अधिक मास पूर्णिमा 2026: प्रयागराज संगम और अयोध्या सरयू घाट पर लाखों श्रद्धालुओं का पवित्र स्नान
सारांश
मुख्य बातें
अधिक मास पूर्णिमा के पावन अवसर पर रविवार, 31 मई 2026 को प्रयागराज के त्रिवेणी संगम और अयोध्या के सरयू घाटों पर लाखों श्रद्धालु उमड़ पड़े। ब्रह्म मुहूर्त से ही दोनों तीर्थ स्थलों पर भीड़ का सैलाब देखा गया, जहाँ आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम हुआ। उत्तर प्रदेश के इन प्रमुख धार्मिक केंद्रों पर दिनभर स्नान, दान और पूजा-अर्चना का क्रम जारी रहा।
प्रयागराज संगम पर उमड़ा आस्था का सैलाब
प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर सुबह के पहले प्रहर से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा होने लगी। ब्रह्म मुहूर्त में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में डुबकी लगाने की परंपरा के अनुसार हजारों लोग घाटों पर एकत्रित हुए। इस अवसर पर स्नान के साथ-साथ दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठानों का भी विशेष आयोजन रहा।
तीर्थ पुरोहित गोपाल गुरु ने इस अवसर के आध्यात्मिक महत्व को स्पष्ट करते हुए कहा, 'आज हम इसे अधिक मास या भगवान पुरुषोत्तम मास कहते हैं। उनकी समस्त मनोकामनाएं और इच्छाएं पूर्ण होती हैं और उनके अनुष्ठान संपन्न होते हैं। जो व्यक्ति प्रयाग में स्नान करने के उपरांत व्याकेश करता है, भगवान के साथ उसके पितृ भी प्रसन्न होते हैं। धन-धान्य की प्राप्ति होती है।'
अयोध्या में सरयू स्नान के बाद मंदिरों में दर्शन
अयोध्या में भी सरयू नदी के घाटों पर हजारों श्रद्धालु एकत्रित हुए। पवित्र स्नान के पश्चात श्रद्धालु मंदिरों और मठों में दर्शन-पूजन के लिए पहुँचे। घाटों पर सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर प्रशासन की तैयारियाँ भी सराहनीय रहीं।
सरयू स्नान के बाद श्रद्धालु रामचरण यादव ने कहा, 'आज अधिक मास पूर्णिमा है। इस अवसर पर हमने यहाँ स्नान किया है। नदी के घाट पर भक्तों की भारी भीड़ है। यहाँ की व्यवस्थाओं को देखकर काफी अच्छा लगा है।' एक महिला श्रद्धालु ने भी कहा, 'अधिक मास चल रहा है और ज्येष्ठ पूर्णिमा है, इसलिए हम लोग यहाँ नहाने आए हैं। ज्येष्ठ पूर्णिमा का बहुत महत्व होता है — हम अभी मंदिर में दर्शन के लिए जाएंगे।'
पुरुषोत्तम मास का धार्मिक महत्व
शास्त्रों के अनुसार पुरुषोत्तम मास में अधिक पूर्णिमा का दिन अत्यंत शुभ और विशेष माना जाता है। इस दिन विष्णु सहस्रनाम पाठ, हरिवंश पुराण और पुरुषोत्तम मास कथा का श्रवण करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। भगवान विष्णु को प्रिय यह मास आध्यात्मिक उन्नति और पुण्य प्राप्ति का उत्तम अवसर माना जाता है। गौरतलब है कि अधिक मास प्रत्येक तीन वर्षों में एक बार आता है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।
आम जनता पर असर और आगे की स्थिति
उत्तर प्रदेश के दोनों प्रमुख तीर्थ नगरों में श्रद्धालुओं की भारी आवाजाही को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने घाटों पर विशेष व्यवस्था की थी। यह ऐसे समय में आया है जब प्रयागराज पहले ही महाकुंभ 2025 की सफलता के बाद धार्मिक पर्यटन के केंद्र के रूप में देशभर में चर्चा में है। अधिक मास के शेष दिनों में भी श्रद्धालुओं के आगमन का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।