31 जुलाई 2026
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सोमवती अमावस्या पर हरिद्वार में लाखों श्रद्धालुओं का गंगा स्नान, 300 साल बाद बना दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग

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सोमवती अमावस्या पर हरिद्वार में लाखों श्रद्धालुओं का गंगा स्नान, 300 साल बाद बना दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग

सारांश

300 वर्षों में पहली बार जेठ माह में अमावस्या, अधिक मास और विशेष ग्रह-स्थिति का त्रिसंयोग बना — और हरिद्वार में लाखों श्रद्धालु हर की पौड़ी पर उमड़ पड़े। अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने इसे अत्यंत शुभ बताया; प्रशासन ने 6 सुपर ज़ोन और NDRF-SDRF तैनात कर सुरक्षा सुनिश्चित की।

मुख्य बातें

15 जून को हरिद्वार में सोमवती अमावस्या पर लाखों श्रद्धालुओं ने हर की पौड़ी सहित गंगा घाटों पर पवित्र स्नान किया।
अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी के अनुसार लगभग 300 वर्षों बाद जेठ माह में अमावस्या, अधिक मास और विशेष ग्रह-स्थिति का दुर्लभ संयोग बना।
पितृ-तर्पण का शुभ मुहूर्त सुबह 11:30 से दोपहर 12 बजे के बीच बताया गया।
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित और SSP नवनीत सिंह भुल्लर ने स्वयं घटनास्थल पर व्यवस्थाओं का जायज़ा लिया।
सुरक्षा के लिए 6 सुपर ज़ोन , 16 ज़ोन , 40 सेक्टर बनाए गए; SDRF , NDRF , BDS और डॉग स्क्वायड तैनात रहे।

हरिद्वार में सोमवती अमावस्या के अवसर पर 15 जून को आस्था का असाधारण दृश्य उपस्थित हुआ, जब लाखों श्रद्धालुओं ने हर की पौड़ी सहित गंगा के प्रमुख घाटों पर पवित्र स्नान किया। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी के अनुसार, लगभग 300 वर्षों बाद ज्योतिषीय गणना के आधार पर जेठ माह में अमावस्या, अधिक मास और ग्रहों की विशेष स्थिति का यह दुर्लभ संयोग बना है, जिसने इस पर्व का महत्व कई गुना बढ़ा दिया।

मुख्य घटनाक्रम

सुबह तड़के से ही श्रद्धालुओं की भीड़ हर की पौड़ी और गंगा के अन्य घाटों पर उमड़ने लगी। श्रद्धालुओं ने मां गंगा में डुबकी लगाकर पूजा-अर्चना की और अपने पूर्वजों का तर्पण किया। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में धार्मिक पर्यटन और तीर्थाटन में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है।

300 साल बाद दुर्लभ योग — धार्मिक महत्व

महंत रवींद्र पुरी ने बताया कि वर्तमान ग्रह-स्थिति, समवर्ती अमावस्या और अधिक मास का यह त्रिसंयोग अत्यंत विरल है। उन्होंने कहा कि इस दिन सर्वप्रथम गंगा स्नान, तत्पश्चात भगवान शिव का अभिषेक और मध्याह्न काल — लगभग सुबह 11:30 से दोपहर 12 बजे के बीच — पितरों का तर्पण करना विशेष फलदायी माना जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि जो लोग घर पर हों, वे स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर पूर्वजों का स्मरण कर सकते हैं। हरिद्वार, प्रयागराज और अयोध्या (सरयू तट) सहित सभी प्रमुख तीर्थस्थलों पर इस दिन स्नान और तर्पण का विशेष पुण्य बताया गया है।

पुरी ने भगवद्गीता के हवाले से पीपल वृक्ष के महत्व पर भी प्रकाश डाला — 'वृक्षों में मैं अश्वत्थ (पीपल) हूं' — और कहा कि सोमवती अमावस्या पर पीपल का अभिषेक कर जल अर्पित करने की परंपरा धार्मिक एवं पर्यावरणीय दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है।

प्रशासनिक तैयारियाँ

जिलाधिकारी मयूर दीक्षित और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) नवनीत सिंह भुल्लर ने स्वयं घटनास्थल पर पहुँचकर व्यवस्थाओं का जायज़ा लिया और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। जिलाधिकारी दीक्षित ने बताया कि घाटों पर सभी ज़रूरी इंतज़ाम सुनिश्चित किए गए हैं और स्नान सकुशल जारी है।

सुरक्षा व्यवस्था

SSP भुल्लर के अनुसार, मेले को सुव्यवस्थित रूप से संपन्न कराने के लिए 6 सुपर ज़ोन, 16 ज़ोन और 40 सेक्टर बनाए गए हैं। इनमें डिप्टी एसपी, सीओ, इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी तैनात हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए SDRF, NDRF, बम निरोधक दस्ता (BDS) और डॉग स्क्वायड की टीमें भी मौजूद रहीं। इसके अतिरिक्त BSC और CPA टीमें भी सक्रिय रहीं।

आम जनता पर असर

इस दुर्लभ संयोग के कारण इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य से कहीं अधिक रही। देशभर से तीर्थयात्री हरिद्वार पहुँचे और गंगा स्नान, दान-पुण्य तथा पितृ-तर्पण में भाग लिया। स्थानीय व्यापारियों और नाविकों के लिए भी यह पर्व आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा। आने वाले दिनों में भी तीर्थयात्रियों के हरिद्वार आगमन का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ प्रशासनिक तंत्र अब मेगा-इवेंट प्रबंधन की भाषा में सोचने लगा है। हालाँकि, लाखों की भीड़ और सीमित घाट-क्षमता के बीच भगदड़ और डूबने की घटनाओं का जोखिम हमेशा बना रहता है — जो मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है। 300 साल के दुर्लभ संयोग का दावा श्रद्धालुओं को आकर्षित करने में सफल रहा, लेकिन इसका स्वतंत्र ज्योतिषीय सत्यापन सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। असली परीक्षा यह है कि क्या बढ़ती भीड़ के साथ सुरक्षा ढाँचा भी उसी अनुपात में मज़बूत हो रहा है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोमवती अमावस्या क्या है और इसका क्या महत्व है?
सोमवती अमावस्या वह अमावस्या तिथि है जो सोमवार को पड़ती है और हिंदू धर्म में इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन गंगा स्नान, पितृ-तर्पण और दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया जाता है।
इस बार सोमवती अमावस्या को 300 साल बाद दुर्लभ क्यों कहा जा रहा है?
अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी के अनुसार, ज्योतिषीय गणना के आधार पर लगभग 300 वर्षों बाद जेठ माह में अमावस्या, अधिक मास और ग्रहों की विशेष स्थिति का एक साथ संयोग बना है, जो इसे अत्यंत दुर्लभ बनाता है।
सोमवती अमावस्या पर पितृ-तर्पण का सही समय क्या है?
महंत रवींद्र पुरी के अनुसार, पितृ-तर्पण मध्याह्न काल में — लगभग सुबह 11:30 से दोपहर 12 बजे के बीच — करना सर्वाधिक फलदायी माना गया है। इससे पहले गंगा स्नान और भगवान शिव का अभिषेक करने का विधान बताया गया है।
हरिद्वार में सोमवती अमावस्या पर सुरक्षा की क्या व्यवस्था की गई?
SSP नवनीत सिंह भुल्लर के अनुसार, 6 सुपर ज़ोन, 16 ज़ोन और 40 सेक्टर बनाए गए, जिनमें डिप्टी एसपी से लेकर सब-इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी तैनात रहे। SDRF, NDRF, बम निरोधक दस्ता (BDS) और डॉग स्क्वायड भी मौजूद रहे।
जो लोग हरिद्वार नहीं जा सकते, वे सोमवती अमावस्या पर क्या करें?
महंत रवींद्र पुरी ने बताया कि जो लोग घर पर हों, वे स्नान के जल में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं और अपने पूर्वजों का स्मरण कर सकते हैं। यह भी उतना ही पुण्यदायक माना गया है।
राष्ट्र प्रेस
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