14 जुलाई 2026
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ट्रंप का संकल्प: होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नियंत्रण, ईरान पर फिर नाकेबंदी लागू करने का ऐलान

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ट्रंप का संकल्प: होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नियंत्रण, ईरान पर फिर नाकेबंदी लागू करने का ऐलान

सारांश

ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नियंत्रण का संकल्प लिया और ईरान पर सख्त नाकेबंदी की घोषणा की — यह कदम एक टूटी हुई डील के बाद आया है। दुनिया के 20% तेल की आवाजाही इसी जलमार्ग से होती है, जिससे यह संघर्ष वैश्विक ऊर्जा बाजारों के लिए सीधा खतरा बन गया है।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 14 जुलाई को होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नियंत्रण स्थापित करने का संकल्प लिया।
ट्रंप ने ईरान पर केवल उसी के लिए लक्षित नाकेबंदी लागू करने की घोषणा की — ईरान के साथ व्यापार करने वाले देश इस जलमार्ग से नहीं गुजर सकेंगे।
ट्रंप के अनुसार, एक समझौता लगभग तय हो चुका था, लेकिन ईरान ने अंतिम समय में उसे तोड़ दिया।
अमेरिका ने दावा किया कि एक महीने में ईरान की नौसेना, वायुसेना, अधिकांश मिसाइलें और ड्रोन नष्ट कर दिए गए।
'पिकएक्स' नामक एक और ईरानी परमाणु-संबंधी सुविधा पर हमले का संकेत दिया गया।
ट्रंप ने सऊदी अरब , UAE , कतर , बहरीन और कुवैत से अमेरिकी सुरक्षा का आर्थिक बोझ साझा करने की माँग की।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 14 जुलाई को घोषणा की कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण स्थापित करेगा और ईरान पर एक बार फिर सख्त नाकेबंदी लागू करेगा। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले जारी रहेंगे, साथ ही यदि तेहरान बातचीत के लिए तैयार होता है तो कूटनीतिक रास्ता भी खुला रखा जाएगा।

नाकेबंदी और सैन्य कार्रवाई का ऐलान

ट्रंप ने कहा, 'हम आज रात उन पर हमला कर रहे हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी किसी भी चीज के लिए उनकी सभी क्षमताओं को खत्म कर रहे हैं। और मुझे लगता है कि आखिर में, हम पूरी चीज को कंट्रोल कर लेंगे।' उन्होंने आगे कहा कि लागू की जाने वाली नाकेबंदी केवल ईरान पर लक्षित होगी — जो भी देश ईरान के साथ व्यापार करेगा, उसे इस जलमार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी, जबकि अन्य सभी देशों के लिए यह मार्ग खुला रहेगा।

ट्रंप ने कहा, 'नाकेबंदी शायद उन पर हमला करने से भी ज्यादा असरदार थी। लेकिन मुझे लगता है कि दोनों का कॉम्बिनेशन ही असल में काम करता है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है, जिससे इस क्षेत्र में किसी भी तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर पड़ता है।

टूटी डील और ईरान पर आरोप

ट्रंप ने बताया कि तेहरान के साथ एक समझौता लगभग तय हो चुका था, लेकिन ईरान ने अंतिम समय में उसे तोड़ दिया। उन्होंने कहा, 'कल या परसों हमारे बीच एक डील हुई थी, सब कुछ तय हो गया था और फिर उन्होंने तुरंत वह डील तोड़ दी क्योंकि उन्हें डील में कुछ ऐसा लगा जो उन्हें पसंद नहीं आया।' ट्रंप ने ईरानी नेताओं को 'बेहद कठोर और सनकी लोग' बताते हुए कहा, 'वे समझौते तो करते हैं, लेकिन उनकी नजर में समझौते तोड़ने के लिए ही होते हैं। वे बहुत ही भरोसे के लायक नहीं हैं।'

ईरान की सैन्य क्षमता पर दावे

ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने एक महीने के भीतर ईरान की नौसेना और वायुसेना को भारी नुकसान पहुँचाया है। उन्होंने कहा, 'हमने एक महीने के अंदर उनकी नेवी को खत्म कर दिया। हमने उनकी एयर फोर्स को खत्म कर दिया। उनकी एयर फोर्स का तो अब कोई वजूद ही नहीं है। हमने उनकी ज्यादातर मिसाइलें और ज्यादातर ड्रोन खत्म कर दिए।' ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि 'पिकएक्स' नामक एक और ईरानी परमाणु-संबंधी सुविधा पर अमेरिकी नजर है और जल्द ही उस पर हमला हो सकता है। उन्होंने कहा, 'जब भी हमें इसके बारे में पता चलता है, हम उसे उड़ा देते हैं।'

परमाणु हथियार और खाड़ी देशों पर रुख

ट्रंप ने दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना अमेरिका का प्राथमिक लक्ष्य है। उन्होंने कहा, 'ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होगा।' इसके साथ ही उन्होंने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन और कुवैत का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिकी सैन्य सुरक्षा का लाभ उठाने वाले इन खाड़ी देशों को इसका आर्थिक बोझ साझा करना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका अब अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए मध्य पूर्व के तेल पर निर्भर नहीं है।

कूटनीति का दरवाजा अभी भी खुला

सैन्य कार्रवाई की घोषणाओं के बावजूद ट्रंप ने बातचीत की संभावना को पूरी तरह नकारा नहीं। उन्होंने कहा, 'हाँ, मुझे लगता है कि डील मुमकिन है। बिल्कुल, मुझे ऐसा लगता है।' गौरतलब है कि यह दोहरी नीति — एक तरफ सैन्य दबाव, दूसरी तरफ कूटनीतिक विकल्प — ट्रंप प्रशासन की ईरान के प्रति परंपरागत 'अधिकतम दबाव' रणनीति का विस्तार प्रतीत होती है। आने वाले दिनों में होर्मुज क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति और ईरान की प्रतिक्रिया पर वैश्विक निगाहें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ से दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल गुजरता है। टूटी डील की कहानी एकतरफा है; ईरान का पक्ष अभी सामने नहीं आया है, जो इस आख्यान को अधूरा बनाता है। 'पिकएक्स' जैसी सुविधाओं पर हमले के संकेत और खाड़ी देशों से खर्च वसूली की माँग मिलकर यह दर्शाते हैं कि ट्रंप इस संघर्ष को सैन्य, आर्थिक और कूटनीतिक — तीनों मोर्चों पर एक साथ लड़ने की कोशिश कर रहे हैं, जो उतना ही जोखिम भरा है जितना महत्वाकांक्षी।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण का ऐलान क्यों किया?
ट्रंप के अनुसार, ईरान ने एक तय समझौते को अंतिम समय में तोड़ दिया, जिसके बाद अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू की और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण स्थापित करने का संकल्प लिया। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
ईरान पर लागू होने वाली नाकेबंदी क्या है और इसका असर किस पर पड़ेगा?
ट्रंप ने घोषणा की कि होर्मुज जलडमरूमध्य से केवल ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों को रोका जाएगा — अन्य सभी देशों के जहाजों के लिए यह मार्ग खुला रहेगा। इसका सबसे सीधा असर उन देशों पर पड़ेगा जो ईरानी तेल या अन्य वस्तुओं का व्यापार करते हैं।
क्या अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की कोई संभावना बची है?
ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ कूटनीतिक रास्ता खुला रखने का संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि डील अभी भी मुमकिन है, हालाँकि टूटी हुई पिछली डील के बाद दोनों पक्षों के बीच भरोसे की गहरी खाई बनी हुई है।
'पिकएक्स' क्या है जिस पर ट्रंप ने हमले का संकेत दिया?
ट्रंप ने एक इंटरव्यू में 'पिकएक्स' का उल्लेख ईरान की एक परमाणु-संबंधी सुविधा के रूप में किया, जिस पर अमेरिकी खुफिया एजेंसियाँ नजर रख रही हैं। उन्होंने कहा कि यह सुविधा संभावित हमले के लक्ष्यों की सूची में है।
ट्रंप ने खाड़ी देशों से क्या माँग की?
ट्रंप ने सऊदी अरब, UAE, कतर, बहरीन और कुवैत का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिकी सैन्य सुरक्षा का लाभ उठाने वाले इन देशों को इसका आर्थिक बोझ साझा करना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका अब मध्य पूर्वी तेल पर निर्भर नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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