31 जुलाई 2026
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सोमवती अमावस्या पर आस्था का सैलाब: प्रयागराज संगम, अयोध्या सरयू और नर्मदापुरम में लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी

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सोमवती अमावस्या पर आस्था का सैलाब: प्रयागराज संगम, अयोध्या सरयू और नर्मदापुरम में लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी

सारांश

सोमवती अमावस्या इस बार महज एक तिथि नहीं — अधिक मास और सोमवार के दुर्लभ संयोग ने इसे असाधारण बना दिया। प्रयागराज, अयोध्या, उज्जैन और नर्मदापुरम के घाटों पर लाखों श्रद्धालु सुबह 4 बजे से उमड़ पड़े, जो उत्तर और मध्य भारत में आस्था की अटूट धारा का प्रमाण है।

मुख्य बातें

सोमवती अमावस्या पर 15 जून 2026 को प्रयागराज संगम , अयोध्या सरयू , उज्जैन राम घाट और नर्मदापुरम सेठानी घाट पर लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया।
इस वर्ष पर्व अधिक मास और सोमवार के दुर्लभ संयोग पर पड़ा, जिसे धार्मिक दृष्टि से विशेष शुभ माना जा रहा है।
नर्मदापुरम के सेठानी घाट पर सुबह 4 बजे से ही श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया था।
उज्जैन के पुजारी अजय जोशी के अनुसार, अधिक मास और सोमवार के संयोग से इस अमावस्या का आध्यात्मिक पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।
सभी प्रमुख घाटों पर पुलिस और होमगार्ड की टीमें तैनात रहीं; प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए।

सोमवती अमावस्या के पावन अवसर पर 15 जून 2026 को प्रयागराज के संगम तट से लेकर अयोध्या की सरयू नदी और मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम के सेठानी घाट तक लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया। इस वर्ष यह पर्व विशेष रूप से शुभ माना जा रहा है, क्योंकि यह अधिक मास और सोमवार के दिन एक साथ पड़ रहा है — एक दुर्लभ संयोग जो धार्मिक महत्व को कई गुना बढ़ा देता है।

प्रयागराज संगम पर श्रद्धा का उफान

प्रयागराज के संगम तट पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की अटूट कतार देखी गई। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पवित्र संगम पर डुबकी लगाने पहुंचे एक श्रद्धालु ने कहा कि सोमवती अमावस्या का बहुत महत्व है — इस दिन पवित्र स्नान और दान-पुण्य से आध्यात्मिक पुण्य की प्राप्ति होती है तथा व्यक्ति को आशीर्वाद व सद्गुणों की प्राप्ति होती है।

संगम तट पर उपस्थित एक संत ने कहा, 'यह बहुत खास महीना और त्योहारों का अहम समय है। आज जो भी गंगा स्नान करके जिस कामना से पूजा करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। जिन्होंने कभी कुछ नहीं किया है, उनको भी गंगा में डुबकी लगाने से विशेष फल मिलता है।'

अयोध्या में सरयू तट पर धार्मिक अनुष्ठान

अयोध्या में सरयू नदी के घाटों पर हजारों श्रद्धालुओं ने पवित्र डुबकी लगाई और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए। एक श्रद्धालु ने बताया कि अधिक मास का आज आखिरी दिन है और सरयू में स्नान से विशेष फल मिलता है। किरन तिवारी ने कहा कि सरयू नदी में स्नान का बड़ा महत्व माना गया है, जबकि कुसुम मिश्रा ने कहा कि अमावस्या पर स्नान करना काफी फलदायी होता है।

उज्जैन राम घाट पर विशेष पुण्य का संयोग

उज्जैन के राम घाट पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। पुजारी अजय जोशी ने कहा, 'सोमवती अमावस्या को वैसे भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन इस साल इसे खास तौर पर शुभ माना जा रहा है क्योंकि यह अधिक मास और सोमवार के दिन पड़ रही है। माना जाता है कि इससे भक्तों को बहुत ज्यादा आध्यात्मिक पुण्य मिलता है।'

नर्मदापुरम के सेठानी घाट पर सुबह 4 बजे से जनसैलाब

मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम में विश्व प्रसिद्ध सेठानी घाट पर सुबह 4 बजे से ही श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था। नर्मदापुरम सहित आसपास के कई जिलों से बड़ी संख्या में लोग पर्व स्नान, दान-पुण्य और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे। पूरे घाट क्षेत्र में भक्ति और धार्मिक उल्लास का वातावरण बना रहा।

प्रशासन की व्यवस्था और सुरक्षा इंतजाम

सभी प्रमुख घाटों पर प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए। पुलिस और होमगार्ड की टीमें घाट क्षेत्रों में लगातार तैनात रहकर व्यवस्था संभालती रहीं। यह पर्व हर वर्ष उत्तर और मध्य भारत के प्रमुख तीर्थस्थलों पर करोड़ों आस्थावानों को एकजुट करता है — और इस वर्ष अधिक मास के संयोग ने इसे और भी असाधारण बना दिया।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भीड़ प्रबंधन और घाट सुरक्षा पर गंभीर सवाल भी खड़े करती है। अधिक मास के संयोग ने इस वर्ष भीड़ को असामान्य रूप से बड़ा बनाया, फिर भी अधिकांश रिपोर्टें केवल भक्ति के वातावरण पर केंद्रित रहीं — घाटों की क्षमता, जल गुणवत्ता और आपदा प्रबंधन तैयारी पर कोई स्वतंत्र आकलन सामने नहीं आया। तीर्थ-पर्यटन और श्रद्धा का यह संगम राज्य सरकारों के लिए अवसर भी है और जिम्मेदारी भी।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोमवती अमावस्या 2026 कब है और इसका क्या महत्व है?
सोमवती अमावस्या 2026 में 15 जून को पड़ रही है। यह पर्व तब मनाया जाता है जब अमावस्या तिथि सोमवार को पड़े; इस वर्ष यह अधिक मास के साथ भी संयुक्त है, जिसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है।
प्रयागराज संगम पर सोमवती अमावस्या स्नान का क्या विशेष महत्व है?
प्रयागराज का संगम — गंगा, यमुना और सरस्वती का मिलन स्थल — हिंदू परंपरा में सर्वाधिक पवित्र तीर्थों में से एक है। मान्यता है कि सोमवती अमावस्या पर यहाँ स्नान करने से पाप नष्ट होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
नर्मदापुरम का सेठानी घाट क्यों प्रसिद्ध है?
नर्मदापुरम स्थित सेठानी घाट नर्मदा नदी के किनारे विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है। धार्मिक पर्वों पर यहाँ आसपास के कई जिलों से श्रद्धालु एकत्र होते हैं; इस वर्ष सोमवती अमावस्या पर सुबह 4 बजे से ही भीड़ उमड़ पड़ी।
अधिक मास और सोमवती अमावस्या का संयोग कितना दुर्लभ है?
अधिक मास (जिसे मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं) लगभग हर 32-33 महीने में एक बार आता है। जब यह सोमवती अमावस्या के साथ पड़ता है, तो इसे धार्मिक ग्रंथों में विशेष पुण्यकाल माना जाता है।
सोमवती अमावस्या पर घाटों पर सुरक्षा के क्या इंतजाम किए गए?
प्रमुख घाटों पर प्रशासन ने पुलिस और होमगार्ड की टीमें तैनात कीं। घाट क्षेत्रों में निरंतर गश्त और भीड़ प्रबंधन के लिए व्यापक व्यवस्था की गई ताकि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
राष्ट्र प्रेस
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