शहजाद भट्टी नेटवर्क पर महाराष्ट्र ATS की ताज़ा छापेमारी, पुणे-पिंपरी सहित कई शहरों में संदिग्ध हिरासत में
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) ने 14 जुलाई को पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी से जुड़े कथित नेटवर्क के विरुद्ध एक बड़ा समन्वित अभियान चलाया, जिसमें पुणे, पिंपरी-चिंचवड़ समेत महाराष्ट्र के कई शहरों में एक साथ तलाशी ली गई और अनेक संदिग्धों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। जाँच एजेंसियों के अनुसार, यह नेटवर्क सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के ज़रिए भारतीय युवाओं को कथित तौर पर देश-विरोधी गतिविधियों में शामिल करने की कोशिश कर रहा था।
मुख्य घटनाक्रम
महाराष्ट्र ATS की कई टीमें 14 जुलाई को अलग-अलग शहरों में संदिग्धों के ठिकानों पर एक साथ पहुँचीं। पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ इस अभियान के प्रमुख केंद्र रहे। हिरासत में लिए गए संदिग्धों से गहन पूछताछ जारी है और ATS पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है।
पिछली कार्रवाई से जुड़ाव
यह अभियान 10 जुलाई की बड़ी छापेमारी की अगली कड़ी है। उस दिन ATS की 14 यूनिटों की 58 टीमों ने राज्यभर में 102 ठिकानों पर एक साथ तलाशी ली थी। गौरतलब है कि महज़ चार दिनों के भीतर दूसरे बड़े अभियान से संकेत मिलता है कि जाँच एजेंसियाँ इस नेटवर्क को लेकर अत्यंत सतर्क हैं।
नेटवर्क की कार्यप्रणाली
जाँच एजेंसियों के अनुसार, शहजाद भट्टी के साथ उसके कथित सहयोगी आबिद जाट, अजमल गुजर और हम्माद मेमन इस नेटवर्क का हिस्सा बताए जा रहे हैं। ये सभी कथित तौर पर फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म के ज़रिए भारतीय युवाओं से संपर्क स्थापित कर रहे थे।
प्रारंभिक जाँच में यह भी सामने आया है कि यह कथित गैंग धार्मिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील मुद्दों का इस्तेमाल कर युवाओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा था। इसके अलावा, बेरोज़गार और आर्थिक रूप से कमज़ोर युवाओं को कथित तौर पर धन का प्रलोभन देकर इस देश-विरोधी नेटवर्क और स्लीपर सेल का हिस्सा बनाने की कोशिश की जा रही थी।
आम जनता पर असर
सुरक्षा एजेंसियों की चिंता का केंद्र वे युवा हैं जो सोशल मीडिया के ज़रिए इस नेटवर्क के संपर्क में आए हो सकते हैं। ATS ने सभी संदिग्ध संपर्कों की पड़ताल शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन रैडिकलाइज़ेशन के ऐसे मामले राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक उभरती चुनौती हैं।
क्या होगा आगे
महाराष्ट्र ATS की कार्रवाई फ़िलहाल जारी है। जाँच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर औपचारिक गिरफ्तारियाँ और आरोप-पत्र दाखिल किए जाने की संभावना है। यह मामला भारत में पाकिस्तान-संचालित कथित साइबर-रैडिकलाइज़ेशन नेटवर्क के विरुद्ध सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ती सतर्कता को रेखांकित करता है।