जालना में एटीएस की बड़ी कार्रवाई: अंबड और भोकरदन से दो संदिग्ध हिरासत में, पाक गैंगस्टर से कथित संबंध की जांच
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (एटीएस) ने शुक्रवार, 10 जुलाई 2026 की सुबह जालना जिले में ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए दो संदिग्ध व्यक्तियों को हिरासत में लिया। इन दोनों पर देश के विरुद्ध साजिश रचने का आरोप है और प्रारंभिक जांच में पाकिस्तान स्थित कथित गैंगस्टर शहज़ाद भट्टी से इनके संबंध होने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि इसकी अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
हिरासत और छापेमारी का विवरण
हिरासत में लिए गए दोनों व्यक्ति जालना जिले की अंबड और भोकरदन तहसीलों से पकड़े गए हैं। सूत्रों के अनुसार, एटीएस ने जालना के साथ-साथ छत्रपति संभाजीनगर और बीड जिलों में भी एक साथ छापेमारी अभियान चलाया, जिसमें कई स्थानों पर तलाशी ली गई और संदिग्धों से पूछताछ की गई। दोनों हिरासत में लिए गए व्यक्तियों को आगे की जांच के लिए एटीएस अपने साथ ले गई है।
राज्यव्यापी अभियान: 14 यूनिट, 112 संदिग्ध
यह कार्रवाई महाराष्ट्र एटीएस के एक व्यापक राज्यव्यापी अभियान का हिस्सा है। एटीएस की सभी 14 यूनिटों ने एक साथ मैदान में उतरकर 112 लोगों से पूछताछ शुरू की है। एजेंसी के अनुसार, इन सभी के सोशल मीडिया के माध्यम से शहज़ाद भट्टी के संपर्क में होने की आशंका है। भट्टी पर कथित तौर पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े होने का संदेह है।
एटीएस के अनुसार, यह तलाशी अभियान मुंबई, ठाणे, कुर्ला, बांद्रा, जोगेश्वरी, नवी मुंबई, मीरा रोड, भयंदर, सांगली, सतारा और छत्रपति संभाजीनगर सहित राज्य के कई प्रमुख शहरों में एक साथ चलाया गया।
डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच
जांच एजेंसियाँ हिरासत में लिए गए व्यक्तियों के मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच कर रही हैं। इसके अलावा उनके कॉल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया गतिविधियों और संपर्कों की भी पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों का प्रयास यह पता लगाने का है कि कथित संपर्क केवल ऑनलाइन बातचीत तक सीमित थे या किसी आपराधिक अथवा संदिग्ध गतिविधि से भी जुड़े हुए थे।
आधिकारिक बयान का इंतजार
फिलहाल एटीएस की ओर से इस पूरे मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। गौरतलब है कि यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब सुरक्षा एजेंसियाँ पाकिस्तान स्थित नेटवर्कों द्वारा सोशल मीडिया के जरिए भारतीय नागरिकों को प्रभावित करने की कोशिशों के प्रति अतिरिक्त सतर्क हैं। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही किसी ठोस नतीजे पर पहुँचना संभव होगा।