14 जुलाई 2026
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आषाढ़ अमावस्या 2025: त्रिवेणी संगम पर उमड़े श्रद्धालु, पिंडदान-तर्पण से पितरों को दी श्रद्धांजलि

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आषाढ़ अमावस्या 2025: त्रिवेणी संगम पर उमड़े श्रद्धालु, पिंडदान-तर्पण से पितरों को दी श्रद्धांजलि

सारांश

आषाढ़ अमावस्या इस बार मंगलवार को पड़ी — और प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध के अनुष्ठानों के बीच श्रद्धालुओं ने पितरों की शांति और परिवार की समृद्धि की प्रार्थना की। मंगलवार की अमावस्या को धार्मिक दृष्टि से विशेष फलदायी माना जाता है।

मुख्य बातें

14 जुलाई 2025 को आषाढ़ अमावस्या के अवसर पर प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर हजारों श्रद्धालु एकत्रित हुए।
श्रद्धालुओं ने पिंडदान , तर्पण , श्राद्ध और दान-पुण्य के माध्यम से पितरों की आत्मा की शांति की कामना की।
इस वर्ष अमावस्या मंगलवार को पड़ने से इसका धार्मिक महत्व और अधिक माना गया।
संगम पर उपस्थित साधु के अनुसार, पितरों की तृप्ति से देवी-देवताओं की कृपा भी प्राप्त होती है।
श्रद्धालु कमलेश पांडेय सहित अनेक तीर्थयात्रियों ने परिवार की सुख-शांति और देश की खुशहाली के लिए गंगा माँ से प्रार्थना की।

प्रयागराज के पवित्र त्रिवेणी संगम पर 14 जुलाई 2025 को आषाढ़ अमावस्या के अवसर पर हजारों श्रद्धालु एकत्रित हुए और गंगा, यमुना व सरस्वती के पावन संगम में आस्था की डुबकी लगाई। श्रद्धालुओं ने पूर्वजों की आत्मा की शांति, परिवार की सुख-समृद्धि और जीवन में मंगल की कामना करते हुए पिंडदान, तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य जैसे धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए। इस वर्ष अमावस्या का मंगलवार को पड़ना इसे और अधिक फलदायी मानने का कारण बना।

मंगलवार की अमावस्या का विशेष महत्व

संगम तट पर उपस्थित एक साधु ने धार्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि संगम में स्नान का महत्व हर समय रहता है, किंतु अमावस्या का दिन विशेष माना जाता है। उन्होंने बताया कि मंगलवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को अत्यंत फलदायी माना जाता है। साधु के अनुसार, इस दिन पितरों के लिए किए गए पिंडदान, श्राद्ध, तर्पण और दान से पूर्वज प्रसन्न होते हैं।

पितर-तृप्ति से देवकृपा का मार्ग

साधु ने आगे कहा कि जब पितर प्रसन्न होते हैं, तब देवी-देवताओं की कृपा भी प्राप्त होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पावन दिन किए गए सत्कर्मों से परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। गौरतलब है कि प्रयागराज का त्रिवेणी संगम वर्षभर तीर्थयात्रियों के लिए आस्था का केंद्र बना रहता है, परंतु अमावस्या तिथियों पर यहाँ श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है।

श्रद्धालुओं की आवाज़

संगम में स्नान करने पहुँचे श्रद्धालु कमलेश पांडेय ने बताया कि अमावस्या का दिन पितरों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। उन्होंने कहा कि पूर्वजों के नाम से तर्पण और दान-पुण्य करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है, और बड़ी संख्या में श्रद्धालु संगम पर पहुँचकर परिवार की सुख-शांति और खुशहाली की प्रार्थना करते हैं।

एक अन्य श्रद्धालु ने कहा कि इस बार अमावस्या मंगलवार को पड़ी है, जिससे इसका महत्व और बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि लोग गंगा माँ से देश की खुशहाली और सभी की मनोकामनाएँ पूर्ण होने की प्रार्थना कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पितरों को प्रसन्न रखना आवश्यक है, क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब पितर संतुष्ट होते हैं तो परिवार में सुख और समृद्धि बनी रहती है।

आस्था और परंपरा का संगम

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन और तीर्थाटन को सरकारी स्तर पर भी प्रोत्साहन मिल रहा है। प्रयागराज, जो महाकुंभ 2025 की भव्य मेजबानी कर चुका है, हर पर्व-तिथि पर श्रद्धालुओं के लिए स्वाभाविक आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। आषाढ़ अमावस्या पर उमड़ी यह भीड़ इस नगरी की अटूट धार्मिक आस्था का प्रमाण है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इस वर्ष उमड़ी भीड़ यह दर्शाती है कि उत्तर प्रदेश में तीर्थाटन की परंपरा केवल बड़े पर्वों तक सीमित नहीं है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि इस प्रकार के जनसमागम स्थानीय अर्थव्यवस्था — नाविकों, पुजारियों, फूल-प्रसाद विक्रेताओं — को प्रत्यक्ष लाभ पहुँचाते हैं, जो अक्सर मुख्यधारा की कवरेज में अनदेखा रह जाता है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आषाढ़ अमावस्या 2025 कब है और इसका क्या महत्व है?
आषाढ़ अमावस्या 2025 में 14 जुलाई को मंगलवार के दिन पड़ी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या का दिन पितरों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है और मंगलवार को पड़ने से इसका फल और अधिक माना जाता है।
त्रिवेणी संगम में आषाढ़ अमावस्या पर कौन-से अनुष्ठान किए जाते हैं?
त्रिवेणी संगम पर इस अवसर पर पिंडदान, तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य के अनुष्ठान किए जाते हैं। इन अनुष्ठानों का उद्देश्य पूर्वजों की आत्मा की शांति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करना होता है।
पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान क्यों किया जाता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तर्पण और पिंडदान से पितर प्रसन्न और तृप्त होते हैं। जब पितर संतुष्ट होते हैं तो परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है और देवी-देवताओं की कृपा भी प्राप्त होती है।
प्रयागराज का त्रिवेणी संगम धार्मिक दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण है?
त्रिवेणी संगम वह स्थान है जहाँ गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदियों का मिलन माना जाता है। यह स्थान वर्षभर तीर्थयात्रियों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है, और अमावस्या, पूर्णिमा जैसी विशेष तिथियों पर यहाँ श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है।
आषाढ़ अमावस्या पर मंगलवार का संयोग क्यों विशेष माना जाता है?
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, मंगलवार को पड़ने वाली अमावस्या को 'भौमवती अमावस्या' कहा जाता है और इसे अत्यंत फलदायी माना जाता है। संगम पर उपस्थित साधुओं और श्रद्धालुओं ने इस संयोग को पूजा-अनुष्ठान के लिए विशेष अवसर बताया।
राष्ट्र प्रेस
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