीव्र रही है।