सोमवती अमावस्या पर हरिद्वार में लाखों श्रद्धालुओं का गंगा स्नान, 300 साल बाद बना दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग
सारांश
मुख्य बातें
हरिद्वार में सोमवती अमावस्या के अवसर पर 15 जून को आस्था का असाधारण दृश्य उपस्थित हुआ, जब लाखों श्रद्धालुओं ने हर की पौड़ी सहित गंगा के प्रमुख घाटों पर पवित्र स्नान किया। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी के अनुसार, लगभग 300 वर्षों बाद ज्योतिषीय गणना के आधार पर जेठ माह में अमावस्या, अधिक मास और ग्रहों की विशेष स्थिति का यह दुर्लभ संयोग बना है, जिसने इस पर्व का महत्व कई गुना बढ़ा दिया।
मुख्य घटनाक्रम
सुबह तड़के से ही श्रद्धालुओं की भीड़ हर की पौड़ी और गंगा के अन्य घाटों पर उमड़ने लगी। श्रद्धालुओं ने मां गंगा में डुबकी लगाकर पूजा-अर्चना की और अपने पूर्वजों का तर्पण किया। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में धार्मिक पर्यटन और तीर्थाटन में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है।
300 साल बाद दुर्लभ योग — धार्मिक महत्व
महंत रवींद्र पुरी ने बताया कि वर्तमान ग्रह-स्थिति, समवर्ती अमावस्या और अधिक मास का यह त्रिसंयोग अत्यंत विरल है। उन्होंने कहा कि इस दिन सर्वप्रथम गंगा स्नान, तत्पश्चात भगवान शिव का अभिषेक और मध्याह्न काल — लगभग सुबह 11:30 से दोपहर 12 बजे के बीच — पितरों का तर्पण करना विशेष फलदायी माना जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि जो लोग घर पर हों, वे स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर पूर्वजों का स्मरण कर सकते हैं। हरिद्वार, प्रयागराज और अयोध्या (सरयू तट) सहित सभी प्रमुख तीर्थस्थलों पर इस दिन स्नान और तर्पण का विशेष पुण्य बताया गया है।
पुरी ने भगवद्गीता के हवाले से पीपल वृक्ष के महत्व पर भी प्रकाश डाला — 'वृक्षों में मैं अश्वत्थ (पीपल) हूं' — और कहा कि सोमवती अमावस्या पर पीपल का अभिषेक कर जल अर्पित करने की परंपरा धार्मिक एवं पर्यावरणीय दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है।
प्रशासनिक तैयारियाँ
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) नवनीत सिंह भुल्लर ने स्वयं घटनास्थल पर पहुँचकर व्यवस्थाओं का जायज़ा लिया और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। जिलाधिकारी दीक्षित ने बताया कि घाटों पर सभी ज़रूरी इंतज़ाम सुनिश्चित किए गए हैं और स्नान सकुशल जारी है।
सुरक्षा व्यवस्था
SSP भुल्लर के अनुसार, मेले को सुव्यवस्थित रूप से संपन्न कराने के लिए 6 सुपर ज़ोन, 16 ज़ोन और 40 सेक्टर बनाए गए हैं। इनमें डिप्टी एसपी, सीओ, इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी तैनात हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए SDRF, NDRF, बम निरोधक दस्ता (BDS) और डॉग स्क्वायड की टीमें भी मौजूद रहीं। इसके अतिरिक्त BSC और CPA टीमें भी सक्रिय रहीं।
आम जनता पर असर
इस दुर्लभ संयोग के कारण इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य से कहीं अधिक रही। देशभर से तीर्थयात्री हरिद्वार पहुँचे और गंगा स्नान, दान-पुण्य तथा पितृ-तर्पण में भाग लिया। स्थानीय व्यापारियों और नाविकों के लिए भी यह पर्व आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा। आने वाले दिनों में भी तीर्थयात्रियों के हरिद्वार आगमन का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।